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आगे बढ़ती मध्य पूर्व की अटकी गाड़ी

१५ सितम्बर २०१०

इस्राएल और फलस्तीन के बीच अमरीकी मध्यस्थता में चल रही मध्य पूर्व शांतिवार्ता सही दिशा में आगे बढ़ रही है. अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने इस मसले पर दोनों पक्षों की संजीदगी को सराहा है. इससे शांति की उम्मीद जगी है.

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तस्वीर: AP

इस्राएली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू और फलस्तीनी नेता महमूद अब्बास की मिस्र के शर्मअलशेख में दूसरे दौर की बातचीत की प्रगति पर क्लिंटन ने संतोष जताते हुए कहा कि यह अमन की दिशा में ही जा रही है. उन्होंने बताया कि दोनों नेता बातचीत को आगे बढ़ाने और दशकों पुरानी इस समस्या के उन सभी मूल मुद्दों पर बात करने के लिए तैयार हो गए हैं जिन्हें अब तक वे छूने से भी कतराते थे.

इसके लिए दोनों की यरूशलम में मुलाकात होगी. क्लिंटन ने इसे खून खराबे के पुराने दौर की समाप्ति की दिशा में अहम पड़ाव बताया. हालांकि उन्होंने पश्चिमी तट पर यहूदी बस्तियां हटाने के मुद्दे पर आम सहमति के करीब पंहुच पाने के सवाल का कोई जवाब नहीं दिया. कल दोनों नेता इस मुद्दे पर किसी समझौते की संभावना तलाशने में नाकाम रहे थे. दोनों पक्षों के बीच बातचीत के एजेंडे में इस्रराएली बस्तियां हटाने और फलस्तीन की सीमा में इस्राएल के हमले रोकने के मुद्दे सबसे ऊपर हैं.

Hillary Rodham Clinton Besuch China
बातचीत से अमेरिका खुशतस्वीर: AP

इस बीच क्लिंटन ने इस्राएल के राष्ट्रपति शिमोन पेरित्स से मुलाकात कर उन्हें बातचीत की प्रगति से अवगत कराया. इसके बाद संवाददाताओं को उन्होंने बताया कि नेतान्याहू और अब्बास ने समस्या के मूल बिंदुओं पर बात करना शुरू कर दिया है. मामले को सुलझाने का यही एकमात्र तरीका है कि दोनों पक्ष आमने सामने बात करें. क्लिंटन ने इस बात पर खुशी जताई कि दोनों नेताओं ने एक साल के भीतर विवाद का हल खोज लेने का संकल्प भी व्यक्त किया है.

उन्होंने कहा कि नेतान्याहू और अब्बास इसे लेकर काफी गंभीर हैं साथ ही इस समय यथास्थिति भी लागू है जिसका आगे जारी रहना अनिश्चित है. इसलिए दोनों को इस अवसर का पूरा फायदा उठाना चाहिए. इस बीच क्लिंटन फलस्तीनी प्रधानमंत्री सलाम फैयाद से भी मुलाकात कर अगले साल के मध्य तक फलस्तीन को एक देश की शक्ल देने के लिए जरूरी संस्थाओं के गठन की योजना पर विचार विमर्श करेंगी. शांति प्रक्रिया की यह सबसे अहम योजना है जिसे पूरा करने की जिम्मेदारी फैयाद की है.

दोनों पक्षों ने समस्या के मूल पहलुओं के रूप में फलस्तीनी शरणार्थियों की स्थिति, यरूशलम का दर्जा, फलस्तीन की सीमाओं का निर्धारण और सुरक्षा इंतजामों के मसलों को चिन्हित किया है. यरूशलम में अगले दौर की बातचीत से पहले नेतान्याहू क्लिंटन के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे इसके बाद अब्बास की मौजूदगी के साथ त्रिपक्षीय बातचीत होगी.

रिपोर्टः एजेंसियां/निर्मल

संपादनः उज्ज्वल भट्टाचार्य

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