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क्यों आ रही हैं प्राकृतिक आपदाएं?

२१ सितम्बर २०१०

रूस में जंगल में आग, पाकिस्तान में बाढ़. क्या जलवायु परिवर्तन की वजह से ऐसा हो रहा है? इनके कारणों का पता लगाने की एक कोशिश.

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पाकिस्तान की भयंकर बाढ़तस्वीर: AP

सारी दुनिया में तहलका मचा हुआ है - पाकिस्तान में भयानक बारिश और बाढ़, चीन में भूस्खलन का सिलसिला, पेरु में कड़कती ठंडक, और रूस के व्यापक इलाके में जंगली आग. क्या जलवायु परिवर्तन से इनका लेना देना है. इस सवाल पर वैज्ञानिकों के बीच मतभेद है. इतना तो वे मानते हैं कि सौर ऊर्जा में कमी और ठंडक के बीच कहीं न कहीं एक रिश्ता है. वैसे मौसम का बर्ताव कुछ अजीबोगरीब तो है ही - यह भी वे मानते हैं. जेनेवा के विश्व जलवायु शोध कार्यक्रम के साथ जुड़े रूसी भौतिक शास्त्री व्लादिमीर रियाबिनीन का कहना है:

तापलहरी के दौरान मॉस्को में अधिकतम तापमान का अब तक का रिकॉर्ड 22 बार टूट चुका है. पाकिस्तान में रिकॉर्डतोड़ बेतहाशा बारिश हुई है. कई देशों के मौसम विभाग की ओर से पता लगाने की कोशिश की जा रही है, कि ऐसा क्यों हो रहा है? अफसोस कि इसके सटीक कारणों का अभी हमें पता नहीं है.

कुछ बातों का तो पता चला है. मसलन ब्रिटिश मौसम विभाग मेट के अनुसार पूर्वी यूरोप और एशिया में वायु संचारण में भारी व्यवधान पैदा हो गया था और कई हफ्तों तक जेट स्ट्रीम रुका रहा. जेट स्ट्रीम मध्यवर्ती अक्षांश में काफी ऊंचाई पर हवा की उस धारा को कहते हैं, जिसके साथ उड़ान भरते हुए विमान कम समय में अपनी मंजिल तक पहुंच जाते हैं.

आम तौर पर यह पश्चिम से पूरब की ओर बहती है, लेकिन गर्मी के मौसम में एक उच्चताप क्षेत्र में यह रुक गया. कहा जा सकता है कि मौसम रुका रहा. जेट स्ट्रीम की गति मद्धिम होकर दक्षिण की ओर हो गई. मानसूनी हवा के ऊपर ठंडी हवा का एक क्षेत्र बना रहा. और इसकी वजह से दक्षिण एशिया में कहीं अधिक बारिश हुई. व्लादिमीर रियाबिनीन की राय में एक दूसरे के विपरीत मौसम के बीच एक आपसी संबंध है. वह कहते हैं:

रूस के मौसम की वजह से मानसूनी इलाके की हवा अपने क्षेत्र में रुकी रही. एक ओर हिमालय था, दूसरी ओर उच्चताप का क्षेत्र. मुझे लगता है कि यह हवा इसलिए भी रुकी रह गई, क्योंकि इस बीच अरब प्रायद्वीप में काफी गर्म हवा का क्षेत्र बना हुआ था. और अंततः भारी बारिश का क्षेत्र चीन तक भी पहुंच गया.

प्रशांत महासागर के उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में एक दूसरी स्थिति है. वहां मानसून नहीं, बल्कि कभी एल नीनो होता है तो कभी ला नीना. एल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर के पूरब में दक्षिण अमेरिकी तट के पास गर्मी होती है और एशिया के पास पश्चिम में ठंडक. ला नीना में स्थिति उलटी होती है. इन दिनों वहां ला नीना का दौर चल रहा है, यानी पश्चिम में एशिया के पास गर्मी. और इसका असर हिंद महासागर और मानसून पर पड़ रहा है. व्लादिमीर रियाबिनीन कहते हैं:

ला नीना भारत में तेज बारिश की हवा के साथ जुड़ रही है. जब हिंद महासागर के क्षेत्र में तापमान बढ़ता है, तो हवा में नमी भी बढ़ जाती है और मानसून के साथ वह समुद्र से जमीन की ओर जाती है.

यानी ला नीना की वजह से भारत में मानसून की ताकत बढ़ी. लेकिन सारे विश्व में जलवायु परिवर्तन के साथ इसका क्या लेनादेना है? क्या उसकी वजह से रूस में आग लगी और पाकिस्तान पानी में डूबा? व्लादिमीर रियाबिनीन बताते हैं:

2007 की विश्व जलवायु रिपोर्ट के अनुसार तेज गर्मी और कड़ी ठंडक की संभावना बढ़ती रहेगी. जो कुछ हम अभी देख रहे हैं, उससे भी इसकी पुष्टि होती है. मुझे लगता है कि हमें अक्सर ऐसी स्थिति के मुकाबले के लिए तैयार रहना पड़ेगा.

रिपोर्ट: फोल्कर म्रासे/उभ

संपादन: वी कुमार

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