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जरूरत के वक्त गैरहाजिर रहने वालों में जरदारी टॉप पर

२२ अगस्त २०१०

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को एक लिस्ट में पहला नंबर मिला है. यह लिस्ट ऐसे बड़े लोगों की है जो तब गैरहाजिर रहे जब उनकी सबसे ज्यादा जरूरत पड़ी. जरदारी हाल ही में बाढ़ के दौरान अपने देश में नहीं थे.

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तस्वीर: AP

मशहूर अमेरिकी पत्रिका 'फॉरेन पालिसी' ने पांच लोगों की एक सूची जारी की है. पत्रिका ने लिखा है कि जब पाकिस्तान अपनी सबसे भयानक बाढ़ और आतंकवाद से जूझ रहा है, तब जरदारी यूरोप की यात्रा पर चले गए.

इस लिस्ट में अगला नंबर मॉस्को के मेयर यूरी लुजखोव का है जो रूस में लगी जंगल की आग से निपटने के बजाय ऑस्ट्रिया में फिजिकल थेरेपी ले रहे थे. तीसरे नंबर पर हैती में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे वाइक्लेफ ज्यां का नाम है जो भूकंप के राहत कार्यों में मौजूद रहने के बजाय गायब रहे.

लिस्ट में ब्रिटिश पेट्रोलियम के सीईओ टोनी हेवर्ड को भी जगह मिली है. जब उनकी कंपनी अमेरिका में तेल रिसाव से जूझ रही थी, तब वह वाइट द्वीप के आसपास अपने यॉट पर सैर करते पाए गए. पांचवें नंबर पर हैं ब्रिटेन की सबसे बड़ी मजदूर यूनियन यूनाइट के महासचिव टोनी वूडली. जब देश में एयरलाइंस की हड़ताल चल हुई, तब वूडली मेडिटेरेनियन आइलैंड की एक विला में मजे कर रहे थे.

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रूस में जरदारीतस्वीर: AP

पत्रिका कहती है, "जब कोई कुदरती आपदा आती है तो एक वैश्विक नेता का राहत कार्यों का निर्देशन करते या कम से कम लोगों से सहानुभूति दिखाते नजर आना अच्छा होता है. लेकिन पाकिस्तान के राष्ट्रपति जरदारी के लिए यूरोप की यात्रा ज्यादा अहम रही. यहां तक कि अमेरिकी अधिकारियों ने निजी तौर पर उनसे अपनी यात्रा छोटी करने के लिए कहा था, तब भी उन्होंने ऐसा नहीं किया और इस शान ओ शौकत से भरपूर यात्रा को जारी रखा. कहा जा रहा है कि वह इस यात्रा के दौरान ऐसे होटलों में रहे जिनके एक कमरे का एक दिन का किराया 11 हजार अमेरिकी डॉलर है."

हालांकि पत्रिका ने लिखा है कि जरदारी के अफसरों ने इस बात का खंडन किया है. उन्होंने कहा है कि जरदारी लंदन के सबसे सस्ते फाइव स्टार होटल चर्चिल हयात रीजेंसी में रहे और वहां भी वह रॉयल स्वीट में नहीं रुके.

पत्रिका लिखती है कि पाकिस्तानी राष्ट्रपति की यह यात्रा ज्यादा मजेदार नहीं रही क्योंकि लंदन में एक आम सभा के दौरान एक पाकिस्तानी मूल के नाराज ब्रिटिश नागरिक ने उन पर जूता फेंका. उस व्यक्ति ने कहा, "उस वक्त अपना विरोध दर्ज कराने के लिए मुझे यही रास्ता नजर आया."

जरदारी की गैरहाजरी यूरोप यात्रा तक ही सीमित नहीं रही. वह 18 अगस्त को रूस पहुंच गए जहां उन्होंने ब्लैक सी रिजॉर्ट में रूसी, अफगानी और ताजिकिस्तानी नेताओं के साथ एक बैठक में हिस्सा लिया. हालांकि इससे पहले खासी आलोचना झेल चुके जरदारी सबक सीख चुके थे इसलिए वह रूस में खाने के लिए भी नहीं रुके और फौरन वापस आ गए.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ओ सिंह