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नायक नहीं, खलनायक से प्यार

४ नवम्बर २०१०

सुपर हीरो वाली फिल्मों में हीरोइन का नायक से प्यार हो जाना आम बात है. अब चाहे वह स्पाइडरमैन हो या सुपरमैन. लेकिन सुपर हीरो वाली एक नई थ्री डी कार्टून फिल्म मेगामाइंड में हीरोइन विलन से प्यार करती नजर आएगी.

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तस्वीर: 2006 Warner Bros. Ent.

कभी कभी सुपर हीरो भी हार जाता है, जिंदगी में ही नहीं, बल्कि प्यार में भी. और उसकी प्रेमिका उसके जानी दुश्मन की बाहों में होती है. सोचने वाली बात है कि अगर स्पाइडरमैन की प्रेमिका को उसके दुश्मन से ही प्यार हो जाए तो कहानी में ट्विस्ट काफी दिलचस्प हो सकता है. कुछ ऐसी ही फिल्म है मेगामाइंड.

मेगामाइंड खलनायक है और इस किरदार को आवाज देने वाले विल फेरेल कहते हैं, "मुझे यह आइडिया अच्छा लगा क्योंकि यह बहुत ही अनोखा है. फिल्म में बाकी लोगों के साथ काम करना भी मेरे लिए बहुत ही दिलचस्प रहा." फिल्म का हीरो है मेट्रोमैन जिसे अपनी आवाज से हॉलीवुड के सुपर स्टार ब्रैड पिट ने नवाजा है. सुपरमैन की गर्लफ्रेंड लोइस की तरह ही इस फिल्म में रॉक्सैन रिची पत्रकार हैं. अभिनेत्री टीना फैय ने इस किरदार के लिए अपनी आवाज दी है.

नीली त्वचा और हरी आंखों वाले मेगामाइंड और मेट्रोमैन दूसरे ग्रह से हैं. बचपन में ही उनके माता पिता ब्रह्मांड में ब्लैक होल की टक्कर से डर कर अपने बच्चों को पृथ्वी पर भेज देते हैं. मैट्रोमैन एक अच्छे खुशहाल परिवार में पल बढ़ कर एक जिम्मेदार इंसान बनता है. वहीं मेगामाइंड पहुंचता है जिसकी परवरिश जेल में आतंक और अत्याचार के बीच हुई है. मेगामाइंड अपराध को गले लगा लेता है और उसका विनाश करने मेट्रोमैन पहुंचता है.

मेगामाइंड मेट्रो सिटी को नष्ट करने पर तुला हुआ है जबकि मेट्रोमैन उसे लगातार रोकने की कोशिश करता है. जब मेगामाइंड जीत हासिल कर लेता है तो उसकी जिंदगी का एक मात्र लक्ष्य भी खत्म हो जाता है. फिर उसे पत्रकार रिची से प्यार हो जाता है.

फिल्म के निर्देशक टॉम मैकग्राथ कहते हैं कि फिल्म के प्लॉट की शुरुआत में ही उन्हें लगा कि अगर सुपरमैन को हटा दिया जाए और उसके जानी दुश्मन लेक्स लूथर को पत्रकार लोइस से प्यार हो जाए, तो कहानी कैसी होगी. उसके बाद फिल्म की कहानी लिखी गई और कास्टिंग की गई. मैकग्राथ कहते हैं कि यह एक सुपर हीरो की फिल्म है, लेकिन उससे ज्यादा यह एक बहुत ही संवेदनशील प्रेम कहानी है. जाहिर है फिल्म के जरिए निर्देशक अपने विचारों को और गहराई में परखने की कोशिश कर रहे हैं. बदलते हालात में सच और झूठ, सही और गलत के बीच फासले कम हो रहे हैं और यही फिल्म की पटकथा में भी दिखता है.

रिपोर्टः रॉयटर्स/एमजी

संपादनः ए कुमार

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