प्लेबॉय के संस्थापक ह्यू हेफनर नहीं रहे

दुनिया भर में मशहूर व्यस्कों की पत्रिका प्लेयबॉय के संस्थापक ह्यू हेफनर का 91 साल की आयु में निधन हो गया है. प्लेबॉय के मुताबिक उनकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई.

प्लेबॉय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि उन्होंने अपने घर पर अंतिम सांस ली और उस वक्त उनके आसपास उनके सभी "प्रियजन" मौजूद थे. प्लेयबॉय ने ट्विटर पर भी उनके निधन की पुष्टि की है. 

हेफनर ने 1953 में उस वक्त प्येबॉय मैगजीन की शुरुआत की जब अमेरिका समाज बेहद रुढ़िवादी माना जाता था. उस वक्त उनके हाथ में सिर्फ छह सौ डॉलर थे और आठ हजार डॉलर उन्होंने पत्रिका के लिए लोन लिये थे.

प्लेबॉय के पहले कवर पर मशहूर अभिनेत्री मार्लिन मुनरो थी और इसमें कुछ नग्न तस्वीरों के अलावा दिलचस्प लेख थे. सेक्स को लेकर इस पत्रिका के खुलेपन ने इसे अलग पहचान दी और इसने नया ट्रेंड स्थापित किया.

मीडिया

अक्टूबर 2015

मीडिया

जुलाई 2015

मीडिया

केट मॉस, जनवरी 2014

मीडिया

नवंबर 2013

मीडिया

दिसंबर 2007

मीडिया

अाना निकोल स्मिथ, जून 1993

मीडिया

जून 1965

मीडिया

जैनेट पिलग्रिम, जुलाई 1955

लॉस एंजलेस टाइम्स के मुताबिक हेफनर अमेरिकी पुरुषों की तीन पीढ़ियों के "गॉडफादर" रहे हैं जिन्होंने अमेरिकी पुरुषों को सेक्स के प्रति आडंबर से दूर किया और सेक्स की उस उच्छृंखलता से उनका परिचय कराया जिससे उस वक्त उनके लाखों पाठक अंजान थे. उनकी पत्रिका को खूब कामयाबी मिली. 1960 के दशक में अमेरिका में 22 प्लेबॉय क्लब बन गये थे जबकि ऐसे कई क्लब विदेशों में भी थे.

दशकों तक यह सिलसिला जारी रहा. लेकिन इंटरनेट में जब पोर्न और सेक्स संबंधी सामग्री आसानी से मिलने लगी तो इस पत्रिका के पाठकों की संख्या घटती गयी. 2015 तक इसका सर्कुलेशन घटकर सिर्फ आठ लाख रह गया और फिर प्लेबॉय ने घोषणा की कि अब वह नग्न महिलाओं की तस्वीरें नहीं छापेगी. लेकिन बाद में इस फैसले को बदल दिया गया. 

अपने रंगीन मिजाज के अलावा हेफनर कई गंभीर विषयों पर भी सक्रिय थे जिनमें समेकन, विभिन्न नस्ल के लोगों के बीच प्यार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रमुख हैं.

एके/ओएसजे (डीपीए)

जर्मनी में फ्राइक्योर्परकुल्टूअर (एफकेके) यानि फ्री बॉडी कल्चर की परंपरा कई दशक पुरानी है. सार्वजनिक रूप से नग्न होने की परंपरा का उल्लेख 19वीं सदी के उत्तरार्ध में मिलता है. बाद में इनको खेलों के साथ भी जोड़ दिया गया.

एफकेके आंदोलन को नाजी शासन ने कुचल दिया था. लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के बाद के काल में तत्कालीन पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी में ये फिर से फला फूला. खासकर पूर्वी जर्मनी में.

इस आंदोलन को केवल प्रकृति के पास आने का प्रयास ही नहीं बल्कि शारीरिक तंदुरुस्ती से भी जोड़ कर देखा जाता था. जर्मन न्यूडिटी एसोसिएशन सन 1963 में जर्मनी के ओलंपिक खेलों के परिसंघ से जुड़ गए. इससे न्यूड मूवमेंट्स और खेलों के बीच संबंध गहराया.

हाल के सालों में इन एसोसिएशनों में नए सदस्यों का जुड़ना कम हुआ है. इस समय आधिकारिक जर्मन न्यूडिटी एसोसिएशन के करीब 40,000 सदस्य हैं.हर उम्र के लोग देश के अलग अलग हिस्सों में खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए इकट्ठा होते हैं.

प्रतियोगिताओं में हाइकिंग (तस्वीर में), ब्यूल्स, वॉलीबॉल और तैराकी जैसे तमाम खेल शामिल हैं. जाहिर है सभी में खेल के अपने नियमों के अलावा बिना कपड़ों के इन्हें खेलने की शर्त होती है.

जर्मनी के ज्यादातर सॉना महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए हैं. और उनमें आमतौर पर कपड़े पहनने की अनुमति नहीं होती है. जर्मन लोगों को इससे ज्यादा परेशानी नहीं क्योंकि ऐसा नहीं होता कि कोई किसी को बिना कपड़ों के देख कर घूरता या मुस्कराता हो.

जर्मनी में पहला एफकेके का पहला आधिकारिक न्यूडिस्ट बीच 1920 में सिल्ट द्वीप पर खुला. यह जर्मनी और डेनमार्क की सीमा के पास का एक द्वीप है. इसके बाद तो बोर्कुम, नॉर्डर्ने और आमरूम जैसे की द्वीपों पर एफकेके बीच बने. बाल्टिक सागर के उजेडोम और यूर्गेन द्वीप आजकल बहुत लोकप्रिय हैं.

इसके अलावा कई समुद्री तटों पर पूरा नहीं तो कुछ हिस्सा बिना कपड़ों के रहना पसंद करने वाले लोगों के लिए सुरक्षित होता है. यहां आमतौर पर निशान (तस्वीर में) लगे होते हैं. यहां बिना कपड़ों के सनबाथ लेने वाले लोगों को कोई परेशानी नहीं होती.

अपने घर में तो हर कोई अपनी मर्जी से कुछ भी पहनने या ना पहनने के लिए स्वतंत्र है ही, जर्मन लोग अपने घर के पिछले हिस्से की खुली जगह में भी बिना कपड़ों के सनबाथ ले सकते हैं. इसका ध्यान रखना होता है कि इससे पड़ोसियों को परेशानी ना हो.

समुद्र से दूर स्थित इलाकों में न्यूड पार्कों का चलन है. म्यूनिख का इंग्लिश गार्डेन और बर्लिन का टियर गार्डेन ऐसे दो सबसे मशहूर जर्मन पार्क हैं जहां खास न्यूड एरिया बने हैं.