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बिनायक सेन की रिहाई को लेकर जन आन्दोलन

३१ दिसम्बर २०१०

प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ और पीपल यूनीअन फॉर सिविल लिबर्टीज़ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉक्टर बिनायक सेन की रिहाई को लेकर भारत भर में प्रदर्शन हो रहे हैं. इसी सिलसिले में जयपुर में भी बड़ा प्रदर्शन.

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तस्वीर: DW

जयपुर में कई मानवाधिकार संघटनों, सामाजिक संस्थाओं और बुद्धिजीविओं ने अल्बर्ट मयूज़ियम हाल के सामने प्रदर्शन किया. 24 दिसम्बर को डॉक्टर बिनायक को सुनाई गयी उम्रकैद की सजा के बाद से देश भर में होने वाले प्रदर्शनों की श्रृंखला में यह 50वां प्रदर्शन था.

Dr. Binayak Sen
तस्वीर: AP

गौर तलब है कि डॉक्टर बिनायक सेन को देशद्रोह के आरोप में छत्तीसगढ़ की रायपुर सैशन कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. डॉक्टर सेन पर माओंवादियों की मदद करने का आरोप है.

वे पहली बार 14 मई 2007 में गिरफ्तार हुए थे परन्तु सर्वोच्च न्यायालय से पिछले साल पच्चीस मई को उन्हें ज़मानत मिल गयी थी . पर अब उम्र कैद की सजा के बाद उन्हें दोबारा गिरफ्तार किया जा चुका है जिसका की देश भर में विरोध हो रहा है.

विरोध करने वालों में शामिल है डॉक्टर नरेन्द्र गुप्ता जो डॉक्टर बिनायक के साथ तीस बरस तक काम कर चुके हैं . डॉक्टर बिनायक को तत्काल रिहा करने की मांग करते हुए डॉक्टर गुप्ता कहते है यदि बीमार माओवादियों का इलाज करना देशद्रोह है तो हर चिकित्सक देशद्रोही है. विश्व भर के छब्बीस नोबेल पुरस्कार विजेता जिस समाज सेवक की रिहाई के लिए गुहार लगा चुके हो, वो गुनाहगार हो ही नहीं सकता. दुनिया भर में सेवा कार्य करने वाली "एमनेस्टी इंटरनॅशनल" तक ने उनकी सजा को "द्वैश्तापूर्ण" कारणों से दी गयी सजा बताया है. डॉक्टर गुप्ता बतातें है कि वे डॉक्टर बिनायक के साथ "मेडिको-फ्रेंड" संस्था में थे जिस में सभी को स्वस्थ्य सेवाएं सुलभ कराने की प्रतिज्ञा ली जाती है और इसी का "राजधर्म" डॉक्टर बिनायक ने निभाया है.

Jaipur Demonstration
तस्वीर: DW

प्रदर्शन करने वालों में राजस्थान के सेवानिवृत "जेल महानिदेशक" राधा कान्त सक्सेना भी शामिल थे जिन्होंने भारत में कैदियों की दशा सुधारने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया है. वे कहते है कि डॉक्टर बिनायक पर जेल में माओवादी नेता नारायण सान्याल तक "चिट्ठियाँ" पहुँचाने का भी आरोप है. परन्तु क्या इस के लिए जेल के अधिकारीयों को दण्डित नहीं किया जाना चाहियें. और तो और जेल के अधिकारी भी इस से इनकार करते है.

सक्सेना यह भी कहते है कि नेल्सन मंडेला को तो रंगभेद और सू की को तानाशाही के कारण जेल की सजा हुई थी परन्तु डॉक्टर बिनायक को तो दुनिया के सब से बड़े लोकतंत्र में दण्डित और प्रताड़ित किया जा रहा हैं. उधर, सर्वोच्च न्यायलय में प्रक्टिस करने वाले वकील प्रेम किशन कहते है कि यदि मैं हत्यारों के केस की पैरवी करता हूँ तो क्या मैं भी हत्यारा हो जाऊंगा?

वे भारतीय दंड सहिंता की धारा 124 ए की व्याख्या करते हुए कहते हैं कि डॉक्टर बिनायक सेन को इस धारा के तहत नहीं वरन नक्सलवादियो के खात्मे के लिए चलाए गए सरकारी अभियान सलवा जुडूम का विरोध करने के लिए दण्डित किया गया है..

शहीद भगत सिंह को याद करते हुए आन्दोलन में मौजूद मार्क्सवादी श्रीलता स्वामीनाथन कहती हैं कि देश को अंग्रेजो से तो आजादी मिल गयी परन्तु उन द्वारा बनाये गए कानून, आज भी भारतीय समाज की जड़े खोद रहे है जिस का ज्वलंत प्रमाण है डॉक्टर बिनायक को सजा दिलाने वाला राजद्रोह कानून. .

वे कहती है कि अगर सच बोलना राजद्रोह है तो फिर तो हम सब राजद्रोही हैं.

डॉक्टर बिनायक सेन का जन्म दिवस चार जनवरी को है जिस के चलते आन्दोलन स्थल पर एक बैनर पर उन्हें शुभ कामनाएं देते कई सन्देश लिखे गए. हर सन्देश के पीछे एक ही मंशा कि किस तरह 'गरीबों के इस डाक्टर को गरीबों की सेवा करने से मरहूम न किया जाये.'

रिपोर्ट: जसविंदर सहगल, जयपुर

संपादन: ओ सिंह

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