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मुंबई हमले के दोषियों को सजा दे पाकिस्तानः ओबामा

४ नवम्बर २०१०

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत दौरे से ठीक पहले कहा है कि पाकिस्तान को मुंबई हमलों के दोषियों को तुरंत सजा देनी चाहिए. ओबामा इन हमलों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए ही मुंबई के ताज होटल में ठहरेंगे.

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कदम उठाए पाकिस्तानतस्वीर: AP

आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान पर पर्याप्त दबाव न डाले जाने के लिए होने वाली आलोचना पर ओबामा ने कहा कि अमेरिका ने हमेशा पाकिस्तान से साफ तौर पर कहा है कि उसकी धरती पर पनपने वाली चरमपंथी हिंसा से निपटना खुद उसके भी हित में है. मुंबई हमलों के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि पाकिस्तान की जिम्मेदारी है कि वह आतंकवाद के लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के कठघरे में लाने के अपने वादों को पूरा करे.

ओबामा ने कहा, "26/11 हमलों के बाद से ही हम पाकिस्तान की सरकार से कहते रहे हैं कि यह उनकी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी है, कि इस हमले के दोषियों को कानून के सामने पेश करें और इस काम को बहुत की पारदर्शी, पूर्ण रूप से और तुरंत करने की जरूरत है. पाकिस्तान अहम कदम उठा रहा है और चरमपंथ के खिलाफ हमारे साझा युद्ध में कुरबानियां भी दे रहा है. हम भी आतंकवादियों की सुरक्षित पनाहगाहों को खत्म करने की अहमियत पर बराबर जोर देते रहेंगे."

NO FLASH Anschläge Mumbai Indien 2008
हमलों में निशाना बने होटल ताज में ठहरेंगे ओबामातस्वीर: AP

ओबामा अपने भारत दौरे की शुरुआत मुंबई से ही करेंगे और उसी होटल ताज में ठहरेंगे जो 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकवादी हमलों में निशाना बनाया गया था. ओबामा ने इन हमलों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए ही इस होटल को चु्ना है. वह कहते हैं, "मुझे खुशी है कि ताज होटल में रह कर मैं भारतीयों के प्रति सम्मान व्यक्त कर सकता हूं और आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई में एकजुटता का संदेश भी देना चाहता हूं."

ओबामा ने कहा, "दोनों देशों के बीच एक जैसी बहुत बातों में से एक यह भी है कि हम दोनों आतंकवाद के शिकार रहे हैं और हमने इसे मात भी दी है. न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन की तरह मुंबई भी आंतकवादी घटनाओं से बखूबी उबरी है और आजाद लोगों को आतंकवाद हरा नहीं सकता." उन्होंने कहा कि इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि जिस तरह वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले में भारतीय नागरिक मारे गए, उसी तरह मुंबई के आंतकवादी हमलों के दौरान भी छह अमेरिकी नागरिकों की जानें गईं. केन्या में 1998 में अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले में मारे गए एक अमेरिकी राजनयिक का जन्म भी भारत में हुआ था. अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, "इसलिए अमेरिकी और भारतीय समझते हैं कि आंतकवाद को कभी उचित नहीं ठहराया जा सकता और इसे हराना ही होगा."

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः एमजी

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