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आजादी कश्मीर का विकल्प हो: वार्ताकार

२७ अक्टूबर २०१०

भारत प्रशासित कश्मीर में बातचीत के लिए नियुक्त किए गए तीन वार्ताकारों ने सुझाव दिया है कि संविधान में संशोधन करके कश्मीर के लिए आजादी को भी एक ऐसा विकल्प बनाया जाए जिस पर विचार हो सके.

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क्या चाहते हैं कश्मीरी?तस्वीर: UNI

भारत के अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक तीन वार्ताकारों में से एक राधा कुमार ने पत्रकारों से कहा कि भारतीय संविधान में ऐसे संशोधन की गुंजाइश है. उन्होंने कहा, "भारतीय संविधान एक खूबसूरत दस्तावेज है. इसमें वक्त के साथ बदलाव की गुंजाइश है और हम ऐसे संशोधन की सिफारिश भी कर सकते हैं जिसके तहत कश्मीर मुद्दे पर विचार करते वक्त आजादी को भी एक विकल्प के तौर पर रखा जा सके."

हालांकि राधा कुमार ने कहा कि यह उनकी निजी राय है. उन्होंने कहा कि संविधान में 400 से ज्यादा बार संशोधन हो चुका है और अगर इसे और ज्यादा उदार बनाने के लिए संशोधन किया जाता है तो कोई नुकसान नहीं है. भारत और जम्मू कश्मीर दोनों के संविधान के मुताबिक कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है.

वार्ताकारों के दल के अध्यक्ष दिलीप पडगांवकर ने भी कश्मीर मुद्दे पर नया सुझाव दे डाला है. उन्होंने कहा है कि पाक अधिकृत कश्मीर के नेताओं को भी बातचीत की मेज पर लाया जाना चाहिए. दिलीप ने कहा, "हम पाक अधिकृत कश्मीर की यात्रा पर जाना चाहते हैं और वहां के नेताओं से बात करना चाहते हैं ताकि उनके नजरिए को भी जान सकें. हालांकि जम्मू और कश्मीर में कई ऐसे इलाके हैं जहां के लोग घाटी के लोगों की राय से सहमत नहीं हैं."

दिलीप पडगांवकर, एमएम अंसारी और राधा कुमार अब हर महीने कश्मीर की यात्रा करेंगे. इस बार की यात्रा के आखिर में वे केंद्र सरकार को कुछ सुझाव दे सकते हैं. माना जा रहा है कि ये सुझाव ऐसे होंगे जो घाटी के लोगों के भरोसे को बढा़ सकें.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ए कुमार

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