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चीन की मदद से पाक में नया रिएक्टर तैयार

१२ मई २०११

पाकिस्तान में चीन की मदद से 330 मेगावाट की क्षमता वाले नए परमाणु संयंत्र ने काम करना शुरू कर दिया. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चीन की ऐसी मदद पर एतराज है पर पाकिस्तान इसे दोस्ती की मिसाल कहता है.

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Pakistan's Prime Minister Pakistan's Prime Minister Yousuf Raza Gilani, left, consults with chief minister of Punjab province Shahbaz Sharif during a news conference regarding the power crisis the country is facing, Thursday, April 22, 2010, in Islamabad, Pakistan. Pakistan announced a raft of energy saving measures on Thursday aimed at easing the crisis that leaves much of the country powerless for up to 16 hours a day and stokes anger at the shaky, U.S.-allied government. (AP Photo/B.K.Bangash), left, consults with chief minister of Punjab province Shahbaz Sharif during a news conference regarding the power crisis the country is facing, Thursday, April 22, 2010, in Islamabad, Pakistan. Pakistan announced a raft of energy saving measures on Thursday aimed at easing the crisis that leaves much of the country powerless for up to 16 hours a day and stokes anger at the shaky, U.S.-allied government. (AP Photo/B.K.Bangash)
पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री के साथ गिलानीतस्वीर: AP

चश्मा परमाणु बिलजी प्लांट (चश्मा-2) पंजाब प्रांत के केंद्रीय जिले मियांवाली में स्थित है जो राजधानी इस्लामाबाद से 280 किलोमीटर दूर है. प्लांट के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने कहा कि यह परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में पाकिस्तान और चीन की दोस्ती की एक और मिसाल है.

पाकिस्तान इन दिनों गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है. गिलानी ने कहा कि नए प्लांट से बनने वाली बिजली से किल्लत झेल रहे आम लोगों को राहत मिलेगी और व्यापारिक उत्पादन क्षेत्र को भी इसका फायदा होगा.

पाकिस्तान का परमाणु बिलजी कार्यक्रम ज्यादा बड़ा नहीं है, लेकिन वह आने वाले सालों में 8,000 मेगावाट तक बिजली परमाणु तरीके से पैदा करना चाहता है. चश्मा-3 और चश्मा-4 पर पहले ही काम चल रहा है. चीन की मदद से बन रहे इन सभी रिएक्टरों में से हर किसी की क्षमता 300 मेगावाट है.

1947 में पाकिस्तान की स्थापना के बाद से ही चीन पाकिस्तान का भरोसेमंद सहयोगी रहा है. चश्मा-1 के निर्माण में भी उसी ने मदद की. भारत के साथ अमेरिकी असैनिक परमाणु करार के बाद पाकिस्तान ने भी इसी तरह के समझौते की मांग की, जिसे अमेरिका ने ठुकरा दिया.

चीन और पाकिस्तान का परमाणु सहयोग अमेरिका के लिए चिंता का विषय है. खास कर पाकिस्तानी परमाणु कार्यक्रम के जनक अब्दुल कदीर खान ने जब से 2004 में उत्तर कोरिया, ईरान और इराक को परमाणु तकनीक देने की बात मानी है, तब से अमेरिका की चिंता और बढ़ गई हैं.

हाल में पाकिस्तान के शहर एबटाबाद में अमेरिकी सैन्य मिशन में अल कायदा नेता ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद अमेरिका और पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ गया है. गुरुवार को चश्मा-2 के उद्घाटन के मौके पर गिलानी ने अमेरिका का नाम तो नहीं लिया, लेकिन इतना जरूर कहा कि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में उन्हें और अधिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः प्रिया एसेलबोर्न

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