अंतरिक्ष में नहाना धोना है मुश्किल

स्पेस स्टेशन में रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को कई कई दिन तक नहाना नसीब नहीं होता. कपड़े धोना और बदलना भी मुमकिन नहीं. यहां तक कि पीने का पानी भी पसीने और मूत्र को रिसाइकिल कर बनाया जाता है.

अंतरिक्ष यात्री पूरी तैयारी के साथ धरती के बाहर जाते हैं. कई महीनों का खाना, कसरत करने और सफाई का सामान भी उनके साथ जाता है. लेकिन गुरुत्व बल के ना होने से उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, खास कर साफ सफाई के मामले में. हाल ही में रूस के एक अंतरिक्ष यात्री की टॉयलेट की मरम्मत करने की तस्वीरों ने लोगों का ध्यान स्पेस स्टेशन में होने वाली दिक्कतों की ओर खींचा. अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन आईएसएस पर जो दिक्कत नजर आई, अंतरिक्ष यात्रियों के लिए वह कोई नई बात नहीं है.

1969 में अमेरिकी वैज्ञानिक रसल श्वाइकर्ट अपोलो 9 में सवार हो कर अंतरिक्ष की यात्रा पर निकले. उन्हें और उनके साथियों को पेशाब करने के लिए नलीनुमा डब्बों का इस्तेमाल करना पड़ा. टीम तीन अलग अलग आकार के डब्बे साथ ले कर गयी थी. अधिकतर वे सबसे बड़ा डब्बा ही उठा लेते, पर बाद में उन्हें अहसास होता कि छोटे डब्बे से भी काम चल सकता था. श्वाइकर्ट ने अंतरिक्ष मिशन से लौट कर इस बारे में कहा था, "यह गलती अब दोहराई नहीं जाएगी."

बेल्ट लगा कर टॉयलेट सीट पर

तब से तकनीक में कई बदलाव हुए हैं. अंतरिक्ष यात्रियों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए काफी कुछ बदला गया है. अब स्पेस स्टेशन के टॉयलेट भी लगभग आम टॉयलेट जैसे ही बनने लगे हैं लेकिन गुरुत्व बल ना होने के कारण सफाई रखना बेहद कठिन हो जाता है. स्पेस स्टेशन एमआईआर में रह चुके जर्मन अंतरिक्ष यात्री राइनहोल्ड एवाल्ड इस बारे में कहते हैं, "जो लोग सफाई को ले कर बहुत सचेत हैं, उनके लिए यह हरगिज नहीं है."

ताकि वे टॉयलेट सीट पर बैठ सकें, इसलिए अंतरिक्ष यात्रियों को बेल्ट लगा कर खुद को बांधना पड़ता है. सेक्शन पंप की मदद से वे टिक कर बैठ पाते हैं. स्पेस शिप से बाहर जाते समय डायपर लगाने पड़ते हैं क्योंकि जल्दी से वापस आने की कोई गारंटी नहीं होती.

पानी की कीमत

संसाधनों की असली कीमत का पता भी अंतरिक्ष में जा कर ही चलता है. पानी सीमित होता है, इसलिए बर्बादी से बचना जरूरी है. साथ ही मूत्र को रिसाइकिल कर पीने का पानी बनाया जाता है. जर्मन अंतरिक्ष एजेंसी डीएलआर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ रूपर्ट गेर्त्सर बताते हैं, "स्पेस स्टेशन में पसीने और नहाने के लिए इस्तेमाल हो चुके पानी को भी रिसाइकिल किया जाता है." गेर्त्सर बताते हैं कि नमी और तापमान के कारण सूक्ष्म जीवाणुओं को स्पेस स्टेशन में जल्दी फैलने का मौका मिलता है, जो अंतरिक्ष यात्रियों के लिए खतरनाक है. इससे बचने के लिए स्टेशन को लगातार साफ किया जाता है.

एमआईआर में रह चुके राइनहोल्ड एवाल्ड बताते हैं कि चोट लगने पर उसे ठीक होने में भी सामान्य से ज्यादा वक्त लगता है, "मुझे याद है मेरे माथे पर एक दाना हो गया था जो जाने का नाम ही नहीं ले रहा था."

पानी बर्बाद ना हो इसलिए कपड़े नहीं धोए जाते. कई दिन तक पहन कर आखिरकार गंदे कपड़ों को फेंक दिया जाता है. और रोज रोज नहाना भी नसीब नहीं होता. अधिकतर तो उन्हें पानी की कुछ बूंदों से खुद को पोंछ लेने का ही मौका मिल पाता है. एवाल्ड बताते हैं कि स्पेस स्टेशन से लौट कर उन्होंने काफी देर तक गर्म पानी में स्नान किया, "मेरे पेट में गुदगुदी हो रही थी, अद्भुत अहसास था वह."

अंतरिक्ष से वापसी

धरती पर पहुंचे

जर्मनी के अलेक्जांडर गैर्स्ट, रूस के माक्सिम सुरायेव और रीड वाइसमान अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन से धरती पर लौट आए हैं. इस दौरान आईएसएस पर कई तरह के प्रयोग किए गए.

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ऊपर से दुनिया की पढ़ाई

ज्वालामुखी विशेषज्ञ और भूगर्भ भौतिकशास्त्री के तौर पर गैर्स्ट धरती को अंदर से तो बहुत अच्छी तरह जानते हैं. 28 मई से वह इसे ऊपर से भी देख रहे हैं. 400 किलोमीटर की ऊंचाई से वह नियमित रूप से फोटो लेते हैं, जैसे यहां उत्तरी अटलांटिक महासागर के ऊपर फैले बादल.

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कसरत भी चाहिए

अंतरिक्ष यान के सभी लोगों के लिए कसरत अनिवार्य है, क्योंकि पैरों और जांघों की मांसपेशियों में भारहीनता का असर अच्छा नहीं होता. हालांकि इस कसरत के जरिए गैर्स्ट के शरीर पर कई सेहत से जुड़े प्रयोग भी किए जा रहे हैं.

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छह महीने में 106 प्रयोग

अंतरिक्ष में जीने के कई रहस्य अभी भी बरकरार हैं. गैर्स्ट की कोशिश है उन पर से पर्दा उठाना. इसलिए उन्हें छह महीने के दौरान 106 प्रयोग करने की जिम्मेदारी दी गई है. इनमें से 25 जर्मन उद्योग के साथ मिल कर किए जाएंगे. इसमें कोलोन का खेल महाविद्यालय और बर्लिन का चेरिटे शामिल हैं.

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कैसे कैसे शोध

अंतरिक्ष की यात्रा के दौरान अलेक्सांडर के खून के नमूने नियमित रूप से इकट्ठे किए जाते हैं. ये नमूने एक अंतरिक्ष यान से धरती पर भेजे जाते हैं और इनका परीक्षण किया जाता है.

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अंतरिक्ष में वर्ल्ड चैंपियन

आईएसएस पर इतने व्यस्त टाइम टेबल के बावजूद अलेक्सांडर गैर्स्ट ने फुटबॉल वर्ल्ड चैंपियनशिप का फाइनल मिस नहीं किया. बाकायदा जर्मन टीशर्ट के साथ उन्होंने अंतरिक्ष में जीत की खुशी मनाई और तुरंत तस्वीर ऑनलाइन शेयर कर दी.

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अभियान

इस तरह की तस्वीरों के जरिए गैर्स्ट बताना चाहते हैं कि उन्हें आईएसएस से क्या क्या दिखाई देता है. वह धरती की खूबसूरती और उस पर जारी समस्याओं के बारे में लोगों को जागरूक और संवेदनशील बनाना चाहते हैं.

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अंतरिक्ष से लाइव

अपना संदेश पहुंचाने के लिए गैर्स्ट हर दिन थोड़ा समय निकाल कर वीडियो के जरिए धरती के लोगों से रूबरू होते हैं. पिछले महीने उन्होंने सैटेलाइट के जरिए सीधे दो स्कूलों के बच्चों से बात की. इसके अलावा वह नियमित तौर पर आईएसएस पर जीवन के बारे में वीडियो शेयर करते हैं.

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सबका अपना काम

वैज्ञानिक प्रयोगों के अलावा आईएसएस की मरम्मत का काम भी यात्रियों के ही हाथ में होता है. सबका काम निर्धारित है. गैर्स्ट जल शुद्धिकरण प्रणाली और कसरत उपकरणों के लिए जिम्मेदार हैं. हर शनिवार को आईएसएस की सफाई की जाती है.

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सुंदर धरती

अंतरिक्ष से हमारी पृथ्वी कितनी सुंदर दिखाई देती है ये अक्सर गैर्स्ट ट्विटर पर शेयर करते हैं. तस्वीर में देखा जा सकता है आसमान से सहारा का रेगिस्तान.

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