अगर मैं लड़का होती!

भारतीय समाज में ही नहीं पूरी दुनिया में लड़की और लड़के के बीच किसी ना किसी तरह का भेदभाव बरता जाता है. #IfIWereAGuy एक ऐसा सवाल है जिसका हर जवाब लड़कियों की समाज में बराबरी पाने की इच्छा को जाहिर करता है.

अगर भारत की लड़कियों से यह पूछा जाए कि वह लड़का होतीं तो क्या क्या करना चाहतीं, क्या आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कैसे कैसे उत्तर मिलते. अंदाजा लगाने की अब कोई जरूरत नहीं क्योंकि ट्विटर पर यह सवाल पूछा जा चुका है जिसका लड़कियों ने खूब जोरशोर से जवाब भी दिया है. देखिए कैसी कैसी आकांक्षाएं दबी होती हैं लड़कियों के मन में.

भारत की राजधानी दिल्ली और पूरे देश में ही महिलाओं के लिए बेहद असुरक्षित माहौल में सुरक्षित महसूस कर पाने की इच्छा कई लड़कियों ने जताई.

दिसंबर 2012 के निर्भया कांड में पीड़िता पर रात को घर लौटने के दौरान ही हमला हुआ था. महिलाओं को शिकायत है कि अपनी सुरक्षा के लिए उन्हें शाम के बाद अपनी गतिविधियों को चारदीवारी के भीतर समेटने के मजबूर होना पड़ता है. अगर वे लड़का होतीं तो ऐसी मजबूरी ना होती.

इसके अलावा सवाल दफ्तरों में असुरक्षित होने का भी है. कई महिलाओं ने कॉरपोरेट कल्चर में फैले महिला कर्मचारियों के उत्पीड़न के तरीकों के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है.

वहीं कुछ ऐसी बातें भी हैं जिनका नाता सामाजिक परिवेश से है. जैसी कि महिलाओं और श्रृंगार का संबंध. कुछ लड़कियों का मानना है कि यदि वे लड़का होतीं हो उन्हें अपने रूप रंग पर कम ध्यान देना पड़ता और माहवारी जैसी तकलीफ से भी नहीं गुजरना पड़ता.

कुछ लड़कियों की आकांक्षाएं थोड़ी शरारती भी हैं.

भारत में महिलाओं के कानूनी अधिकार

पिता की संपत्ति का अधिकार

भारत का कानून किसी महिला को अपने पिता की पुश्तैनी संपति में पूरा अधिकार देता है. अगर पिता ने खुद जमा की संपति की कोई वसीयत नहीं की है, तब उनकी मृत्यु के बाद संपत्ति में लड़की को भी उसके भाईयों और मां जितना ही हिस्सा मिलेगा. यहां तक कि शादी के बाद भी यह अधिकार बरकरार रहेगा.

भारत में महिलाओं के कानूनी अधिकार

पति की संपत्ति से जुड़े हक

शादी के बाद पति की संपत्ति में तो महिला का मालिकाना हक नहीं होता लेकिन वैवाहिक विवादों की स्थिति में पति की हैसियत के हिसाब से महिला को गुजारा भत्ता मिलना चाहिए. पति की मौत के बाद या तो उसकी वसीयत के मुताबिक या फिर वसीयत ना होने की स्थिति में भी पत्नी को संपत्ति में हिस्सा मिलता है. शर्त यह है कि पति केवल अपनी खुद की अर्जित की हुई संपत्ति की ही वसीयत कर सकता है, पुश्तैनी जायदाद की नहीं.

भारत में महिलाओं के कानूनी अधिकार

पति-पत्नी में ना बने तो

अगर पति-पत्नी साथ ना रहना चाहें तो पत्नी सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अपने और बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांग सकती है. घरेलू हिंसा कानून के तहत भी गुजारा भत्ता की मांग की जा सकती है. अगर नौबत तलाक तक पहुंच जाए तब हिंदू मैरिज ऐक्ट की धारा 24 के तहत मुआवजा राशि तय होती है, जो कि पति के वेतन और उसकी अर्जित संपत्ति के आधार पर तय की जाती है.

भारत में महिलाओं के कानूनी अधिकार

अपनी संपत्ति से जुड़े निर्णय

कोई भी महिला अपने हिस्से में आई पैतृक संपत्ति और खुद अर्जित की गई संपत्ति का जो चाहे कर सकती है. अगर महिला उसे बेचना चाहे या उसे किसी और के नाम करना चाहे तो इसमें कोई और दखल नहीं दे सकता. महिला चाहे तो उस संपत्ति से अपने बच्चो को बेदखल भी कर सकती है.

भारत में महिलाओं के कानूनी अधिकार

घरेलू हिंसा से सुरक्षा

महिलाओं को अपने पिता या फिर पति के घर सुरक्षित रखने के लिए घरेलू हिंसा कानून है. आम तौर पर केवल पति के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इस कानून के दायरे में महिला का कोई भी घरेलू संबंधी आ सकता है. घरेलू हिंसा का मतलब है महिला के साथ किसी भी तरह की हिंसा या प्रताड़ना.

भारत में महिलाओं के कानूनी अधिकार

क्या है घरेलू हिंसा

केवल मारपीट ही नहीं फिर मानसिक या आर्थिक प्रताड़ना भी घरेलू हिंसा के बराबर है. ताने मारना, गाली-गलौज करना या फिर किसी और तरह से महिला को भावनात्मक ठेस पहुंचाना अपराध है. किसी महिला को घर से निकाला जाना, उसका वेतन छीन लेना या फिर नौकरी से संबंधित दस्तावेज अपने कब्जे में ले लेना भी प्रताड़ना है, जिसके खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला बनता है. लिव इन संबंधों में भी यह लागू होता है.

भारत में महिलाओं के कानूनी अधिकार

पुलिस से जुड़े अधिकार

एक महिला की तलाशी केवल महिला पुलिसकर्मी ही ले सकती है. महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले पुलिस हिरासत में नहीं ले सकती. बिना वारंट के गिरफ्तार की जा रही महिला को तुरंत गिरफ्तारी का कारण बताना जरूरी होता है और उसे जमानत संबंधी उसके अधिकारों के बारे में भी जानकारी दी जानी चाहिए. साथ ही गिरफ्तार महिला के निकट संबंधी को तुरंत सूचित करना पुलिस की ही जिम्मेदारी है.

भारत में महिलाओं के कानूनी अधिकार

मुफ्त कानूनी मदद लेने का हक

अगर कोई महिला किसी केस में आरोपी है तो महिलाओं के लिए कानूनी मदद निःशुल्क है. वह अदालत से सरकारी खर्चे पर वकील करने का अनुरोध कर सकती है. यह केवल गरीब ही नहीं बल्कि किसी भी आर्थिक स्थिति की महिला के लिए है. पुलिस महिला की गिरफ्तारी के बाद कानूनी सहायता समिति से संपर्क करती है, जो कि महिला को मुफ्त कानूनी सलाह देने की व्यवस्था करती है.

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