आईएस के खतरे को लेकर बंटी रक्षा जानकारों की राय

भारत और बांग्लादेश के रक्षा जानकार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) को बड़ा खतरा नहीं मानते हैं. अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा के कड़े इंतजाम है. वहीं कुछ जानकार कहते हैं कि आईएस की धमकियों को नकारा नहीं जा सकता.

हाल ही में  इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) से संबंध रखने वाले समूह अल-मुर्सलात ने एक पोस्टर रिलीज किया. दुनिया भर में आतंकवाद पर नजर रखने वाली संस्था साइट इंटेलिजेंस के मुताबिक पोस्टर में पांच चरमपंथियों की तस्वीर थी जिन्होंने साल 2016 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका के एक कैफे में आतंकी हमला किया था.

राइफल थामे चरमपंथियों की हंसती हुई तस्वीरों के नीचे लिखा था, "यदि आपको लगता है कि बंगाल और हिंद में आपने खलीफा के सैनिकों को चुप करवा दिया है और आप इसे लेकर निश्चिंत है तो सुनिए हम कभी चुप होने वाले नहीं हैं. और बदला लेने की प्यास कभी बुझती नहीं है.'

पोस्टर में बातें अंग्रेजी, हिंदी, बांग्ला भाषा में लिखी गई हैं और इन्हें टेलीग्राम से भेजा गया. भारत की विदेशी खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व प्रमुख एम के नारायणनन ने कहा, "मैं इसे यह जानने के लिए नहीं देखूंगा कि वह क्या करने वाले हैं." लेकिन इसके साथ ही नारायणनन यह भी कहते हैं कि "आईएस का खत्म होने का दावा" करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भी इस मुद्दे पर भटके हुए हैं.

आईएस प्रमुख अबु बकर अल-बगदादी

बांग्लादेश पुलिस सोमवार को ढाका के शॉपिंग सेंटर के बाहर हुए एक छोटे बम धमाके की जांच कर रही है. बम धमाके की जिम्मेदारी आईएस ने ली थी, जिसमें तीन पुलिस वाले भी जख्मी हो गए थे. बांग्लादेश की रैपिड एक्शन बटालियन के प्रवक्ता मुफ्ती मोहम्मद खान ने कहा कि वह आईएस की धमकी पर बहुत गंभीर नहीं मान रहे हैं." रैपिड एक्शन बटालियन बांग्लादेश में चरमपंथी गुटों से निपटने के लिए बनाई गई एक खास एजेंसी है. साल 2016 में ढाका के एक कैफे में हुए हमले की जिम्मेदारी आईएस ने ली थी, बावजूद इसके बांग्लादेश प्रशासन देश में आईएस की मौजदूगी को नकारता आया है. आईएस के बजाए सुरक्षा एजेंसियों ने एक स्थानीय चरमपंथी गुट जमातेउल मुजाहिद्दीन बांग्लादेश (जेएमबी) को हमले के लिए जिम्मेदार बताया था. उस हमले में 17 विदेशी नागरिकों समेत 22 लोग मारे गए थे.

खान कहते हैं, "हो सकता है कि कोई छोटा गुट या समूह मुश्किल खड़ी करने की कोशिश करे जैसे कि दुनिया भर में हो रहा है." हालांकि खान नहीं मानते कि कोई बड़ा समूह किसी भी तरह का बड़ी मुसीबत या मुश्किल पैदा करने में सक्षम है.

भारत में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अधिकारी आलोक मित्तल ने कहा कि उन्होंने अल-मुर्सलात का मीडिया पोस्टर देखा है. मित्तल ने इस मामले में किसी भी तरह की टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया. भारतीय खुफिया एजेंसी के एक पूर्व अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा, "इस्लामिक स्टेट भारत में बहुत ज्यादा पैर जमाने वाला नहीं है. लेकिन वह अब भी हार से कोसों दूर है."

भारतीय सेना से रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा के मुताबिक हमले की धमकियों को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता. उन्होंने कहा, "श्रीलंका में हुए हमलों को देखकर साफ समझ आता है कि ऐसे हमलों को अंजाम देने के लिए आपको मुट्ठी भर लोगों की जरूरत है."

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एए/ओएसजे (एपी)

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