आईएस पर मानव अंगों के कारोबार का शक

दुनिया सीरिया और इराक में इस्लामिक स्टेट से निबटने के रास्ते खोज रही है तो सीरिया में जब्त दस्तावेजों से पता चला है कि संगठन ने अपने लोगों की जान बचाने के लिए "धर्मद्रोही" के अंगों को निकालने की अनुमति दे रखी है.

आतंकी समूह आईएस के इस्लामिक स्कॉलरों के हवाले से 31 जनवरी 2015 को जारी दस्तावेजों से पता चलता है कि वे इंसानी अंगों की तस्करी के काम में लगे हैं. बंधक बनाए गए जिंदा लोगों के अंग निकाल एक मुसलमान की जान बचाने की भी आज्ञा है, भले ही यह उस बंधक के लिए जानलेवा हो.

आईएस से जुड़े पांच तथ्य

आईएस में भर्ती

सीरिया और इराक के कुछ हिस्सों पर कब्जा करने वाले इस आतंकी गुट ने 29 जून 2014 को खिलाफत का एलान किया. तब से अब तक संगठन ने अपनी संख्या बढ़ाने में बड़ी कामयाबी पाई है. रिपोर्टों के मुताबिक 2011 से अब तक आईएस में 90 देशों से 20,000 से ज्यादा लोग भर्ती हुए हैं.

आईएस से जुड़े पांच तथ्य

इतिहास को नुकसान

सीरिया में कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जगहों को आईएस ने भारी नुकसान पहुंचाया है. ऐतिहासिक इमारतों और संग्रहालयों में लूटपाट की घटनाएं सामने आई हैं. आईएस ने इनसे मिली रकम का इस्तेमाल खुद को मजबूत करने में किया है.

आईएस से जुड़े पांच तथ्य

कत्लेआम

आईएस की क्रूरता किसी से छुपी नहीं है. आईएस की ओर से अक्सर जारी किए जाने वाले वीडियो उसके जुल्म की गवाही देते हैं. लोगों का सिर कलम कर देना, गर्दन रेत देना या जिंदा जला देना इनके आम कुकृत्य हैं.

आईएस से जुड़े पांच तथ्य

तकनीक के जानकार

यह आतंकवादी संगठन आधुनिक दौर में तकनीक की अहमियत समझता है. अपने प्रचार के लिए ये आतंकी गुट सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल करता है. अपने वीडियो बनाने में ये संगीत, एक्शन सीन इत्यादि का इस्तेमाल कर रिलीज करते हैं, जिससे और लोगों को अपने साथ जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकें.

आईएस से जुड़े पांच तथ्य

खर्च

आईएस के पास इतना पैसा है कि वह अपनी आतंकवादी गतिविधियों को आराम से अंजाम दे रहा है. उसने डोनेशन पाने का अपने लिए एक मजबूत तंत्र भी विकसित कर लिया है. आतंकी संगठन धन जुटाने के लिए बंधक बनाता है और ब्लैकमेल भी करता है. कई छोटी बड़ी कंपनियां भी इसका निशाना बनी हैं.

इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि समाचार एजेंसी रॉयटर्स स्वतंत्र रूप से नहीं करा पाया है. अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि यह दस्तावेज मई में पूर्वी सीरिया में विशेष अमेरिकी दस्तों के छापे के दौरान जब्त किए गए डाटा भंडार और जानकारी का हिस्सा हैं. आईएस के रिसर्च एंड फतवा कमेटी के धार्मिक आदेश जैसे लगते एक ऐसे ही दस्तावेज में लिखा है, "किसी धर्मद्रोही के जीवन या अंगों का सम्मान नहीं किया जाना चाहिए और माफी मांग कर उन्हें लिया जा सकता है." उपलब्ध अमेरिकी सरकारी अनुवाद के अनुसार फतवा नंबर 68 में लिखा है, "बंधक के ऐसे अंगों को निकाले जाने पर भी प्रतिबंध नहीं है जिससे उसकी जान चली जाए."

इन दस्तावेजों में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जिससे साबित हो कि आईएस वाकई अंगों को निकालने या उनकी तस्करी में लिप्त है. मगर इससे यह जरूर स्थापित होता है कि आईएस के इस्लामी प्रारूप में ऐसा करने की धार्मिक अधिकृति है. पूर्व में इराक ने भी इस्लामिक स्टेट पर धन कमाने के लिए अंगों का कारोबार करने का आरोप लगाया था. इस दस्तावेज में "धर्मद्रोही" को परिभाषित नहीं किया गया है. आईएस कई गैर मुसलमानों, ईसाइयों, शिया मुसलमानों और ऐसे सुन्नी मुसलमानों को भी बंधक बना या मार चुका है जो उनके उग्रपंथी विचारों को नहीं मानते.

आईसिस, आईसिल, आईएस या दाएश?

आईएसआई

आज जिसे इस्लामिक स्टेट के नाम से जाना जाता है, दरअसल उसकी शुरुआत अल कायदा से हुई. 2006 में इराक में मौजूद अल कायदा ने खुद को इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक का नाम दिया. तब यह आईएसआई कहलाया.

आईसिस, आईसिल, आईएस या दाएश?

आईसिस

फिर 2013 में संगठन अल कायदा से अलग हो गया और इसके लीडर अबु बक्र अल बगदादी ने नाम के आगे "अल-शाम" भी जोड़ दिया. तब यह इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड अल-शाम कहलाया. अंग्रेजी में इसे इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया यानि आईसिस कहा जाने लगा.

आईसिस, आईसिल, आईएस या दाएश?

क्या है अल-शाम?

अरबी भाषा में सीरिया को शाम कहा जाता है. हालांकि "अल शाम" एक बेहद पुराना शब्द है जो सीरिया, लेबनान, इस्राएल, फलीस्तीन और जॉर्डन को एक साथ संबोधित करता है.

आईसिस, आईसिल, आईएस या दाएश?

आईसिल

भूमध्यसागर के करीब जिस इलाके को अरबी में अल-शाम कहा जाता है, लगभग उसी को अंग्रेजी में लैवेंट पुकारा जाता है. यहीं से एक नया अनुवाद हुआ और संगठन को अब इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लैवेंट यानि आईसिल कहा जाने लगा.

आईसिस, आईसिल, आईएस या दाएश?

आईएस

जून 2014 में इस आतंकी संगठन ने घोषणा की कि वह अपने नाम के आगे से इराक और सीरिया हटा रहा है. तब से वह आईएस के नाम से जाना जाने लगा है. अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र अब भी आइसिल का प्रयोग करते हैं और फ्रांस दाएश का.

आईसिस, आईसिल, आईएस या दाएश?

दाएश

दौलत अल इस्लामिया फ-अल इराक वा अल-शाम. अरबी मीडिया आईएस को इस नाम से पुकारता है. इसे छोटा करके बनता है दाईश. फ्रांस समेत कई पश्चिमी देशों ने इसे एक शब्द बना कर दाएश के रूप में इस्तेमाल करने का फैसला किया है. हालांकि अरबी में दाएश जैसा कोई शब्द नहीं है.

आईसिस, आईसिल, आईएस या दाएश?

खिलाफत

संगठन का दावा है कि वह एक इस्लामिक खिलाफत स्थापित कर चुका है. संगठन ने अपने नाम के आगे से इराक और सीरिया हटाने का भी यही कारण बताया. इस तर्क से दुनिया की सभी इस्लामी सरकारें नाजायज हैं और केवल आईएस ही सही है.

आईसिस, आईसिल, आईएस या दाएश?

अल बगदादी

केवल दुनिया की सरकारें ही इस आतंकी संगठन को "इस्लामिक" मानने से इंकार नहीं करतीं, खुद आतंकवादी भी करते हैं. अल कायदा ने इसे अल बगदादी का नाम दिया है और इस्लाम के नाम पर इस संगठन द्वारा की जा रही हरकतों की निंदा भी कर चुका है.

संयुक्त राष्ट्र में इराकी दूत मोहम्मद अली अलहकीम ने कहा है कि इन दस्तावेजों का निरीक्षण अंग तस्करी के मामले के साक्ष्य के तौर पर यूएन सुरक्षा परिषद द्वारा कराना चाहिए. यूएन की ओर से अभी ऐसी किसी जांच को शुरु कराने की सूचना नहीं मिली है.

मई में सीरिया में अमेरिकी सेना के छापे में आईएस के एक वित्त प्रमुख अबु सय्याफ की मौत हुई थी और उसकी पत्नी को पकड़ लिया गया था. इसी दौरान कंप्यूटर की हार्डड्राइव, थंबड्राइव और तमाम सीडी, डीवीडी और कागजी दस्तावेज बराबद हुए थे. पुरातात्विक महत्व की चीजों की तस्करी से जुड़ी जानकारी के अलावा अब तक अमेरिका ने बाकी असली दस्तावेज जारी नहीं किए हैं.

सीरिया में शक्ति प्रदर्शन

रूस का एसयू-24 विमान नीचे से उड़ते हुए बमबारी कर सकता है. तुर्की की सेना ने ऐसे ही रूसी बमवर्षक को सीमा के उल्लंघन का आरोप लगाकर गिरा दिया. विमान तुर्क सीमा से चार किलोमीटर दूर सीरिया के अंदर गिरा.

सीरिया में शक्ति प्रदर्शन

तुर्की ने 24 नवंबर को रूस का एक बमवर्षक मार गिराया. तुर्की का आरोप है कि उसने रूसी लड़ाकू विमान को दस बार चेतावनी दी जिसे पाइलट ने नजरअंदाज कर दिया. उसके बाद तुर्की ने हमले की प्रक्रिया को सक्रिय किया.

सीरिया में शक्ति प्रदर्शन

विदेशी विमान के तुर्की की सीमा के 20 किलोमीटर के अंदर आने पर उन्हें चेतावनी दी जाती है. आठ किलोमीटर करीब आने पर एफ-16 को तैयार कर दिया जाता है. सीमा के हनन पर विदेशी विमान को गिरा दिया जाता है.

सीरिया में शक्ति प्रदर्शन

रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने तुर्की की कड़ी आलोचना की है और उसे आतंकवाद का समर्थक बताया है. पुतिन ने विदेश मंत्रालय द्वारा नागरिकों को तुर्की की यात्रा पर न जाने की सलाह का समर्थन किया है. उन्होंने इसे आवश्यक कदम बताया.

सीरिया में शक्ति प्रदर्शन

रूस और तुर्की के रिश्तों में खटास का आर्थिक असर भी होगा. हर साल करीब 33 लाख रूसी तुर्की जाते हैं. विदेश मंत्री लावरोव की चेतावनी के बाद विमान कंपनी एयरोफ्लोत का शेयर भाव भी गिरा है जो रूसी पर्यटकों को तुर्की ले जाता है. अंताल्या में क्रेमलिन पैलेस होटल.

सीरिया में शक्ति प्रदर्शन

रूसी बमवर्षक तुर्की-सीरिया सीमा पर सीरिया के उस इलाके में गिरा जहां तुर्क मूल के तुर्कमान जाति के लोग रहते हैं. वे सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार का विरोध कर रहे हैं. तुर्की उन्हें समर्थन देता है. रूस का कहना है कि वह आईएस के ठिकानों पर बमबारी कर रहा है.

सीरिया में शक्ति प्रदर्शन

मार गिराए गए विमान में दो पाइलट थे. वे हमले के बाद इजेक्ट हो गए. उनमें से एक की मौत हो गई जबकि दूसरे पाइलट को रूसी और सीरियाई स्पेशल फोर्स ने रात की कार्रवाई के बाद बचा लिया. वह लताकिया में रूसी हवाई चौकी पर सुरक्षित पहुंच गया है.

सीरिया में शक्ति प्रदर्शन

रूसी विमान को गिराए जाने के बाद तुर्की के राष्ट्रपति एरदोवान और प्रधानमंत्री दावोतोग्लू अपनी हवाई सीमा की रक्षा के तुर्की के अधिकार पर जोर दे रहे हैं. उन्हें अमेरिका सहित नाटो के दूसरे सदस्यों का समर्थन भी मिला है.

सीरिया में शक्ति प्रदर्शन

पेरिस पर आतंकी हमले के बाद रूस और पश्चिमी देशों के बीच आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहमति के संकेत दिख रहे थे. पुतिन और एरदोवान अंताल्या में मिले थे. लेकिन तुर्की द्वारा रूसी बमवर्षक को गिराए जाने के बाद इस बात की उम्मीद कम हुई है कि सीरिया में सहमति संभव होगी.

सीरिया में शक्ति प्रदर्शन

जर्मन विदेश मंत्री फ्रांक वाल्टर श्टाइनमायर ने मॉस्को और अंकारा से समझदारी की अपील की है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस घटना का असर सीरिया समस्या के समाधान के लिए हाल ही में शुरू हुई बातचीत पर नहीं पड़ेगा.

अंगों की चोरी के अलावा आईएस के लोगों के गुलाम महिलाओं से बलात्कार के विस्तृत नियम भी इन दस्तावेजों में वर्णित हैं. अमेरिका का मानना है कि इस्लामिक स्टेट की यह रिसर्च एंड फतवा कमेटी सीधे समूह के नेता अबु बकर अल-बगदादी को रिपोर्ट करती है.

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