इंसान जैसा रोबोट तैयार

सिंगापुर की वैज्ञानिक नाडिया थाल्मन ने ऐसा रोबोट तैयार कर लिया है जो हूबहू इंसानों से मेल खाता है. नदीन नाम का ये रोबोट बातचीत भी करता है, खेलता है और कहानी भी सुनाता है.

हूबहू इंसान की तरह भूरे बाल, कोमल त्वचा और आकर्षक चेहरा. ये नदीन नाम का एक नया मानव रोबोट है. ​वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस ह्यूमेनॉयड रोबोट का इस्तेमाल आने वाले समय में निजी सहायक के बतौर या बुजुर्गों की देखभाल करने के लिए किया जा सकेगा.

1.7 मीटर लंबी नदीन, इसे ​बनाने वाली वैज्ञानिक नाडिया थाल्मन जैसी ही दिखती है. थाल्मन सिंगापुर के नांगयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के इंस्टिट्यूट ऑफ इनोवेशन की ​विजिटिंग प्रोफेसर और निदेशक हैं. यहां वे पिछले तीन दशकों से आभासी मानवों यानि वर्चुअल ह्यूमंस पर काम कर रही हैं.

नदीन का सॉफ्टवेयर उसे कई तरह के मनोभावों को जाहिर करने पिछली बातचीत को याद करने में मदद करता है. साथ ही वह बातचीत का जवाब भी दे सकती है. नदीन अभी बाजार में उपलब्ध नहीं है लेकिन थाल्मन का मानना है कि ये रोबोट एक दिन विक्षिप्त लोगों के सहायक की तरह भी काम कर सकेंगे.

थाल्मन कहती हैं, ''अगर आप इस तरह के लोगों को अकेला छोड़ देंगे तो वे बहुत जल्दी मायूस हो जाएंगे, इनसे हमेशा बातचीत करते रहनी होती है.'' वे कहती हैं कि नदीन बातचीत कर सकती है, कहानी सुना सकती है और खेल भी सकती है.

थाल्मन और उनकी टीम और भी नए किस्म के रोबोट बनाने पर काम कर रही हैं जो बच्चों के साथ भी खेल सकेंगे. यह प्रोजेक्ट अभी शुरुआती दौर में है और उसका कोई प्रोटोटाइप उपलब्ध नहीं है. लेकिन योजना है कि वह सवालों का जवाब दे सके, मावनाएं दिका सके और लोगों को पहचान सके. साथी होने के अलावा ये बाल रोबोट अकेले बच्चों पर नजर रखेंगे और गड़बड़ होने पर उनके माता पिता या आया को खबर कर सकेंगे.

थाल्मन का कहना है कि ये परियोजना अभी अपने शुरूआती दौर में है. इसमें कोशिश की जा रही है कि ये चाइल्ड रोबोट अलग अलग भाषाओं में बोल सकें ताकि इसे बच्चों को कई भाषाएं सीखने में मदद मिल सके. "बच्चों के पास खिलौने होते हैं लेकिन वे सक्रिय नहीं होते. बाल रोबोट सक्रिय खिलौने होंगे और बच्चों के साथ संवाद करेंगे." रोबोट का एजुकेशनल टूल की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा.

आरजे/एमजे (रॉयटर्स)

फ्यूचर ह्यूमन - मशीन और इंसान का मेल

पूरी तरह रोबोटिक

आइला नाम की यह मादा रोबोट दिखाती है कि एक्सो-स्केलेटन यानि बाहरी कंकाल को कैसे काम करना चाहिए. जब किसी व्यक्ति ने इसे पहना होता है तो आइला उसे दूर से ही नियंत्रित कर सकती है. आइला को केवल उद्योग-धंधों में ही नहीं अंतरिक्ष में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

फ्यूचर ह्यूमन - मशीन और इंसान का मेल

हाथों से शुरु

जर्मनी में एक्सो-स्केलेटन पर काम करने वाला डीएफकेआई नाम का आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस रिसर्च सेंटर 2007 में शुरू हुआ. शुरुआत में यहां वैज्ञानिक रोबोटिक हाथ और उसका रिमोट कंट्रोल सिस्टम बनाने की ओर काम कर रहे थे. तस्वीर में है उसका पहला आधुनिक प्रोटोटाइप.

फ्यूचर ह्यूमन - मशीन और इंसान का मेल

बेहद सटीक

डीएफकेआई ने 2011 से दो हाथों वाले एक्सो-स्केलेटन पर काम शुरू किया. दो साल तक चले इस प्रोजेक्ट में रिसर्चरों ने इंसानी शरीर के ऊपरी हिस्से की कई बारीक हरकतों की अच्छी नकल कर पाने में कामयाबी पाई और इसे एक्सो-स्केलेटन में भी डाल सके.

फ्यूचर ह्यूमन - मशीन और इंसान का मेल

रूस का रिमोट कंट्रोल

केवल जर्मन ही नहीं, रूसी रिसर्चर भी रिमोट कंट्रोल सिस्टम वाले एक्सो-स्केलेटन बना चुके हैं. डीएफकेआई ब्रेमन के रिसर्चरों को 2013 में रूसी रोबोट को देखने का अवसर मिला. इसके अलावा रूसी साइंटिस्ट भी आइला रोबोट पर अपना हाथ आजमा चुके हैं.

फ्यूचर ह्यूमन - मशीन और इंसान का मेल

बिल्कुल असली से हाथ

दुनिया की दूसरी जगहों पर विकसित किए गए सिस्टम्स के मुकाबले डीएफकेआई के कृत्रिम एक्सो-स्केलेटन के सेंसर ना केवल हथेली पर लगे हैं बल्कि बाजू के ऊपरी और निचले हिस्सों पर भी. नतीजतन रोबोटिक हाथ का संचालन बेहद सटीक और असली सा लगता है. इसमें काफी जटिल इलेक्ट्रॉनिक्स इस्तेमाल होता है.

फ्यूचर ह्यूमन - मशीन और इंसान का मेल

भार ढोएंगे रोबोटिक पैर

डीएफकेआई 2017 से रोबोटिक हाथों के साथ साथ पैरों का एक्सो-स्केलेटन भी पेश करेगा. यह इंसान की लगभग सभी शारीरिक हरकतों की नकल कर सकेगा. अब तक एक्सो-स्केलेटन को पीठ पर लादना पड़ता था, लेकिन भविष्य में रोबोट के पैर पूरा बोझ उठा सकेंगे.

फ्यूचर ह्यूमन - मशीन और इंसान का मेल

लकवे के मरीजों की मदद

इन एक्सो-स्केलेटनों का इस्तेमाल लकवे के मरीजों की सहायता के लिए हो रहा है. ब्राजील में हुए 2014 फुटबॉल विश्व कप के उद्घाटन समारोह में वैज्ञानिकों ने इस तकनीकी उपलब्धि को पेश किया था. आगे चलकर इन एक्सो-स्केलेटन में बैटरियां लगी होंगी और इन्हें काफी हल्के पदार्थ से बनाया जाएगा.

फ्यूचर ह्यूमन - मशीन और इंसान का मेल

अंतरिक्ष में रोबोट

फिलहाल इन एक्सो-स्केलेटन की अंतरिक्ष में काम करने की क्षमता का परीक्षण त्रिआयामी सिमुलेशन के द्वारा किया जा रहा है. इन्हें लेकर एक महात्वाकांक्षी सपना ये है कि ऐसे रोबोटों को दूर दूर के ग्रहों पर रखा जाए और उनका नियंत्रण धरती के रिमोट से किया जा सके. भविष्य में खतरनाक मिशनों पर अंतरिक्षयात्रियों की जगह रोबोटों को भेजा जा सकता है.

हमें फॉलो करें