इतिहास में आजः 18 अगस्त

जायकेदार हवा, मासूम पानी, गुनगुनाती निगाहें, रंगीली सांसें... चांद, तारे, आकाश, नदियों और इंसानी अहसासों की तो बात ही मत पूछिए, शायर गुलजार का आज होता है जन्मदिन.

शायर के मन की थाह लेना वैसे भी मुश्किल है लेकिन गुलजार के तो आवाज की गहराई का भी सिरा नहीं मिलता. आप कितनी भी कोशिश करें उनके शब्दों से अभिभूत हो सकते हैं, उन्हें पकड़ नहीं सकते उनके सिरे नहीं टटोल सकते. शायर, लेखक, निर्देशक गुलजार ने करीब छह दशकों के अपने करियर में कविता, गीत, शेर, टीवी सीरियल, फिल्में समेत उर्दू और हिंदी साहित्य की कई विधाओं के लिए कलम चलाई है.

1954 में काबुलीवाला के साथ शुरू हुआ बॉलीवुड से उनका रिश्ता इस वक्त भी पूरे दम खम के साथ जारी है और हर गुजरते वक्त के साथ नए मोती गढ़ रहा है. गंभीर अहसास और रूमानियत भरे गीतों के साथ ही कजरारे कजरारे और बीड़ी जलइले जैसे गीत भी उनकी कलम ने लिखे हैं. यह कहना भी गलत नहीं कि उनका अंदाज हिंदी फिल्मों की एक धारा है जिसने बहुत से कलाकारों को निखरने की जमीन दी है.

हिंदी फिल्मों के वो अकेले शायर हैं जिनके हिस्से में भारत के सारे बड़े फिल्मी पुरस्कारों के अलावा अंतरराष्ट्रीय जगत का ऑस्कर और ग्रैमी पुरस्कार भी हासिल है. गुलजार ने अभिनेत्री राखी से शादी की लेकिन बेटी मेघना के जन्म के कुछ ही समय बात दोनों अलग हो गए.

एनआर/एजेए

पाकिस्तान के खूबसूरत ट्रक

तीन पहिये पर शांति

रंग बिरंगे रिक्शा पाकिस्तान के कराची में सबका ध्यान खींचते हैं. ये शांति का संदेश देने वाली गाड़ियां हैं.

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कलाकार

देश में कई बसों और ट्रकों की तरह इन रिक्शा को भी रंग बिरंगे डिजाइनों से सजाया गया है. फर्क इतना कि इस पर शांति के स्लोगन भी लिखे हुए हैं.

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पारंपरिक

रंगीन डिजाइन और विविध रंगों वाले आकार पाकिस्तान के ट्रकों और बसों पर आम हैं.

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अभियान का विस्तार

पाकिस्तान यूथ अलायंस ने कराची में पीस रिक्शा अभियान की शुरुआत की क्योंकि यहां पौने दो लाख के करीब लोग जातीय, राजनीतिक और सांप्रदायिक हिंसा का शिकार हैं.

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ट्रक पर

ये रंग बिरंगे रिक्शा ट्रक की स्टाइल में सजे हैं. इस पर औरतों, प्यार और फूलों की शायरी नहीं बल्कि शांति का संदेश है.

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कलर और डिजाइन

डबल्यू 11 कराची का सबसे व्यस्त रूट है. और इस पर सबसे ज्यादा सजी हुई बसें चलती हैं. लंदन में एक बस और सिडनी में एक ट्रैम को इस तरह सजाया गया और डबल्यू 11 का नाम दिया गया.

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हट के

'पप्पू यार तंग न कर' जैसे जुमलों की जगह 'पप्पू यार झगड़ा मत कर', या फिर सूफी नज्म या कुरान से लिए शांति के संदेश लिखते हैं.

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ऐसा भी

कुछ गाड़ियों पर लिखा होता है, 'रिक्शा चला रहा हूं, गोली तो नहीं.' जबकि एक अन्य रिक्शा पर उर्दू अखबार की कटिंग है, 'दीन में जबर नहीं.'

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सांस्कृतिक विरासत

ट्रक या बस पर बनाई गई तस्वीरें और स्लोगन बता देते हैं कि यह ट्रक किस इलाके का होगा या इसका मालिक कहां का है.

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प्रोजेक्ट का विस्तार

25 हजार अमेरिकी डॉलर के अनाम दान के साथ ग्रुप ने पांच रिक्शा सजाई हैं और 50 और सजाना चाहता है.

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