इतिहास में आजः 4 सितंबर

दुनिया भर में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले गूगल का महत्व जानते हैं. 1998 में लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पीएचडी करने के दौरान इसे विकसित किया. आज गूगल का जन्मदिन है.

हाल ही में अपने लोगो को बदलने वाले गूगल के 1998 में अपने जन्म से लेकर अब तक कई क्षेत्रों में कदम रखा है.

एक सितंबर 2015 को गूगल का नया लोगो पेश हुआ

लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पीएचडी करने के दौरान इसे विकसित किया था.

गूगल के जनक लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन

गूगल से जुड़ी कई दूसरी वेबसाइट दुनिया की 100 सबसे ज्यादा देखी जाने वाली वेबसाइटों में शामिल हैं. इनमें यूट्यूब और ब्लॉगर जैसी वेबसाइट शामिल हैं. ईमेल के लिए जीमेल, सोशल नेटवर्किंग के लिए ऑरकुट और गूगल प्लस, ऑफिस के लिए गूगल ड्राइव, इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए क्रोम जैसी दर्जनों चीजें इंटरनेट के आम से लेकर खास तबके तक की जरूरतों और शौकों को पूरा करती हैं. इंटरनेट पर जानकारी जुटाने का एक टर्म है गूगल और अब एक बड़ी जरूरत बनता जा रहा है.

ड्राइवर बिना चलेंगी कारें

ड्राइवर रहेगा निश्चिंत

नए ऑटोमेटिक कंट्रोल वाली कारों में ड्राइवर को न तो ट्रैफिक की चिंता करनी होगी और ना ही आस पास की गाड़ियों से टकराने की फिक्र. बस सोचना होगा कि जाना कहां है.

ड्राइवर बिना चलेंगी कारें

भविष्य में रोबोट चलाएंगे कारें

गूगल कंपनी के 'सेल्फ ड्राइविंग कार प्रोजेक्ट' से बनी इलेक्ट्रिक कारें कुछ ही सालों में सड़कों पर उतार दी जाएंगी. शुरू में कार में स्टियरिंग, ब्रेक और एक्सीलरेटर भी होंगे लेकिन बाद में इन्हें कारों से पूरी तरह हटा लेने की योजना है.

ड्राइवर बिना चलेंगी कारें

लेजर लाइट में दिखेगा सब

जर्मनी की सैनिक यूनिवर्सिटी भी सेल्फ ड्राइविंग गाड़ी बना रही है. इसमें लेजर की मदद से सतह का थ्रीडी नक्शा बन कर कंप्यूटर तक पहुंचता है. इससे कार की स्थिति का पता चलता है.

ड्राइवर बिना चलेंगी कारें

नए ड्राइवर को नहीं मिला है लाइसेंस

गूगल पिछले काफी समय से कैलिफोर्निया में अपने मुख्यालय में सेल्फ ड्राइविंग कारों को टेस्ट कर रही है. टेस्टिंग के दौरान कार में एक ड्राइवर भी होता है. कानून के हिसाब से कार जो भी करे उसके लिए इंसान की ही जिम्मेदारी बनेगी.

ड्राइवर बिना चलेंगी कारें

एक्सिडेंट तो नहीं होंगे

सड़कों पर दुर्घटनाएं आम हैं. गूगल को उम्मीद है कि ये सेल्फ ड्राइविंग कारें इंसानों से कम गलतियां करेंगी और दुर्घनाएं भी कम होंगी. इन्हें इस तरह से बनाया गया है कि ड्राइविंग बेहद सुरक्षित हो.

ड्राइवर बिना चलेंगी कारें

एक्सिडेंट हुए तो दोषी कौन

माना कि तकनीक सुरक्षित होगी लेकिन अगर फिर भी एक्सिडेंट हो गया तो जिम्मेदारी कौन लेगा. कार बनाने वाले, सॉफ्टवेयर प्रोग्राम बनाने वाले, कार के मालिक या फिर जो कार में बैठा है.

ड्राइवर बिना चलेंगी कारें

कैसे खतरों से बचाएंगे सेंसर

इन रोबोट कारों में कई सेंसर होंगे जो आसपास के माहौल का लगातार विश्लेषण करते रहेंगे. गूगल की कार में लेसर सेंसरों के इस्तेमाल से बाहर की थ्रीडी तस्वीर मिलती है.

ड्राइवर बिना चलेंगी कारें

सैटेलाइट, रडार और कैमरे

एक आम यूएसबी कैमरे की तरह काम करने वाली ऑप्टिकल आंखें, छोटा सा रडार सेंसर और जीपीएस के आंकड़े, यही होंगे बिना ड्राइवर की कार के आंख और कान.

ड्राइवर बिना चलेंगी कारें

लोग रहेंगे सुरक्षित

अब बिना इंसान की जान को जोखिम में डाले खतरनाक इलाकों में गाड़ियों को भेजा जा सकेगा, चाहे जहरीली गैसों वाली खदान हो या परमाणु खतरा. पोलैंड की सैनिक अकादमी में ऐसी ही एक बिना ड्राइवर वाली गाड़ी बनाई जा रही है.

हालांकि ऐसा भी नहीं कि सबकुछ ठीक ही है. मार्केट पर इसके दबदबे के कारण कॉपीराइट, सेंसरशिप और प्राइवेसी को लेकर गूगल की बड़ी आलोचना होती है लेकिन इसके बावजूद यह दुनिया का चहेता बना हुआ है.

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