ईरान ने शुरू किया परमाणु संधि पर अमल

ईरान ने अल्प संवर्धित यूरेनियम की खेप रूस को भेज दी है और विश्व सत्ताओं के साथ इस साल हुई परमाणु संधि की एक महत्वपूर्ण शर्त पूरी कर दी है. यूरेनियम की खेप भेजे जाने की जानकारी ईरान और अमेरिका ने सोमवार को दी.

ईरान के उपराष्ट्रपति अली अकबर सलेही ने सोमवार को बताया कि लदाई का काम पूरा हो गया है और करीब 9 टन यूरेनियम रूस के रास्ते पर है. जुलाई 2015 में सुरक्षा परिषद के सदस्यों और जर्मनी के साथ हुई ईरान की संधि में अल्प संवर्धित यूरेनियम रूस को देना और सेंट्रीफ्यूजों की संख्या घटाना प्रमुख हिस्से थे. इसके बदले में ईरान को रूस 137 टन येलोकेक देगा. यूरेनियम के इस कंपाउंड का इस्तेमाल बिजलीघरों के लिए परमाणु छड़ बनाने के लिए होता है.

अमेरिका ने ईरान के इस कदम का स्वागत किया है. विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा है कि यह संधि को पूरा करने की दिशा में "महत्वपूर्ण प्रगति" है. रूसी विदेश मंत्रालय ने ईरानी परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख सलेही के बयान के बाद इस खबर की पुष्टि कर दी. समाचार एजेंसी इसना के अनुसार ईरान ने 8.5 टन यूरेनियम रूस को भेज दिया है और बदले में उसे 140 टन प्राकृतिक यूरेनियम मिला है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्क टोनर के अनुसार ईरान द्वारा भेजी गई खेप 25,000 पाउंड की थी जिसमें 5 और 20 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम के अलावा कचरा और अर्धनिर्मित ईंधन प्लेट भी शामिल है. मार्क टोनर ने कहा, "मैं समझता हूं कि इसमें ईरान का लगभग पूरा मौजूदा संवर्धित यूरेनियम शामिल है."

अमानो और राष्ट्रपति हसन रूहानी

जुलाई में सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के अलावा जर्मनी के साथ ईरान ने अपने विवादित परमाणु कार्यक्रम पर समझौता कर लिया और अपने यूरेनियम भंडार को कम कर 300 किलोग्राम करने की शर्त स्वीकारी. इसका मतलब यह है कि अब ईरान के पास परमाणु बम बनाने लायक संवर्धित यूरेनियम नहीं होगा. जॉन केरी ने कहा है कि यूरेनियम रूस भेजे जाने से बम बनाने के लिए यूरेनियम संवर्धित करने की अवधि तीन महीने से बढ़कर 9 महीने हो गई है. अगले महीने तक अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को यह रिपोर्ट देनी है कि ईरान ने संधि पर अमल कर लिया है.

इस संधि का मकसद पश्चिमी देशों की यह चिंता दूर करना था कि ईरान परमाणु बम बना सकता है. हालांकि वह इस बात से इंकार कर रहा था कि उसका परमाणु बम बनाने का कोई इरादा है, लेकिन परमाणु बम बनाने वाले दूसरे देश भी बम परीक्षण से पहले यही कहते रहे हैं. बदले में पश्चिमी देश ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध उठा लेंगे. यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की रिपोर्ट आने के बाद अगले साल फरवरी में शुरू हो सकती है.

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का कहना है कि उसकी सख्त जांच के कारण ईरान के लिए संधि का पालन नहीं करना संभव नहीं होगा. संस्था के प्रमुख यूकिया अमानो ने कहा, "अगर वे कुछ छुपाने की कोशिश करेंगे तो हम सामान्य रूप से कहीं न कहीं उसका संकेत पा लेंगे और सवाल पूछना शुरू करेंगे." संधि के अनुसार आईएईए अगले दस से 25 साल तक इस बात की जांच करेगा कि ईरान संधि के प्रावधानों का पालन कर रहा है या नहीं. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी 170 देशों में परमाणु ऊर्जा के नागरिक इस्तेमाल पर निगरानी रखती है.

एमजे/ओएसजे (डीपीए,एएफपी)

यूं हुआ ईरान समझौता

संधि होने तक

18 दिनों की गहमागहम बातचीत के बाद मंगलवार 14 जुलाई को विश्व सत्ताओं और ईरान के बीच परमाणु समझौते की घोषणा हुई. बातचीत में सुरक्षा परिषद के सदस्यों अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन के विदेश मंत्रियों के अलावा जर्मन विदेश मंत्री और यूरोपीय संघ की विदेशनैतिक दूत भी मौजूद थे.

यूं हुआ ईरान समझौता

वीकएंड में समझौता बहुत करीब था लेकिन कुछ विवाद बाकी थे. अंतिम फैसला विदेश मंत्रियों को लेना था. पी5 प्लस1 देशों के विदेश मंत्री वियना के एक होटल में वार्ता के दौरान अपना रुख तय करने के लिए मिले.

यूं हुआ ईरान समझौता

वियना में संयुक्त राष्ट्र के दफ्तर में ईयू की विदेशनैतिक दूत फेडेरिका मोगेरिनी और ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने परमाणु विवाद पर समझौते की घोषणा की. इस्राएल ने इस समझौते को ऐतिहासिक समर्पण बताया है.

यूं हुआ ईरान समझौता

वार्ता में जर्मनी और फ्रांस यूरोपीय संघ का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. अंतिम क्षण में हुए ग्रीस समझौते के बाद फ्रांस और जर्मनी के विदेश मंत्री लौरां फाबिउस और फ्रांक वाल्टर श्टाइनमायर ईरान वार्ता के लिए वियना पहुंचे.

यूं हुआ ईरान समझौता

अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन केरी वार्ता के दौरान सारा समय वियना में थे. अंतिम दौर से पहले वार्ता की सफलता के लिए उन्होंने जैसे दैवी मदद के लिए सेंट स्टेफान कैथीड्रल में एक प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया.

यूं हुआ ईरान समझौता

करीब तीन हफ्ते तक चली वार्ता के दौरान हर शब्द पर सौदेबाजी हुई, दोनों और से कई सारी मांगे रखी गई, उन्हें शब्दों में ढाला गया. ईरानी विदेश मंत्री अपने सहयोगियों के साथ दस्तावेजों पर नजर डालते हुए.

यूं हुआ ईरान समझौता

ऐसा भी समय आया जब लगा कि वार्ता टूट जाएगी. ईरान ने पश्चिमी देशों पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया तो अमेरिका ने वार्ता तोड़ने की धमकी दी. ऐसे ही एक मौके पर बालकनी में विचारमग्न ईरानी विदेश मंत्री.

यूं हुआ ईरान समझौता

लंबी वार्ता के दौरान पत्रकारों की हालत भी बहुत अच्छी नहीं रही. उनके पास रिपोर्ट करने के लिए ज्यादा कुछ नहीं था, लेकिन मीडिया हाउस उनसे हर दिन किसी न किसी नई खबर की उम्मीद कर रहे थे.

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