एचआईवी पीड़ित बच्ची ठीक हुई

पैदाइशी रूप से एचआईवी से पीड़ित बच्ची पूरी तरह ठीक हो गई. बच्चों में एचआईवी के सफल इलाज का यह पहला मामला है, जो पूरी दुनिया में नया मोड़ ला सकता है. एचआईवी संक्रमित लोग बाद में एड्स की चपेट में चले जाते हैं.

रिसर्चरों का कहना है कि मिसिसीपी की यह बच्ची अब ढाई साल की हो चुकी है. उनका कहना है कि इसे पैदाइशी एचआईवी था, लेकिन अब वह पूरी तरह ठीक हो गई है. पिछले एक साल से उसका कोई इलाज नहीं किया जा रहा है और उसे इस बीच किसी तरह का इंफेक्शन नहीं हुआ है.

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वह आगे भी सेहतमंद बनी रहेगी. लेकिन अगर ऐसा होता है तो यह अपनी तरह का पहला मामला होगा, जबकि एचआईवी के किसी बीमार के ठीक होने का सिर्फ दूसरा. रविवार को जानकारों ने एक खास मीटिंग में इस बात को सामने रखा और कहा कि जन्म से एचआईवी पीड़ित बच्चों के इलाज में इसका खासा रोल हो सकता है, खास तौर पर अफ्रीकी महाद्वीप में, जहां एड्स का भारी प्रकोप है.

डॉक्टर हाना गे

इलाज के पास

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के डॉक्टर एंथनी फॉकी का कहना है, "अगर इसे पूरा इलाज नहीं कहा जा सकता तो आप कह सकते हैं कि यह इलाज के बहुत पास है." एक डॉक्टर ने इस बच्ची को तेजी से दवा की खुराक दी थी. इसके पैदा होने के 30 घंटों के भीतर उसे तीन तरह की दवाइयां दी गईं. बच्ची के पैदा होते ही पता चला कि उसे एचआईवी है.

मिसिसीपी यूनिवर्सिटी की डॉक्टर हाना गे का कहना है, "मुझे लगा कि इस बच्ची में दूसरे बच्चों से कहीं ज्यादा खतरा है और इसे सर्वश्रेष्ठ इलाज मिलना चाहिए." तेज इलाज का फायदा यह हुआ कि शरीर के दूसरे हिस्सों में पहुंचने से पहले ही इस बच्ची के खून से एचआईवी को निकाला जा सका. शरीर में छोटे छोटे गुच्छे बना लेने के बाद इसमें परेशानी आती.

बन सकती है मिसाल

जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी की डॉक्टर डेबोरा परसॉद ने इस पूरे मामले को करीब से देखा और इसकी अगुवाई की. उनका कहना है कि हो सकता है कि इसके बाद हम ज्यादा जोखिम वाले बच्चों का बेहतर ढंग से इलाज कर सकें. हालांकि डॉक्टर फॉकी का कहना है कि इस प्रगति की वजह से किसी को एड्स से निपटने वाली दवा बंद करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, "लेकिन इसने एक दरवाजा खोला है." और उनकी एक खास सलाह भी है कि इलाज से बेहतर है कि कोशिश की जाए कि पैदा होने वाले बच्चों को एचआईवी हो ही नहीं.

डॉक्टर एंथनी फॉकी

दो साल पहले 2011 में दुनिया भर में करीब तीन लाख बच्चे एचआईवी के साथ पैदा हुए, जिनमें ज्यादातर गरीब मुल्कों में थे. इन जगहों पर सिर्फ 60 फीसदी संक्रमित महिलाओं को ही इलाज मिल पाता है. अमेरिका में ऐसे मामले दुर्लभ हैं क्योंकि महिलाओं को बच्चे पैदा करने से पहले कई टेस्ट से गुजरना पड़ता है. डॉक्टर गे का कहना है, "हम इस बात का वादा नहीं कर सकते कि हम उन सभी बच्चों का इलाज कर देंगे, जो संक्रमित हैं. हम यह वादा कर सकते हैं कि गर्भावस्था के दौरान अगर मांओं को एचआईवी है, तो बच्चों को इसके असर से बचाया जा सके."

इस बच्ची के अलावा दुनिया में सिर्फ एक मिसाल है, जहां एचआईवी से पीड़ित कोई व्यक्ति ठीक हुआ है. लेकिन वह एक जटिल मेडिकल प्रक्रिया थी, जिसमें एचआईवी पीड़ित शख्स को ऐसे व्यक्ति ने मेरुरज्जा दी थी, जिसका शरीर में एचआईवी के प्रति प्रतिरोधक क्षमता है. सैन फ्रांसिस्को के टिमोथी रे ब्राउन को पिछले पांच साल से किसी इलाज की जरूरत नहीं पड़ी है.

मिसिसीपी मामले के बाद रिसर्चरों का कहना है कि अलग अलग मामलों में अलग अलग इलाज की संभावना हो सकती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि उन बच्चों पर भी दोबारा नजर डाली जानी चाहिए, जिनका पहले इलाज हुआ हो.

एजेए/ओएसजे (एपी)

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