ऑस्ट्रेलिया में जेलीफिश का 'आक्रमण'

ऑस्ट्रेलिया के समुद्री तटों पर हर साल की तरह इस साल भी जेलीफिश आईं. मगर इस साल जेलीफिश के हजारों लोगों को डंक मारने की वजह से उत्तर-पूर्वी तटों को बंद करना पड़ गया.

अत्यधिक विषैली जेलीफिश मछलियों ने कुछ ही दिनों में ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्वी तटों पर तीन हजार से अधिक लोगों को डंक मार दिया है. इनकी वजह से कई समुद्र तटों को लोगों के लिए बंद कर करना पड़ गया है.

बहुत बड़ी संख्या में ऑस्ट्रेलिया के तटों पर पुर्तगाल की मैन ओ'वॉर जेलीफिश आ पहुंची है, जिसका डंक बेहद दर्दनाक होता है. ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में स्थानीय मीडिया ने इसे जेलीफिश के "आक्रमण" का नाम दिया है.

कोस्टगार्ड एसोसिएशन सर्फ लाइफ सेविंग का कहना है, "मैन ओ'वॉर जेलीफिश जिसको ब्लूबॉटल के नाम से भी जाना जाता है, वो अभी तक 3,595 लोगों को डंक मार चुकी हैं. इसकी वजह से इन लोगों को दर्दनाक जलन महसूस हो रही है."

कम से कम और चार समुद्र तटों को भी बंद रखा गया क्योंकि कोस्टगार्ड एसोसिएशन 'सर्फ लाइफ सेविंग' का मानना है कि और भी जेलीफिश तट की तरफ आ रही हैं. सर्फ लाइफ सेविंग की कई चेतावनियों में से एक रेनबो बीच पर लगी हुई हैं. इसमें कहा गया है कि "पानी से दूर रहिए. बीच को बंद किया जा रहा है क्योंकि और भी ब्लूबॉटल जेलीफिश तट की तरफ आ रही हैं."

ब्लूबॉटल जेलीफिश का काटना कोई नई बात नहीं है और दक्षिणी गोलार्ध की गर्मियों के दौरान ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी समुद्र तटों पर ऐसा होता आया है. मगर इस साल इतने ज्यादा लोगों को ब्लूबॉटल जेलीफिश का डंक लगा है जिसको देख कर अधिकारी हैरान हैं.

Qualle Portugiesische Galeere am Strand

रॉयल ऑस्ट्रेलियन कॉलेज ऑफ जनरल प्रैक्टिशनर्स के मुताबिक हर साल ब्लूबॉटल जेलीफिश के काटने के कोई दस हजार मामले ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट पर होते हैं. पिछले कुछ दिनों में ब्लूबॉटल जेलीफिश के काटने की वारदातें बहुत ज्यादा बढ़ी हैं और उसका सबसे बड़ा कारण है उत्तर-पूर्व से आने वाली तेज हवाएं, जिन्होंने इन जेलीफिश मछलियों को तैराकों के संपर्क में ला दिया है.

डॉक्टरों का कहना है कि डंक मारने के कारण तेज दर्द और त्वचा में सूजन होती है. त्वचा में दर्द कुछ मिनटों से ले कर कुछ घंटों तक रह सकता है. डंक की वजह से मितली, उल्टी और बेचैनी भी हो सकती है.

इलाज के लिए घाव को 45 डिग्री सेल्सियस के पानी से साफ करना चाहिए या फिर घाव पर आइस पैक लगाना चाहिए. हालांकि जेलीफिश की एक इससे भी डरावनी किस्म 'इरुकंदजी' के डंक से मुकाबले ब्लूबॉटल जेलीफिश के डंक का इलाज आसान है. उन खतरनाक बॉक्स जेलीफिश के डंक से मांसपेशियों में दर्द, भयंकर उल्टी, दिल का दौरा पड़ना और मिनटों में मौत भी हो सकती है. यह किस्म उंगली के एक नाखून से भी छोटी हो सकती है.

सरकारी मी़डिया एबीसी ने बताया कि इस सीजन में क्वींसलैंड में इरुकंदजी स्टिंग के शिकारों की संख्या अस्पतालों में 20 तक पहुंच गई है, जो सामान्य वार्षिक औसत से दोगुनी है.

एनआर/आरपी (एएफपी, डीपीए)

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न दिमाग है, न दिक्कत

जेलीफिश बीते 50 करोड़ साल से महासागरों में तैर रही हैं, वो भी बिना दिमाग के. जेलीफिश में मस्तिष्क के बजाए एक बेहद जबरदस्त तंत्रिका तंत्र होता है जो तुरंत सिग्नलों को एक्शन में बदलता है. इसीलिए जेलीफिश की कई प्रजातियों को दिमाग की जरूरत ही नहीं पड़ती.

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नाम पर न जाना

इसे भले ही जेलीफिश कहा जाता हो, लेकिन असल में यह मछली नहीं है. यह मूंगों और एनीमोन के परिवार की सदस्य हैं. इन्हें मेडुसोजोआ नाम से भी जाना जाता है.

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छतरी जैसा आकार

जेलीफिश के शरीर में 99 फीसदी पानी होता है. वयस्क इंसान के शरीर में करीब 63 फीसदी जल होता है. जेलीफिश के शरीर का सबसे बड़ा हिस्सा छत्रनुमा ऊपरी हिस्सा है. इसके जरिये जेलीफिश खुराक लेती है. धागे जैसे लटके रेशों की मदद से ये शिकार करती है. कुछ जेलीफिश में यह रेशे एक मीटर से भी ज्यादा लंबे भी हो सकते हैं.

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विशाल जेलीफिश

आमतौर पर लगता है कि जेलीफिश छोटी ही होती हैं. लेकिन ऐसा सोचना गलत है. एशियन नोमुरा जेलीफिश दिखने में भले ही बहुत रंगीन न हो, लेकिन ये काफी बड़ी भी होती है. इसके छातानुमा हिस्से का व्यास दो मीटर तक हो सकता है और वजन 200 किलोग्राम से भी ज्यादा.

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बहाव के साथ

जेलीफिश खुद तैरकर दूसरी जगह नहीं जा पातीं. ये समुद्री लहरों के साथ ही बहती हैं. लहरों की दिशा में बहते हुए जेलीफिश अपने शरीर को सिकोड़ती और फुलाती है, ऐसा करने से अधिकतम 10 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार हासिल होती है.

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अथाह विषैली

पानी में तैरती जेलीफिश भले ही बहुत खूबसूरत लगे लेकिन इसकी कुछ प्रजातियां बहुत ही जहरीली होती हैं. सबसे खतरनाक लायन्स मैन जेलीफिश होती है. इसके रेशे बेहद घातक जहर छोड़ते हैं. छोटे केकेड़े और मछली के लार्वा तो तुरंत मारे जाते हैं.

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आग जैसी जलन

लायंस मैन जेलीफिश का डंक इंसान को भी तिलमिला देता है. इसके डंक से त्वचा में लाल निशान पड़ जाते हैं और तेज जलन होने लगती है. बॉक्स जेलीफिश का डंक तो जान भी ले सकता है. पूर्वी ऑस्ट्रेलिया और पश्चिमी प्रशांत महासागर में पाई जाने वाली बॉक्स जेलीफिश को दुनिया के सबसे जहरीले जीवों में गिना जाता है.

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स्पेशल रंगीन इफेक्ट

जेलीफिश कई काम कर सकती है. शिकार को रिझाने या दूसरे जीवों को डराने के लिए यह चमकने लगती है.

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हैरत भरा जीवन

जेलीफिश के प्रजनन का तरीका बड़ा ही अनोखा है. यह पीढ़ी दर पीढ़ी बदलता भी है. जेलीफिश सेक्शुअल कोशिकाएं पैदा करती है और ये कोशिकाएं आपस में मिलकर लार्वा बनाती है. बाद से यह लार्वा जेलीफिश में बदलता है.

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जेलीफिश का झुंड

कभी कभार समुद्री तटों पर जेलीफिश की बाढ़ आ जाती है. जीवविज्ञानी इसके लिए कछुओं के शिकार को जिम्मेदार ठहराते हैं. कछुए और कुछ मछलियां जेलीफिश को खाती हैं, लेकिन अगर ये शिकारी ही खत्म हो जाएं तो जेलीफिश की संख्या तेजी से बढ़ने लगती है.

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बेहद सावधान

बीच पर घूमते हुए अगर गोंद जैसी कोई चीज दिखाई पड़े तो सावधान हो जाइये. आम तौर पर यह जेलीफिश होती है, जिसके रेशे नहीं दिखाई पड़ते. इसे न तो पैर से छुएं और न ही हाथ से, वरना आप मुश्किल में पड़ सकते हैं.