कतर में 441 भारतीय और नेपाली मजदूरों की मौत

कतर में 2022 में फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप खेला जाना है. खेलों की तैयारियों में लगा कतर लगातार विवादों में फंसता जा रहा है. एमनेस्टी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार बीते साल कतर में 441 भारतीय और नेपाली मजदूरों की जान गयी.

किसी भी देश में अंतर्राष्ट्रीय खेलों का आयोजन ना केवल उसके लिए गौरव की बात होती है, बल्कि आधारभूत ढांचे को मजबूत करने का एक जरिया भी. खेलों का आयोजन देश में पर्यटन को बढ़ावा देता है जो कि अर्थव्यवस्था के लिहाज से जरूरी है. लेकिन कतर को शोहरत कम और बदनामी ज्यादा हासिल हो रही है. तीन बड़े मुद्दों में देश विवादों में घिरता हुआ दिख रहा है. पहला, खेलों की दावेदारी की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का मामला. दूसरा, खेलों के आयोजन के दौरान गर्मियों का तापमान. और तीसरा, आप्रवासी मजदूरों के शोषण का मामला.

कतर में काम कर रहे मजदूरों में सबसे ज्यादा संख्या भारत और नेपाल से गए लोगों की है. मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार बीते साल कतर में 441 भारतीय और नेपाली मजदूरों की जान गयी. इनमें भारत के 279 और नेपाल के 162 मजदूर शामिल हैं. हालांकि रिपोर्ट में केवल कंस्ट्रक्शन साइट पर हुए हादसों के शिकार ही नहीं, बल्कि किसी भी कारण से मरने वाले लोगों का आंकड़ा तैयार किया गया है.

छोटे वादे और थोड़े नतीजे

पिछले कुछ समय से बुरे हालात में गुजर बसर करने वाले मजदूरों की तस्वीरें मीडिया में देखी जा रही हैं. कतर सरकार ने मई 2014 में सुधारों का वायदा किया था. इस बारे में "प्रॉमिसिंग लिटल, डिलिवरिंग लेस" यानि छोटे वादे और थोड़े नतीजे नाम की इस रिपोर्ट में कहा गया है, "इन वायदों को अमल में लाना मुमकिन नहीं दिखता और कतर सरकार ने कोई जानकारी नहीं दी है कि वह किस तरह से इससे निपटेगी."

जर्मनी के सरकारी चैनल एआरडी ने हाल ही में दिखाया कि किस तरह मजदूर खंडहरों जैसी इमारतों में रहने को मजबूर हैं. एक कमरे में कई कई लोग जमीन पर बिस्तर लगा कर रह रहे हैं. यहां तक कि कई तो अधूरी बनी इमारतों के गुसलखानों में रह रहे हैं. चैनल ने पिछले साल और इस साल की रिपोर्टों को दिखा कर बताया है कि मजदूरों के हालात में कोई फर्क नहीं आया है. उनके कैंपस के चारों और बाड़ लगी है ताकि ना ही वे बाहर जा सकें और ना मीडिया अंदर आ सके.

मालिक के पास है पासपोर्ट

भारत से गए एक मजदूर गंगा प्रसाद ने बताया, "मेरी कंपनी ने मेरा पहचान पत्र अपने पास रखा हुआ है. यानि किसी भी वक्त पुलिस मुझे पकड़ सकती है और जेल में डाल सकती है. इस वजह से मैं कैंपस से बाहर ही नहीं जाता. मेरा जीवन या तो कंस्ट्रक्शन साइट है या फिर यह गंदा कमरा. अगर मेरा बस चलता तो मैं यह काम छोड़ कर कहीं और नौकरी ढूंढ लेता. लेकिन मैं ऐसा भी नहीं कर सकता क्योंकि मालिक के पास मेरा पासपोर्ट है और वह मुझे कहीं और जाने ही नहीं देगा."

ब्रिटिश अखबार गार्डियन की एक रिपोर्ट के अनुसार कतर सरकार ने एमनेस्टी के आरोपों को गलत ठहराते हुए कहा है, "पिछले एक साल में मजदूरों के अधिकारों और हालात को बदलने के लिए बहुत से महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं." एक बयान में सरकार ने कहा है कि 294 लेबर इंस्पेक्टर तैनात किए गए हैं और इस साल के अंत तक यह संख्या बढ़ा कर 400 कर दी जाएगी. इसके अलावा सरकार का दावा है कि ढाई लाख मजदूरों के लिए नए निवास भी बनाए जा रहे हैं.

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'2010'

दिसंबर 2010 में फीफा ने ज्यूरिष में कतर को 2022 फुटबॉल विश्व कप की मेजबानी के लिए चुने जाने की घोषणा की. फुटबॉल के 22वें विश्व कप मुकाबले के आयोजनकर्ता के रूप में कतर के चुनाव को लेकर काफी हैरानी देखने को मिली. चुनाव की प्रक्रिया में कुल 22 में से 14 वोट कतर के पक्ष में पड़े थे.

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'2011'

जनवरी 2011 में ब्लाटर कतर की राजधानी दोहा में एशियाई खेलों के आयोजन के पहले एक कार्यक्रम में पहुंचे और टूर्नामेंट के "जाड़ों में होने" की उम्मीद जताई. 2018 और 2022 दोनों विश्व कप के लिए मेजबानों के चुनाव में भ्रष्टाचार के आरोपों ने मई 2011 में सिर उठाना शुरु किया. एक व्हिसलब्लोअर फेड्रा अलमजीद ने दावा किया कि इसके लिए कतर के पक्ष में वोट डालने के लिए फीफा की कार्यकारी समिति को पैसे दिए गए.

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'2013'

सितंबर 2013 में यूरोपीय फुटबॉल की संचालक संस्था यूएफा के 54 सदस्यीय दल ने पारंपरिक रूप से जून-जुलाई महीनों में आयोजित होने वाले टूर्नामेंट के समय को बदलने का समर्थन किया. नवंबर में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने वर्ल्ड कप के आयोजन से जुड़े निर्माण कार्यों में चल रहे "मानवाधिकारों के हनन" का पर्दाफाश किया. मानव "शोषण के खतरनाक स्तर" पर एमनेस्टी की रिपोर्ट जारी हुई.

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'2014'

जून में ब्राजील विश्व कप के दौरान फीफा पर 2022 का नया मेजबान चुनने का दबाव बढ़ गया. अमेरिकी वकील मिशेल गार्सिया की अध्यक्षता वाले दल ने फीफा पर लगे आरोपों की जांच शुरु कर दी थी. गार्सिया की फाइनल रिपोर्ट को कानूनी पेंच में उलझाकर फीफा ने जारी नहीं होने दिया. नवंबर में फीफा ने ही स्विस अटॉर्नी के पास कुछ लोगों के खिलाफ 2018, 2022 मेजबानी मामले में "संभावित गड़बड़ी" की शिकायत दर्ज की.

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'2015'

24 फरवरी को फीफा विश्व कप टास्क फोर्स ने प्रस्ताव दिया कि 2022 मुकाबले कतर में ही जाड़ों में आयोजित किए जाएं. 17 सालों से फीफा प्रमुख रहे ब्लाटर के साथ काम करने वाले कई वरिष्ठ अधिकारियों को 27 मई को साजिश और भ्रष्टाचार समेत कई आरोपों के अंतर्गत स्विस अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया और फीफा के ज्यूरिष मुख्यालय पर छापे मारे. व्यक्तिगत रूप से ब्लाटर के खिलाफ अब तक कोई आरोप तय नहीं हुआ है.

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