कब्रों से भरे तहखाने में पहुंचा रोबोट

पेरिस और रोम के कैटाकॉम्ब दुनिया भर में मशहूर हैं. ये वे तहखाने हैं जो कभी कब्रिस्तान हुआ करते थे. रोम के प्रिसिला कैटाकॉम्ब में जहां इंसानों को पहुंचना मुश्किल है, वहां एक रोबोट घूम रहा है.

इटली के रोम में करीब 2000 साल पहले शहर के नीचे के तहखानों को कब्रिस्तान की तरह इस्तेमाल किया जाता था. आज भी सभी सुरंगों की जानकारी नहीं है. संकरी सुरंगें ढह सकती हैं या फिर वहां रेडियोधर्मी राडोन गैस हो सकती है. यहां इंसानों के लिए पहुंचना तो मुश्किल है लेकिन रोबोटो को भेजा जा सकता है. खुद चलने वाले रोबोट माटिल्डा की टेस्टिंग के लिए यहां आदर्श जगह है. रोबोट को भूमिगत 3डी मैप तैयार करना है.

बॉन यूनिवर्सिटी के युवा रिसर्चरों की टीम ने ऐसी एल्गोरिदम विकसित की है जिसकी मदद से रोबोट रोम शहर की शुरुआती ईसाई सभ्यता की पड़ताल कर रहा है. ये हाई टेक मशीन प्रिसिला कैटाकॉम्ब की अंधेरी गलियों में 30 सेंटीमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से चल रही है. बॉन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सिरिल श्टाखनिस बताते हैं, "यह सॉफ्टवेयर 3डी का परिवेश तैयार करता है, उसकी खुद जांच करता है, बाधाओं को पहचानता है और उन्हें दूर करता है. वह पूरे तहखाने में जा सकता है, अपने कैमरे के जरिए यह वहां का सटीक मॉडल बना सकता है."

कई कैमरों की मदद से रोबोट एक सेकेंड में 20 बार स्कैनिंग करता है. 50 वॉट की एक एलईडी लाइट वीडियो के लिए रोशनी का काम करती है. मार्ग में बाधा आने पर रोबोट रास्ता बदल लेता है और अपना काम जारी रखता है.

रोबोटों की दुनिया

कुचालें भरता कंगारू

कंगारू ऊर्जा के कुशल उपयोग का रोल मॉडल हैं. फेस्टो नामकी कंपनी ने कंगारू के जैसा दिखने वाला और उसी की तरह छलांगें लगाने वाला एक रोबोट बनाया है जो हाथ के इशारे पर कूदता या रुकता है.

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टूर गाइड 'फ्रॉग'

ट्विनी यूनिवर्सिटी ने 'फ्रॉग' नामका एक ऐसा रोबोट तैयार किया है जो अपनी मनमोहक बातों, तस्वीरों और वीडियो से पर्यटकों को अपने साथ बांधे रखता है. इसे परखने के लिए इसका इस्तेमाल कुछ चिड़ियाघरों में किया जा चुका है.

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ये हैं रोबो 'रोडरनर'

इस 12 पैरों वाले चलते फिरते और दोड़ते रोबोट को बनाया है ब्रेमेन यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने. केकड़ों, कीड़ों और मकड़ियों जैसे जीवों से प्रेरणा लेकर इस रोबोट को चलाने का तरीका विकसित किया गया.

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ड्यूटी भी निभाते हैं

हॉलैंड में बनी यह खास उड़ने वाली रोबोटिक चिड़िया हवाई अड्डों पर एक खास भूमिका निभाती है. अपनी खतरनाक शक्ल से यह बाकी पक्षियों को डराती है जिससे वे एयरक्राफ्ट के टरबाइन में फंसने से बच जाते हैं और हवाई अड्डों का खर्च भी बचता है.

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मुश्किल काम चुटकियों में

कहीं तार लगाना हो या कनेक्शन जोड़ना हो, आपको सिर्फ आदेश देना है और बड़ी बड़ी फैक्ट्रियों में भी रोबोट सही जगह जाकर काम को तुरंत अंजाम दे पाते हैं. इससे उत्पादन की प्रक्रिया तो तेज होनी ही है.

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हाथी सूंड जैसा रोबोआर्म

फेस्टो कंपनी का बनाया रोबोटिक हाथ, हाथी की सूंड से प्रेरित है. ऐसा हाथ जो चीजों को बड़ी ही मजबूती से पकड़ता है और उतनी ही खूबी से एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाता भी है.

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तेज और किफायती

बड़ी बड़ी कार फैक्ट्रियों में तेज काम करने के साथ साथ पर्यावरण को नुकसान ना पहुंचाने वाले तरीके अपनाए जा रहे हैं. रोबोटों के इस्तेमाल से इन चीजों के साथ साथ, खर्च भी कम आ रहा है.

अपनी गलतियों से सीखता है रोबोट

कमाल की बात यह है कि इसके तहखाने में खो जाने की भी कोई संभावना नहीं है क्योंकि माटिल्डा एक सर्किट में ही चक्कर लगाता है. सर्किट पूरा होने के बाद ही वह किसी नई जगह पर जाता है. प्रोफेसर श्टाखनिस कहते हैं, "जब रोबोट एक जाने पहचाने इलाके से वापस लौटता है तो वह गलतियां ठीक करता जाता है और अंत में ज्यादा सटीक नक्शा मिलता है."

अपना काम सही तरीके से पूरा करने के लिए रोबोट को दुश्वार जगहों तक पहुंचना होगा. उसके सामने अलग अलग तरह की चुनौतियां आएंगी. उसे हर स्थिति के लिए तैयार रहना होगा.

इस रोबोट को बाद में ऐतिहासिक इलाकों के सर्वेक्षण और उनकी हिफाजत के लिए पुरातत्व सर्वेक्षक, इतिहासकार या फिर इंजीनियर इस्तेमाल करेंगे. लेकिन इसकी ऑपरेटिंग आसान होनी चाहिए. इसमें ऑटोमैटिक इमरजेंसी रिटर्न सिस्टम भी लगा है.

अब तक प्रिसिला कैटाकॉम्ब के करीब पांच किलोमीटर इलाके का इस इलेक्ट्रिक रिसर्चर ने नक्शा बना लिया है. इसके 3डी वीडियो की मदद से आने वाले दिनों में हर कोई इंसानी सभ्यता के उन पलों को घर पर बैठे बैठे इंटरनेट पर देख सकता है.

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