"कारोबारी युद्ध" हैं अमेरिकी प्रतिबंध: रूस

अमेरिका के नए प्रतिबंध, "पूरी तरह कारोबारी युद्ध हैं." रूसी प्रधानमंत्री मेदवेदेव के मुताबिक ये प्रतिबंध दिखाते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति संसद के सामने कितने कमजोर हैं.

ट्रंप ने हाल की में रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक पर दस्तखत किये हैं. रूस पर 2016 में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में दखल देने आरोप हैं. यूक्रेन में रूसी कार्रवाई से भी अमेरिकी संसद नाराज है. रूस पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव बीते हफ्ते अमेरिकी संसद लेकर आई. वोटिंग में उसे बहुमत से पास किया गया. फिर विधेयक राष्ट्रपति के पास गया.

ट्रंप चाहते तो वीटो अधिकार का इस्तेमाल कर विधेयक का रास्ता को रोक सकते थे. लेकिन रूस से करीबी रिश्तों के चलते वह पहले से ही दबाव में हैं. लिहाजा उन्हें प्रस्ताव पर दस्तखत करने पड़े. प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने के दौरान ट्रंप ने कहा कि कांग्रेस विधेयक पर अति कर रही है. विधेयक पर अपनी टिप्पणी जोड़ते हुए उन्होंने इसे बेहद खामियों वाला करार दिया. ट्रंप ने कहा, "एक राष्ट्रपति होने के नाते, मैं कांग्रेस की तुलना में विदेशी मुल्कों से काफी बेहतर डील कर सकता हूं."

प्रतिबंधों ने जी-20 सम्मेलन के गर्माहट को ठंडा किया

प्रतिबंध लगाने वाला कानून रूस की ऊर्जा परियोजनाओँ में अमेरिकी निवेश की सीमा तय करता है. साथ ही रूस के साथ काम करने वाली अमेरिकी कंपनियों की मुश्किलें बढ़ाने वाला है. विधेयक में उत्तर कोरिया और ईरान पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं. ईरान ने प्रतिबंधों को परमाणु करार का उल्लंघन करार दिया है. तेहरान ने कहा कि वह सही तरीके से इसका जवाब देगा.

लेकिन रूसी प्रधानमंत्री तुरंत ही अमेरिकी कदमों की आलोचना कर दी. अपने फेसबुक पेज पर मेदवेदेव ने कहा कि प्रतिबंधों का पैकेज "अमेरिका के नए प्रशासन के साथ हमारे रिश्ते बेहतर करने की उम्मीदों को खत्म करता है."  मेदवेदेव ने यह भी कहा कि ट्रंप का प्रतिबंधों पर दस्तखत करना दिखाता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति कांग्रेस के सामने कितने लाचार हैं.

अमेरिकी एजेंसियों का आरोप है कि मॉस्को ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में दखल दिया और इसका फायदा डॉनल्ड ट्रंप को हुआ. ट्रंप के बेटे और दामाद पर मॉस्को से करीबी रिश्तों का आरोप है. अमेरिकी कांग्रेस की विशेष समिति और एक खास जांच एजेंसी मामले की पड़ताल कर रही है. रूस इन आरोपों से इनकार करता आया है.

बीते हफ्ते जब अमेरिकी कांग्रेस ने प्रतिबंध संबंधी विधेयक पास किया तब भी मॉस्को ने कड़ा रुख अपनाया. रूस ने अपने यहां अमेरिकी दूतावास और उच्चायोग में तैनात स्टाफ की संख्या में 755 की कटौती करने को कहा. ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद वॉशिंगटन और मॉस्को के रिश्तों में जो बदलाव दिख रहा था वह अब पुराने दौर के तनाव में बदल रहा है.

(फेसबुक पर सबसे ज्यादा फॉलोअर्स वाले नेता)

फेसबुक पर सबसे ज्यादा फॉलोअर्स वाले नेता

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

जनसंपर्क कंपनी बर्सन-मार्सटेलर की हाल ही में आई रिपोर्ट में विश्व भर के नेताओं की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर फॉलोइंग के हिसाब से रैंकिंग की गयी. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निजी पेज को 4 करोड़ लोग फॉलो करते हैं. सवा अरब की आबादी वाले देश में अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा फेसबुक यूजर रहते हैं.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप

ट्रंप के निजी पेज को करीब 2 करोड़ लोग फॉलो करते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति के ट्विटर एकाउंट पर इससे ज्यादा यानि करीब 2.5 करोड़ फॉलोअर हैं. बर्सन-मार्सटेलर की इस स्टडी में साल 2016 के दौरान विश्व भर के 590 टॉप नेताओं के फेसबुक अकाउंट पर गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है.

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ओबामा, पद पर नहीं फिर भी सबसे आगे

आठ साल तक अमेरिका के राष्ट्रपति का पद संभालने वाले लोकप्रिय नेता बराक ओबामा की कुर्सी छूट जाने के बावजूद सोशल मीडिया पर लोकप्रियता कम नहीं हुई है. अब भी फेसबुक पर उनके निजी अकाउंट को करीब 5.4 करोड़ लोग फॉलो करते हैं. यानि बाकी सब नेताओं के मिलाकर भी इतने फॉलोअर नहीं हैं.

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जॉर्डन की क्वीन रानिया

क्वीन रानिया ऑफ जॉर्डन, किंग अब्दुल्लाह द्वितीय की पत्नी हैं. मानवाधिकार और महिला अधिकार फोरमों से सक्रिय रूप से जुड़ी क्वीन के फेसबुक पर 1 करोड़ से भी अधिक फॉलोअर हैं. यह जॉर्डन की कुल आबादी से भी ज्यादा है. साफ पता चलता है कि पश्चिमी मीडिया में इस प्रगतिशील मुस्लिम अरब क्वीन की लोकप्रियता कितनी ज्यादा है.

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तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोवान

रेचेप तैय्यप एर्दोवान को 90 लाख लोग फॉलो करते हैं. पिछले साल वे ओबामा और मोदी के बाद तीसरे नंबर पर थे. इस बार फॉलोअर्स की संख्या के मामले में क्वीन रानिया से पिछड़ने के कारण उन्हें चौथे नंबर पर संतोष करना पड़ेगा.

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मिस्र के राष्ट्रपति अल सीसी

मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल सीसी को 70 लाख लोग फेसबुक पर फॉलो करते हैं. इस रिपोर्ट में ध्यान दिया गया है कि नेता किस तरह की चीजें पोस्ट करते हैं और उनके पोस्ट पर कितने लोगों की "इंगेजमेंट" (यानि लाइक्स, कमेंट्स और शेयर) होते हैं.

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कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन

इस स्टडी में विश्लेषण किया गया है कि नेताओं ने सोशल मीडिया पर लोगों के साथ कितना इंटरऐक्शन किया है. पाया गया कि 5.8 करोड़ इंटरऐक्शन के साथ कंबोडिया के प्रधानमंत्री सेन का फेसबुक अकाउंट विश्व नेताओं में तीसरे नंबर पर है. (नदीने बेर्गहाउसेन/आरपी)

ओएसजे/एनआर (एपी, एएफपी, रॉयटर्स)

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