केले की मदद से कैंसर की जांच

केले के छिलके पर पड़ने वाले काले धब्बे वैज्ञानिकों की स्किन कैंसर को आसानी से पहचानने में मदद कर रहे हैं. उनसे वैज्ञानिक मरीज के इलाज और जीवित रहने की संभावनाओं के बारे में भी पता लगा रहे हैं.

जब केले कुछ दिन पुराने हो जाते हैं तो उनके छिलके पर काले रंग के धब्बे पड़ने लगते हैं. ऐसा केले में मौजूद टायरोसिनेस एंजाइम के कारण होता है. यही एंजाइम इंसान की त्वचा में भी मौजूद होता है. स्किन कैंसर के गंभीर रूप, मेलानोमा से गुजर रहे मरीजों की त्वचा में इसकी मात्रा और भी ज्यादा होती है. रिसर्चरों की टीम ने इस जानकारी का इस्तेमाल एक खास तरह का स्कैनर बनाने में किया.

उन्होंने इस स्कैनर का इस्तेमाल केले के छिलके से शुरू किया. इसके बाद उन्होंने इससे मानव त्वचा की जांच भी की. स्विट्जरलैंड की फिजिकल एंड ऐनेलिटिकल इलेक्ट्रोकेमिस्ट्री की लैब में रिसर्चरों ने स्थापित किया कि एंजाइम मेलानोमा के विकास का अहम सूचक है.

मांस छोड़ने के फायदे

जलन में कमी

मांस या प्रोसेस्ड फूड खाकर अक्सर सीने या पेट में जलन का एहसास होता है. कभी कभार जलन होना बड़ी बात नहीं लेकिन इसका बना रहना खतरनाक है. शाकाहारी खानपान से इसमें कमी आती है क्योंकि इसके फाइबर में एंटी ऑक्सीडेंट होते हैं.

मांस छोड़ने के फायदे

कोलेस्ट्रॉल घटेगा

कोलेस्ट्रॉल से दिल की बीमारियों का भारी खतरा रहता है. शोध के मुताबिक जो लोग सब्जियां खाते हैं उनमें कोलेस्ट्रॉल का स्तर 35 फीसदी तक कम होता है. पौधों से मिलने वाले उत्पादों में सैचुरेटेड फैट बहुत ही कम होता है.

मांस छोड़ने के फायदे

बेहतर स्वास्थ्य

शाकाहारी भोजन में पाया जाने वाला फाइबर उन बैक्टीरिया के विकास में मदद करता है जो हमारी आंतों के लिए अच्छे हैं. ये पाचन में मदद करते हैं. पौधों से मिलने वाले जरूरी बैक्टीरिया शरीर के इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने, डायबिटीज, एथीरोस्क्लेरोसिस और लिवर की बीमारियों से शरीर की रक्षा करते हैं.

मांस छोड़ने के फायदे

शरीर की मरम्मत

पर्यावरण और जीवनशैली से जुड़े कारक जेनेटिक्स को भी प्रभावित करते हैं. हमारे भोजन में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स और अन्य पोषक तत्व शरीर में क्षतिग्रस्त डीएनए की मरम्मत में मदद करते हैं. शाकाहारी भोजन के सेवन से प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को भी कम किया जा सकता है.

मांस छोड़ने के फायदे

डायबिटीज का खतरा

जीवों से मिलने वाला प्रोटीन, खासकर रेड मीट या प्रोसेस्ड मीट, टाइप 2 डायबिटीज के खतरे को बढ़ाता है. पशुओं की चर्बी, आयरन और अक्सर इसतेमाल होने वाले प्रेजर्वेटिव अग्नाशय की कोशिकाओं को बर्बाद करते हैं. वजन बढ़ाते हैं और इंसुलिन की कार्य क्षमता में दखल देते हैं.

मांस छोड़ने के फायदे

पर्याप्त प्रोटीन

भोजन में बाहरी प्रोटीन से ना तो शरीर ताकतवर बनता है ना ही पतला. फालतू प्रोटीन या तो वसा बन जाता है या फिर मल बनकर निकल जाता है. पशुओं से मिलने वाला प्रोटीन वजन बढ़ने का मुख्य कारण है. डायबिटीज, कैंसर और जलन के खतरे साथ में.

मांस छोड़ने के फायदे

वजन घटाइए

एकैडमी ऑफ न्यूट्रिशन एंड डायटीटिक्स पत्रिका में छपी रिपोर्ट दिखाती है कि अगर कोई व्यक्ति सब्जियां, फल, अनाज और दालें खाता है तो उसके लिए वजन घटाना मांसाहारी भोजन खाने वाले व्यक्ति के मुकाबले कहीं आसान होता है.

मांस छोड़ने के फायदे

दमकती त्वचा

न्यूट्रिशन विशेषज्ञ सूजन टकर के मुताबिक शाकाहारी भोजन में फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट्स की पर्याप्त मात्रा के कारण शरीर को खुद की सफाई का अवसर मिलता है और त्वचा में निखार आता है. शाकाहारी भोजन से त्वचा संबंधी समस्याओं से निपटने में आसानी होती है.

त्वचा के कैंसर की प्रथम स्टेज में यह एंजाइम बहुत ज्यादा जाहिर नहीं होता. द्वितीय स्टेज में त्वचा में फैलता है. और तीसरी स्टेज में इसका समान वितरण होता है. इस अवस्था तक कैंसर शरीर के और हिस्सों तक फैलना शुरू हो जाता है. कैंसर का जितना जल्दी पता चल जाए इलाज और जीवन की संभावना उतनी ज्यादा रहती है.

अमेरिकी कैंसर सोसाइटी के मुताबिक अगर मेलानोमा का प्रथम स्टेज में पता चल जाए तो 95 फीसदी मरीजों की 10 साल जीवित रहने की संभावना रहती है. केले के छिलके पर पड़ने वाले धब्बे लगभग उतने ही बड़े होते हैं जितने मेलानोमा के धब्बे इंसानी त्वचा पर होते हैं. टीम ने स्कैनर की जांच पहले केले के छिलके पर ही की.

कैंसर के 10 लक्षण

पाचन में दिक्कत

एंडरसन कैंसर सेंटर के डॉक्टर बारथोलोम्यू बेवर्स के मुताबिक अगर आपको खाना पचाने में दिक्कत हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से मिलें.

कैंसर के 10 लक्षण

कफ या गले में खिचखिच

अगर गले में खराश बनी रहती है और खांसने में खून भी आ जाता है, तो ध्यान दें. जरूरी नहीं कि यह कैंसर ही हो, लेकिन सावधानी बरतना जरूरी है. खासकर अगर कफ ज्यादा दिन तक बना रहे.

कैंसर के 10 लक्षण

मूत्र में रक्त

डॉक्टर बेवर्स के मुताबिक, "अगर मूत्र में रक्त आता है तो ब्लाडर या किडनी का कैंसर हो सकता है. लेकिन यह इंफेक्शन भी हो सकता है."

कैंसर के 10 लक्षण

दर्द बरकरार

डॉक्टर बेवर्स बताते हैं, "हर तरह का दर्द कैंसर की निशानी नहीं, लेकिन अगर दर्द बना रहे, तो वह कैंसर भी हो सकता है." जैसे कि सिर में दर्द बने रहने का मतलब यह नहीं कि आपको ब्रेन कैंसर ही है, लेकिन डॉक्टर से मिलना जरूरी है. पेट में दर्द अंडाशय का कैंसर हो सकता है.

कैंसर के 10 लक्षण

तिल या कुछ और

तिल जैसा दिखने वाला हर निशान तिल नहीं होता. ऐसे किसी भी निशान के त्वचा पर उभरने पर डॉक्टर को जरूर दिखाएं. यह स्किन कैंसर की शुरुआत हो सकता है.

कैंसर के 10 लक्षण

अगर घाव ना भरे

अगर कोई घाव तीन हफ्ते के बाद भी नहीं भरता है तो डॉक्टर को दिखाना बेहद जरूरी है.

कैंसर के 10 लक्षण

महिलाओं में

अगर मासिक चक्र के बाहर भी रक्त स्राव नहीं रुकता है तो महिलाओं को ध्यान देने की जरूरत है. यह सरवाइकल कैंसर की शुरुआत हो सकता है.

कैंसर के 10 लक्षण

वजन घटना

डॉक्टर बेवर्स के मुताबिक, "वयस्कों का वजन आसानी से नहीं घटता." लेकिन अगर आप बिना किसी कोशिश के दुबले होते जा रहे हैं तो जरूर ध्यान देने की बात है. यह कैंसर का संकेत हो सकता है.

कैंसर के 10 लक्षण

गांठों का होना

कभी भी कहीं भी अगर गांठ महसूस हो तो उसपर ध्यान दें. हालांकि हर गांठ खतरनाक नहीं होती. स्तन में गांठ होना स्तन कैंसर की तरफ इशारा करता है, इसे डॉक्टर को जरूर दिखाएं.

कैंसर के 10 लक्षण

निगलने में तकलीफ

गले में कैंसर का एक बहुत अहम संकेत यह भी है. गले में तकलीफ होने पर लोग आमतौर पर नर्म खाना खाने की कोशिश करते हैं, लेकिन डॉक्टर के पास नहीं जाते, जो कि सही नहीं है.

टीम प्रमुख हूबर्ट गिरॉल्ट के मुताबिक, "फल की मदद से हम इंसानी त्वचा पर इस्तेमाल करने से पहले जांच के तरीके के विकसित करने और टेस्ट करने में कामयाब रहे." टीम का मानना है कि हो सकता है कि आगे चल कर इस तकनीक के विकास के साथ बायोप्सी की जांच और कीमोथेरेपी जैसे तकलीफदेह तरीकों से पीछा छुड़ाया जा सके. गिरॉवल्ट को लगता है एक दिन स्कैनर कैंसर को नष्ट करने में भी मदद कर सकेगा. उनकी यह रिसर्च जर्मन साइंस पत्रिका अनगेवांटे शेमी में प्रकाशित हुई.

एसएफ/आईबी (एएफपी)

ईयू के टेढ़े मेढ़े कानून

मुड़े केले का कानून

केला कानून के मुताबिक, यूरोपीय संघ में आयात किए जाने वाले केले या उगाए जाने वाले केले कम से कम 14 सेंटीमीटर लंबे और 2.7 सेंटीमीटर मोटे होने चाहिए. फल कटा पिटा नहीं होना चाहिए और पूरा पका भी नहीं.

ईयू के टेढ़े मेढ़े कानून

बिजली वाला शहद?

शायद कभी किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि शहद सुचालक होता है, यानी इससे करंट पार हो सकता है. लेकिन ईयू ने सोचा कहीं ब्रेकफास्ट के दौरान किसी को करंट न लग जाए. इसलिए तय कर दिया गया कि शहद की सुचालकता 0.8 माइक्रोसीमन्स प्रति सेंटीमीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.

ईयू के टेढ़े मेढ़े कानून

हरी लाइट

ऊर्जा बचाने के लिए यूरोपीय संघ में पारंपरिक गोल बल्बों पर प्रतिबंध लगा दिया गया. लेकिन एलईडी लाइट जैसे दूसरे बल्बों को भी यूं ही कहीं नहीं फेंका जा सकता, क्योंकि उनमें जहरीला पारा होता है. मुश्किल भले ही हो पर कम से कम ये नए बल्ब पुराने वालों की तरह रोशनी तो देते हैं.

ईयू के टेढ़े मेढ़े कानून

रोपवे कानून

जर्मनी का उत्तरी हिस्सा समंदर और रेत के लिए मशहूर है. ना तो यहां कोई पहाड़ हैं और इसीलिए ना ही कोई केबल कार. यहां सबसे ज्यादा ऊंचाई भी सिर्फ 168 मीटर ही है. पर फिर भी यहां यूरोपीय संघ का रोपवे कानून लागू होता है. कारण? शायद कभी कोई यहां रोपवे बनाना चाहे, तो उसे बनाने के नियम तो होना ही चाहिए ना.

ईयू के टेढ़े मेढ़े कानून

कचरा कहां जाए

प्लास्टिक पीले डब्बे में, पेपर नीले में, रिसाइकल नहीं किए जा सकने वाला कचरा भूरे डब्बे में. कम से कम जर्मनी में तो यही कानून है. लेकिन यूरोपीय संघ के दूसरे देशों में ये डब्बे दूसरे रंग के हैं, नीले की बजाए हरा, पीले की बजाए लाल. कहीं तो सारा कचरा एक साथ जाता है. इसके लिए भी कानून बनाना गलत नहीं होगा.

ईयू के टेढ़े मेढ़े कानून

सबके लिए एक पिन

यूरोपीय संघ के अलग अलग देशों में अलग अलग प्लग अडाप्टर चाहिए. क्योंकि ब्रिटेन, माल्टा, आयरलैंड और साइप्रस जैसे कई ईयू देश हैं जहां यूरोप्लग जाता ही नहीं. यहां मानक की जरूरत है ताकि एक ही प्लग सब जगह चल सके. अब ईयू हर कंपनी के मोबाइल फोन चार्जर एक जैसे बनाने पर कानून बनाने जा रहा है.

ईयू के टेढ़े मेढ़े कानून

अलग अलग आम्पेलमेंशन

रोम, पैरिस, लंदन, वॉरसा, जागरेब, स्टॉकहोम या बर्लिन सभी जगह ट्रैफिक लाइट पर दिखाई जाने वाली आकृति बिलकुल अलग अलग हैं. जर्मनी के एकीकरण के बाद 1990 में पूर्वी हिस्से का ये आम्पेलमेंशन लुप्त होने की कगार पर था. इसके लिए ईयू में कोई नियम नहीं है.

ईयू के टेढ़े मेढ़े कानून

इतिहास के साथ

हर देश के पोस्ट बॉक्स भी अलग अलग हैं. यूरोपीय संघ में इनके लिए कोई नियम नहीं है. इसलिए हर देश का सांस्कृतिक इतिहास पोस्ट बॉक्स में दिखाई देता है.

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