क्या मानव तस्करी के खिलाफ कानून पास होगा?

मानव तस्करी के चंगुल से छूट कर आए पीड़ितों ने सांसदों से आग्रह किया है कि तस्करी रोकने के लिए प्रस्तावित कानून को समर्थन दें. विपक्ष का कहना है कि यह कानून देह व्यापार का काम करने वाले वयस्कों को निशाना बनाएगा.

संसद का सत्र इसी हफ्ते शुरू होना है. कांग्रेस नेता शशि थरूर का कहना है कि मानव तस्करी के खिलाफ कानून को संसद में पेश करने से पहले अभी और चर्चा की जरूरत है. उन्होंने महिला और बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी के भेजी गई एक याचिका के जरिए अपनी चिंता जताई है. इस याचिका पर हजारों यौनकर्मियों के दस्तखत है इसके साथ ही कई सामाजिक कार्यकर्ता और 30 से ज्यादा सामाजिक संगठनों ने भी इस याचिका पर दस्तखत किए हैं.

उधर मानव तस्करी के शिकार लोगों ने इस चाचिका को खारिज किया है. उनका कहना है कि प्रस्तावित कानून में पीड़ितों पर ध्यान दिया गया है और यह कानून यौनकर्मियों के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होगा बशर्ते कि वो दूसरों पर इस पेशे में आने के लिए दबाव ना बनाएं.

कानून की मांग कर रहे लोगों का कहना है कि कई सालों तक चर्चा करने के बाद यह कानून तैयार हुआ है. किशोरावस्था में ही तस्करी का शिकार बनी एक 23 साल की युवती ने कहा, "हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह इस कानून को पास करने से ना रोके. हमारी जिंदगी इस पर निर्भर है और हमें उन वयस्क यौनकर्मियों की मांग पर बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए."

सरकार ने दो साल पहले इस कानून का पहला ड्राफ्ट जारी किया था इसके साथ ही विशेषज्ञों से बातचीत और सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हुई लोगों से उनकी राय मांगी गई. अब दो साल के बाद शशि थरूर ने याचिका पेश की है. इस बिल पर मार्च में ही चर्चा होनी थी लेकिन इसे पेश नहीं किया गया. इससे आशंका उठ रही है कि इसमें अभी और देर होगी क्योंकि सरकार का ध्यान अब 2019 के आम चुनावों की ओर मुड़ने लगा है.

भारत में कहां कहां हैं मानव तस्करी के गढ़

पश्चिम बंगाल

2016 में मानव तस्करी के सबसे ज्यादा मामले पश्चिम बंगाल में दर्ज हुए. देश भर में एक साल में कुल 8,132 शिकायतों में से 3,576 केवल इसी राज्य से आईं.

भारत में कहां कहां हैं मानव तस्करी के गढ़

राजस्थान

मानव तस्करी के कुल मामलों में से 60 फीसदी से ज्यादा मामले केवल पश्चिम बंगाल और राजस्थान से मिले. राजस्थान से 1,422 शिकायतें आयीं.

भारत में कहां कहां हैं मानव तस्करी के गढ़

गुजरात और महाराष्ट्र

राजस्थान के बाद 548 मामलों के साथ गुजरात का नंबर आता है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 517 मामलों के साथ महाराष्ट्र में भी ऐसा ही हाल रहा.

भारत में कहां कहां हैं मानव तस्करी के गढ़

केंद्र शासित प्रदेश

केंद्र शासित (यूटी) प्रदेशों में दिल्ली मानव तस्करी की शियाकतों के मामले में सबसे ऊपर है. यूटी के कुल 75 मामलों में से 66 केवल दिल्ली में थे. हालांकि पिछले साल ये आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा 87 था.

भारत में कहां कहां हैं मानव तस्करी के गढ़

तमिलनाडु और कर्नाटक

दक्षिण भारतीय राज्यों में सबसे बुरा हाल तमिलनाडु का रहा. वहां 2016 में मानव तस्करी के 434 मामले दर्ज हुए. इसके बाद कर्नाटक में 404 मामले सामने आए.

भारत में कहां कहां हैं मानव तस्करी के गढ़

आंध्र प्रदेश और तेलांगना

आंध्र प्रदेश में 239 और तेलांगना में 229 मामलों के साथ हालात एक से रहे. केरल में मात्र 21 शिकायतें दर्ज हुईं.

भारत में कहां कहां हैं मानव तस्करी के गढ़

असम

पूर्वोत्तर के राज्यों में 91 मामलों के साथ असम का हाल सबसे खराब रहा. फिर भी 2014 के मुकाबले हालात बहुत बेहतर हुए हैं जब राज्य में 380 ऐसे मामले दर्ज किए गए थे.

भारत में कहां कहां हैं मानव तस्करी के गढ़

एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग स्क्वॉड

पूर्वोत्तर के कई राज्यों में सरकारों ने मानव तस्करी को रोकने के लिए खास दस्ते बनाए हैं. ऐसे 10 दस्ते असम में, 8 अरुणाचल में और 5 मणिपुर में हैं.

भारत में कहां कहां हैं मानव तस्करी के गढ़

पूर्वी राज्य

झारखंड में 109, पड़ोसी राज्य ओडीशा में 84 और बिहार में 43 मानव तस्करी के मामले सामने आए. उत्तर प्रदेश में 79 और मध्य प्रदेश में 51 मामले दर्ज हुए.

भारत में कहां कहां हैं मानव तस्करी के गढ़

अंतरराष्ट्रीय सहयोग

भारत सरकार ने बांग्लादेश और संयुक्त अरब अमीरात के साथ भी सहयोग के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं. आरपी/एके (पीटीआई)

थरूर की याचिका में कहा गया है कि यह बिल मानव तस्करी के पीड़ितों की कतार में ही सेक्स बाजार के उन वयस्कों को भी रखता है जो अपनी मर्जी से इस काम में जुटे हैं. थरूर को आशंका है कि कानून बन गया तो ऐसे लोगों को जबरन उनके काम से छुड़ाया जाएगा. मानव तस्करी के खिलाफ अभियान चलाने वाली सुनीता कृष्णन का कहना है कि ऐसी चिंताएं भ्रामक हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में उन्होंने कहा, "उनकी आशंकाएं वयस्क यौनकर्मियों के रोजगार को लेकर है कि उस पर असर होगा. अगर वो लोग वेश्यालय चला रहे हैं और उसमें तस्करी के पीड़ित हैं तो, उन पर असर होगा लेकिन अगर ऐसा नहीं है तो फिर उन्हें क्यों नुकसान होगा."

याचिका में यह मांग भी रखी गई है कि प्रस्तावित कानून में ज्यादा जांच और तस्करों पर अभियोग चलाने के प्रावधान होने चाहिए. कानून का समर्थन करने वाले ध्यान दिलाते हैं कि तस्करों को 10 साल या फिर उम्र कैद की सजा हो सकती है. इसके साथ ही छापे के दौरान वेश्यालयों में पकड़ी जाने वाली औरतों और लड़कियों को जेल में डालने से रोकने का भी प्रावधान किया गया है.

यह बिल सुप्रीम कोर्ट में दायर कृष्णन की याचिका का ही परिणाम है, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था. कृष्णन ने बताया "यह पहली बार है कि भारत ने माव तस्करी को संगठित अपराध माना है. इसके साथ ही इसमें स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर लड़ने के लिेए एक बजट का भी प्रावधान किया गया है."

एनआर/ओएसजे(रॉयटर्स)

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