क्या होता है ग्लोबल टेररिस्ट घोषित होने का मतलब?

पाकिस्तान के मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट यानी वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया गया है. देखिए क्या होता है ग्लोबल टेररिस्ट?

पाकिस्तान के 'जैश ए मोहम्मद' गुट के प्रमुख मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र ने 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी' घोषित कर दिया. भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है. चार बार अड़ंगा लगाने के बाद, आखिरकार चीन ने यूएन सुरक्षा परिषद में अपनी आपत्ति वापस ले ली. भारत इससे पहले भी यूएन सुरक्षा परिषद में चार बार कोशिश कर चुका था. लेकिन वो पास नहीं हो सका. इससे पहले भारत 2009, 2016 और 2017 में भी ऐसे प्रस्ताव ला चुका है. जैश ए मोहम्मद ने ली थी भारत के पुलवामा में हमले की जिम्मेदारी. पुलवामा हमले में 40 भारतीय सैनिकों की जान चली गई थी.

कौन है मसूद अजहर?

मसूद अजहर, जैश-ए-मोहम्मद नाम के आतंकी संगठन का मुखिया है. वो खुद को धार्मिक गुरु और मौलाना बताता है. मसूद पाकिस्तान के बहावलपुर का रहने वाला है. वो एक अमीर परिवार से ताल्लुक रखता है. उसके पिता सरकारी स्कूल में प्रधानाध्यापक थे. उसने कराची के जामिया उलूम-ए-इस्लामी से तालीम ली. पढ़ाई पूरी करने के बाद वो इसी यूनिवर्सिटी में पढ़ाने लगा. उसने कुछ किताबें भी लिखीं और एक धार्मिक मैग्जीन का संपादक भी रहा.

आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित 10 देश

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10.

फिलीपींस

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9.

मिस्र

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8.

यमन

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7.

भारत

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6.

सोमालिया

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5.

पाकिस्तान

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4.

सीरिया

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3.

नाइजीरिया

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2.

अफगानिस्तान

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1.

इराक

इसके बाद वो कट्टरपंथ के रास्ते पर बढ़ गया. वो अल कायदा और तालिबान के संपर्क में आ गया. उसने आंतकवाद प्रभावित कई अफ्रीकी देशों की भी यात्रा की. वह कई बार सोमालिया भी गया. बताया जाता है कि मसूद ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में अपने ट्रेनिंग कैंप शुरू किए जिनमें जिहादियों को ट्रेनिंग दी जाती है. पाकिस्तान के बहावलपुर और दूसरी कई जगहों पर उसके मदरसे भी चलते हैं. 1994 में अजहर श्रीनगर आया. वहां पुलिस ने उसे आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में जेल में बंद कर दिया.

अजहर को जेल से छुड़वाने के लिए बहुत सी कोशिशें हुईं. 1995 में छह विदेशी पर्यटकों का अपहरण कर लिया गया और अजहर की रिहाई की मांग भारत सरकार से की गई. ऐसा न करने पर पांच पर्यटकों को मार दिया और एक पर्यटक आतंकियों के कब्जे से भाग निकला. 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट आईसी 814 को हाइजैक कर लिया गया. इसमें 155 यात्री सवार थे. इसके बदले अजहर मसूद को रिहा करवा लिया गया.

रिहा होने के बाद से ही अजहर लगातार भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों में सक्रिय रहने लगा. मुंबई हमले से लेकर पुलवामा हमले तक में मसूद अजहर का नाम मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर आता है.

क्यों दुर्दांत माना जाता है हक्कानी नेटवर्क

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सोवियत अफगान युद्ध का अवशेष

हक्कानी नेटवर्क का गठन जलालुद्दीन हक्कानी ने किया था जिसने अफगानिस्तान में 1980 के दशक में सोवियत फौजों से जंग लड़ी थी. उस समय मुजाहिदीन को अमेरिका का समर्थन हासिल था. 1995 में हक्कानी नेटवर्क तालिबान के साथ मिल गया और दोनों गुटों ने अफगान राजधानी काबुल पर 1996 में कब्जा कर लिया. 2012 में अमेरिका ने इस गुट को आतंकवादी संगठन घोषित किया.

Madrassa Jamia (AP)

क्यों दुर्दांत माना जाता है हक्कानी नेटवर्क

इस्लामी विचारक

1939 में अफगान प्रांत पकतिया में जलालुद्दीन हक्कानी का जन्म हुआ. उसने दारुल उलूम हक्कानिया से पढ़ाई की. इसे पाकिस्तान के बड़े धार्मिक नेता मौलाना समी उल हक के पिता ने 1947 में शुरू किया था. दारुल उलूम हक्कानिया तालिबान और दूसरे चरमपंथी गुटों के साथ अपने संबंधों के लिए जाना जाता है.

क्यों दुर्दांत माना जाता है हक्कानी नेटवर्क

तालिबान मंत्री बने जलालुद्दीन हक्कानी

तालिबान के शासन में जलालुद्दीन हक्कानी को अफगान कबायली मामलों का मंत्री बनाया गया. 2001 में अमेरिका के हमलों के बाद तालिबान का शासन खत्म होने तक वह इस पद पर था. तालिबान नेता मुल्ला उमर के बाद जलालुद्दीन को अफगानिस्तान में सबसे प्रभावशाली चरमपंथी माना जाता था. जलालुद्दीन के अल कायदा के नेता ओसामा बिन लादेन से भी गहरे संबंध थे.

क्यों दुर्दांत माना जाता है हक्कानी नेटवर्क

हक्कानी नेटवर्क कहां है

रक्षा मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि इस गुट का कमांड सेंटर अफगान सीमा से लगते पाकिस्तान के उत्तरी वजीरिस्तान के मीरनशाह शहर में है. अमेरिकी और अफगान अधिकारियों का दावा है कि हक्कानी नेटवर्क को पाकिस्तान की सेना का समर्थन है हालांकि पाकिस्तानी अधिकारी इससे इनकार करते हैं. अमेरिका का कहना है कि इस गुट के लड़ाकों ने अफगानिस्तान में विदेशी सेना, स्थानीय फौज और नागरिकों पर हमले किये हैं.

क्यों दुर्दांत माना जाता है हक्कानी नेटवर्क

हक्कानी विरासत

माना जाता है कि 2015 में जलालुद्दीन हक्कानी की मौत हो गयी लेकिन इस गुट ने पहले इस तरह की खबरों को खारिज किया. नेटवर्क का नेतृत्व अब जलालुद्दीन के बेटे सिराजुद्दीन हक्कानी के हाथ में है. सिराजुद्दीन तालिबान का भी उप प्रमुख है.

Superteaser NO FLASH Pakistan Terror Jalaluddin Hakkani (picture-alliance/dpa)

क्यों दुर्दांत माना जाता है हक्कानी नेटवर्क

सिराजुद्दीन हक्कानी कौन है?

इस बारे में बहुत पुख्ता जानकारी तो नहीं लेकिन जानकारों का कहना है कि उसने अपना बचपन पाकिस्तान के मीरनशाह में बिताया है. पेशावर के उपनगर में मौजूद दारुल उलूम हक्कानिया में पढ़ाई की है. सिराजुद्दीन को सैन्य मामलों का जानकार माना जाता है. कुछ विश्लेषकों का कहना है कि सिराजुद्दीन वैचारिक रूप से अपने पिता की तुलना में ज्यादा कट्टर हैं.

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अनास हक्कानी को मौत की सजा

अनास हक्कानी जलालुद्दीन हक्कानी का बेटा है. उसकी मां संयुक्त अरब अमीरात से है. अनास फिलहाल अफगान सरकार की गिरफ्त में है और उसे मौत की सजा सुनायी गयी है. हक्कानी नेटवर्क ने अनास को फांसी की सजा होने पर अफगानिस्तान को कड़े नतीजे भुगतने की चेतावनी दी है.

क्यों दुर्दांत माना जाता है हक्कानी नेटवर्क

कितना बड़ा है हक्कानी नेटवर्क

अफगान मामलों के जानकार और रिसर्च संस्थानों का कहना है कि इस गुट के साथ तीन से पांच हजार लड़ाके हैं. नेटवर्क को मुख्य रूप से खाड़ी के देशों से धन मिलता है. हक्कानी नेटवर्क अपहरण और जबरन वसूली के जरिये भी अपने अभियानों के लिए धन जुटाता है.

क्यों दुर्दांत माना जाता है हक्कानी नेटवर्क

आतंकवादी गुटों से संबंध

हक्कानियों का क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय चरमपंथी संगठनों जैसे कि अल कायदा, तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान, लश्कर ए तैयबा और मध्य एशियाई इस्लामी गुटों से अच्छा संबंध है. जलालुद्दीन हक्कानी ना सिर्फ बिन लादेन बल्कि अल कायदा के वर्तमान प्रमुख अयमान अल जवाहिरी के भी काफी करीब थे.

क्या है वैश्विक आतंकी घोषित होना?

किसी भी व्यक्ति को वैश्विक आतंकी घोषित करने का फैसला यूएन सुरक्षा परिषद करती है. इसमें अमेरिका, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस स्थाई सदस्य हैं और दस अस्थाई सदस्य होते हैं. किसी को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए सभी स्थाई सदस्यों की सहमति जरूरी होती है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समिति प्रस्ताव 1267, जिसे आइएसआइएल (दाएश) और अलकायदा अनुमोदन सूची भी कहा जाता है, में उस व्यक्ति का नाम दर्ज करना होता है.

इस सूची में नाम आने के बाद वह व्यक्ति वैश्विक आतंकी घोषित हो जाता है. इसमें तीन कार्रवाई प्रमुख हैं.

संपत्ति जब्त- ऐसे व्यक्ति की संपत्ति जिस देश में होगी उसी देश द्वारा तुरंत जब्त की जाएगी. साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वैश्विक आतंकी घोषित किए गए व्यक्ति को किसी तरह की वित्तीय मदद कहीं से न मिल रही हो.

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दुनिया | 03.11.2017

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यात्रा करने पर प्रतिबंध- सभी देश ऐसे व्यक्ति का अपनी सीमाओं में प्रवेश रोकेंगे. वो जिस देश में होगा वहां उसे किसी तरह की यात्रा नहीं करने दी जाएगी.

हथियारों का प्रतिबंध- सभी देश ऐसे व्यक्ति को किसी भी तरह के हथियार मुहैया करवाए जाने पर प्रतिबंध लगाएंगे. सभी हथियारों की आपूर्ति और खरीद-फरोख्त रोकी जाएगी. इसमें छोटे हथियारों से एयरक्राफ्ट तक शामिल हैं. हथियार बनाने में काम आने वाले सामान और तकनीकी सहायता देना भी प्रतिबंधित होता है.

कैसे आता है प्रस्ताव?

सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों में से कोई देश इसका प्रस्ताव लाता है. बाकी सदस्य देश इस पर अपना मत रखते हैं. स्थाई सदस्यों के पास वीटो पावर होता है. मतलब ऐसे प्रस्ताव पर पांचों स्थाई सदस्यों का सहमत होना जरूरी है. अगर ऐसा नहीं हुआ तो प्रस्ताव पास नहीं होता. प्रस्ताव आने के बाद 10 कार्य दिवसों तक इस पर आपत्तियां मांगी जाती हैं. अगर कोई स्थाई सदस्य आपत्ति दर्ज नहीं करवाता तो प्रस्ताव पास हो जाता है. 27 फरवरी को फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने का प्रस्ताव रखा. 13 मार्च को इसके 10 कार्य दिवस पूरे हो रहे थे. लेकिन चीन ने वीटो कर दिया और यह प्रस्ताव कम से कम छह महीने के लिए रुक गया. यह आपत्ति तीन महीने और बढ़ाई जा सकती है. इसके बाद फिर से प्रस्ताव लाया जा सकता है.

क्या जरूरी है कि ऐसा होगा?

आदर्श परिस्थितियों के मुताबिक तो ऐसा होना जरूरी है लेकिन कई दफा ऐसा नहीं होता है. जैसे दाउद इब्राहिम और हाफिज सईद दोनों को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया हुआ है. फिर भी हाफिज सईद और दाउद इब्राहिम दोनों पाकिस्तान में हैं. दाउद इब्राहिम के कई बार विदेश जाने की भी खबरें आती रहती हैं. यह उस देश पर निर्भर करता है कि वह इन प्रतिबंधों को किस तरह मानता है.

जर्मनी पर आतंक के साए

अप्रैल, 2017

जर्मन फुटबॉल क्लब बोरुसिया डॉर्टमुंड के खिलाड़ियों की बस के करीब तीन धमाके हुए. उस वक्त टीम 11 अप्रैल को चैंपियंस लीग का क्वार्टरफाइनल मुकाबला खेलने जा रही थी. इस घटना में एक खिलाड़ी घायल हुआ है. पुलिस अभी इसे आतंकी घटना नहीं मान रही है. जांच जारी है.

जर्मनी पर आतंक के साए

दिसंबर, 2016

बर्लिन के एक क्रिसमस बाजार में जर्मनी का सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ जिसमें 12 लोग मारे गए थे. हमले के पीछे एक ट्यूनीशियाई युवक था जिसकी शरण की अर्जी ठुकरा दी गई थी. बाद में वह मिलान में पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया.

जर्मनी पर आतंक के साए

लाइपजिग अक्टूबर 2016

पुलिस ने लाइपजिग में 22 साल के एक सीरियाई शरणार्थी को गिरफ्तार किया. केमनित्स में उसके अपार्टमेंट से विस्फोटक और बम बनाने की सामग्री मिली थी. वह बर्लिन एयरपोर्ट पर हमले की संदिग्ध योजना बना रहा था. दो दिन बाद उसने खुद को जेल में फांसी लगा ली.

जर्मनी पर आतंक के साए

अंसबाख, जुलाई 2016

जुलाई में इस्लामिक स्टेट ने शरणार्थियों द्वारा किए गए दो हमलों की जिम्मेदारी ली. बवेरियन शहर अंसबाख में एक वाइन बार में हुए धमाके में 15 लोग घायल हुए. हमलावर ने खुद को भी मार दिया.

जर्मनी पर आतंक के साए

वुर्त्सबुर्ग, जुलाई 2016

17 साल का एक शरणार्थी कुल्हाड़ी और चाकू लेकर एक ट्रेन में चढ़ गया और उसने हांगकांग के एक सैलानी परिवार के चार सदस्यों और एक अन्य व्यक्ति को घायल कर दिया. पुलिस की गोली से हमलावर मारा गया. पुलिस के मुताबिक हमलावर आईएस से प्रेरित था.

जर्मनी पर आतंक के साए

डुसेलडॉर्फ, मई 2016

तीन जर्मन राज्यों नॉर्थ राइन वेस्टफेलिया, ब्रांडेनबुर्ग और बाडेन वुर्टेमबर्ग में आईएस के तीन संदिग्ध सदस्य गिरफ्तार किए गए. अधिकारियों का कहना है कि इनमें से दो की योजना नॉर्थ राइन वेस्टफेलिया की राजधानी डुसलडॉर्फ के व्यस्त इलाके में खुद को उड़ाने की थी.

जर्मनी पर आतंक के साए

एसेन, अप्रैल 2016

पुलिस ने एसेन में एक सिख गुरुद्वारे पर हुए धमाके के सिलसिले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया. धमाका एक शादी के दौरान हुआ जिससे इमारत की खिड़कियां और दीवारों को नुकसान हुआ.

जर्मनी पर आतंक के साए

हनोवर फरवरी 2016

जर्मन-मोरक्कन साफिया एस पर उत्तरी शहर हनोवर में एक पुलिस अधिकारी को चाकू घोंपने के आरोप तय किए गए. 16 वर्ष की इस लड़की पर आईएस से प्रेरित होने का संदेह है.

जर्मनी पर आतंक के साए

बर्लिन, फरवरी 2016

पुलिस ने बर्लिन में आतंकवादी हमले की योजना बनाने के संदिग्ध तीन अल्जीरियाई लोगों को गिरफ्तार किया जो आईएस से जुड़े थे. बर्लिन के अभियोजकों का कहना है कि उन्हें जर्मन राजधानी को निशाना बनाए जाने की "पुख्ता" योजना का पता चला था.

जर्मनी पर आतंक के साए

ओबरउर्सेल, अप्रैल 2015

पुलिस को एक बाइक रेस उस वक्त रद्द करानी पड़ी जब पता चला कि इसे आतंकवादी हमले के जरिए निशाना बनाया जा सकता है. इस सिलसिले में एक तुर्क मूल के जर्मन और उसकी 34 वर्षीय पत्नी को गिरफ्तार किया गया. पुलिस को उनके घर से विस्फोटक मिले.

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