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खेल अदालतों के न्याय पर सवाल

११ जनवरी २०१३

दुनिया भर में डोपिंग को रोकने के प्रयास चल रहे हैं. इसमें खेल अदालतों की महत्वपूर्ण भूमिका है. लेकिन खिलाड़ियों के वकील इन अदालतों की कानूनी हैसियत पर सवाल उठा रहे हैं. ताजा मुकदमा स्पीड स्केटर क्लाउडिया पेषश्टाइन का है.

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तस्वीर: AP

थोमस जुमरर ऐसे ही वकील हैं, जिन्होंने जर्मन एथलीट कातरीन क्राबे का सफल प्रतिनिधित्व किया है और अब क्लाउडिया पेषश्टाइन को लाखों का मुआवजा दिलाना चाहते हैं. पेषश्टाइन पर डोपिंग के आरोप में प्रतिबंध लगाना खेल अदालतों के लिए महंगा साबित हो सकता है. थोमस जुमरर उनके लिए म्यूनिख की अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं.

वह खिलाड़ियों के मामले को जबरन खेल अदालतों की परिधि में रखने और जबरन उसे सरकारी अदालतों से बाहर रखने के साथ सर्वोच्च खेल अदालत सीएएस के जरिए न्याय देने की प्रक्रिया पर भी संदेह व्यक्त करते हैं. जर्मन फुटबॉल लीग में कानूनी विभाग के प्रमुख रह चुके थोमस जुमरर कहते हैं, "बस अभी तक किसी एथलीट ने इसे गिराने की हिम्मत नहीं दिखाई है."

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पदकों के साथतस्वीर: picture-alliance / dpa

जुमरर ने अदालत में मुकदमा कर अंतरराष्ट्रीय स्केटिंग यूनियन और जर्मन स्पीड स्केटिंग सोसाइटी पर बिना पर्याप्त आधार के पेषश्टाइन पर हड़बड़ी में रोक लगाने का आरोप लगाया है जिसका ओलंपिक विजेता पर व्यापक असर हुआ. वे इन संगठनों से लाखों यूरो के मुआवजे की मांग कर रहे हैं जैसा कि उन्होंने कातरीन क्राबे को अंतरराष्ट्रीय लाइट एथेलेटिक फेडरेशन से दिलवाया था.

पेषश्टाइन का मामला लंबा खिंचने की आशंका है. उसकी वजह सिर्फ 150 पन्नों वाला आरोपपत्र ही नहीं है. जुमरर कहते हैं, "इस मामले में हमने खेल जगत में न्याय और सुलह की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं." उनका कहना है कि बहुत से खेल संगठन अभी तक यह मानने को तैयार नहीं हैं कि उन्हें खिलाड़ियों की गलती साबित करनी होगी. "यदि आपको कारणों का पता नहीं है तो आप यह नहीं कह सकते कि खिलाड़ियों को बेगुनाही का सबूत देना होगा."

इस मुकदमे के इस साल के मध्य तक शुरू होने की संभावना है. सैद्धांतिक रूप से पेषश्टाइन और उनके वकील के सामने न्याय पाने के सारे दरवाजे खुले हैं. वे इस मामले पर निचली अदालत से लेकर संघीय अदालत तक जा सकते हैं.

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डोपिंग का शकतस्वीर: AP

क्लाउडिया पेषश्टाइन पर रेटिकुलोसाइट्स की बढ़ी हुई मात्रा के कारण डोपिंग के आरोप में 2009 में दो साल का प्रतिबंध लगा दिया था. उन्होंने खेल अदालतों में हर स्तर पर अपील की लेकिन हर जगह उन्हें विफलता का मुंह देखना पड़ा. वकील जुमरर का कहना है कि इस बीच यह संदेह से परे है कि खून में पैदाइशी विसंगति बढ़ी हुई मात्रा का कारण था.

एथलीट कातरीन क्राबे के खून में क्लेनबुटेरोल पाया गया था, जो उस समय तक प्रतिबंधित नहीं था. जर्मन लाइट एथलेटिक संघ ने उन पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक फेडरेशन का दो साल का प्रतिबंध लागू हो गया. क्राबे ने इन संगठनों के खिलाफ मुकदमा जीत लिया था. जुमरर का कहना है कि क्राबे को एक अप्रत्यक्ष संकेत की वजह से सजा दी गई थी, बिना इस ठोस जानकारी के कि यह डोपिंग था. इसलिए प्रतिबंध हड़बड़ी में, बिना सोचे विचारे और लापरवाही में उठाया गया कदम था. उनका आरोप है कि सीएएस ने मामले की तह में जाने की कोशिश नहीं की जो सरकारी अदालतें करती.

जुमरर ने कहा है कि म्यूनिख की अदालत में मुकदमा दायर करने से पहले अंतरराष्ट्रीय स्केटिंग यूनियन आईएसयू और जर्मन स्केटिंग सोसाइटी को भी पत्र लिखा गया था, लेकिन उन्होंने जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया. वह कहते हैं, "आईएसयू के लिए अच्छा होता कि वह अपनी गलती मान लेता." मुकदमा दायर करने से पहले पेषश्टाइन ने जर्मन एथलीटों, ट्रेनरों और खेल अधिकारियों को पत्र कर मुकदमे के बारे में सूचना दी थी.

एमजे/एजेए (डीपीए)

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