गर्भवती होना नौकरी न देने का आधार नहीं

गर्भावस्था को निजी नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के तौर पर देखने का नजरिया अब भारत में भी आगे बढने लगा है. इस राह में सामाजिक और सरकारी संस्थाओं द्वारा रोड़े अटकाने की प्रवृत्ति पर न्यायपालिका सख्त रवैया अपना रही है.

ताजा मामला पंजाब का है जहां सेना की चिकित्सा इकाई में भर्ती प्रक्रिया को पार करने के बाद सफल अभ्यर्थी महिला को महज गर्भवती होने के आधार पर नौकरी ज्वाइन करने से रोक दिया गया. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सैन्य प्रशासन की इस प्रवृति को तरक्कीपसंद समाज की राह में बाधक बताते हुए महिला को ज्वाइन कराने का आदेश दिया है.

फैसले का आधार

भारत में महिलाओं को बराबरी के अधिकार से वंचित करने की दकियानूसी सोच को बदलने के लिहाज से यह फैसला काफी अहमियत रखता है. फैसले का तकनीकी आधार कानून में पुरुष और महिलाओं को प्राप्त समानता के मौलिक अधिकार को ही बनाया गया है. लेकिन अदालत ने फैसले में कहा कि आधुनिक भारत में ऐसी सोच के लिए कोई जगह नहीं है. दरअसल अदालत का बयान बदलाव की उस बयार की स्वीकारोक्ति‍ है जो लैंगिक आधार पर नाबराबरी की सोच को चुनौती देता है. साथ ही इस फैसले का सामाजिक लिहाज से भी महत्व है. जो यह स्पष्ट संकेत देता है कि सामाज को यह सोच बदलनी होगी जो यह मानती है कि बच्चों की पैदाइश और परवरिश की जिम्मेदारी सिर्फ महिला की है.

अदालत के फैसले का संदेश साफ है कि देश समाज और परिवार के निर्माण, विकास और उत्थान में पुरुष और महिला की अगर बराबर भागीदारी है तो घर परिवार से लेकर बच्चों की परवरिश और पैदाइश की जिम्मेदारी में भी पुरुषों को ही नहीं बल्कि समाज को भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करना होगा. और समाज एवं व्यवस्था के स्तर पर यह जिम्मेदारी सरकारी दफ्तरों सहित सभी संस्थान, संगठन और प्रतिष्ठानों को महज गर्भावस्था जैसे आधारों पर महिलाओं को रोकने की मनोवृत्ति बदलकर निभानी होगी.

भारत में महिलाओं के कानूनी अधिकार

पिता की संपत्ति का अधिकार

भारत का कानून किसी महिला को अपने पिता की पुश्तैनी संपति में पूरा अधिकार देता है. अगर पिता ने खुद जमा की संपति की कोई वसीयत नहीं की है, तब उनकी मृत्यु के बाद संपत्ति में लड़की को भी उसके भाईयों और मां जितना ही हिस्सा मिलेगा. यहां तक कि शादी के बाद भी यह अधिकार बरकरार रहेगा.

भारत में महिलाओं के कानूनी अधिकार

पति की संपत्ति से जुड़े हक

शादी के बाद पति की संपत्ति में तो महिला का मालिकाना हक नहीं होता लेकिन वैवाहिक विवादों की स्थिति में पति की हैसियत के हिसाब से महिला को गुजारा भत्ता मिलना चाहिए. पति की मौत के बाद या तो उसकी वसीयत के मुताबिक या फिर वसीयत ना होने की स्थिति में भी पत्नी को संपत्ति में हिस्सा मिलता है. शर्त यह है कि पति केवल अपनी खुद की अर्जित की हुई संपत्ति की ही वसीयत कर सकता है, पुश्तैनी जायदाद की नहीं.

भारत में महिलाओं के कानूनी अधिकार

पति-पत्नी में ना बने तो

अगर पति-पत्नी साथ ना रहना चाहें तो पत्नी सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अपने और बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांग सकती है. घरेलू हिंसा कानून के तहत भी गुजारा भत्ता की मांग की जा सकती है. अगर नौबत तलाक तक पहुंच जाए तब हिंदू मैरिज ऐक्ट की धारा 24 के तहत मुआवजा राशि तय होती है, जो कि पति के वेतन और उसकी अर्जित संपत्ति के आधार पर तय की जाती है.

भारत में महिलाओं के कानूनी अधिकार

अपनी संपत्ति से जुड़े निर्णय

कोई भी महिला अपने हिस्से में आई पैतृक संपत्ति और खुद अर्जित की गई संपत्ति का जो चाहे कर सकती है. अगर महिला उसे बेचना चाहे या उसे किसी और के नाम करना चाहे तो इसमें कोई और दखल नहीं दे सकता. महिला चाहे तो उस संपत्ति से अपने बच्चो को बेदखल भी कर सकती है.

भारत में महिलाओं के कानूनी अधिकार

घरेलू हिंसा से सुरक्षा

महिलाओं को अपने पिता या फिर पति के घर सुरक्षित रखने के लिए घरेलू हिंसा कानून है. आम तौर पर केवल पति के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इस कानून के दायरे में महिला का कोई भी घरेलू संबंधी आ सकता है. घरेलू हिंसा का मतलब है महिला के साथ किसी भी तरह की हिंसा या प्रताड़ना.

भारत में महिलाओं के कानूनी अधिकार

क्या है घरेलू हिंसा

केवल मारपीट ही नहीं फिर मानसिक या आर्थिक प्रताड़ना भी घरेलू हिंसा के बराबर है. ताने मारना, गाली-गलौज करना या फिर किसी और तरह से महिला को भावनात्मक ठेस पहुंचाना अपराध है. किसी महिला को घर से निकाला जाना, उसका वेतन छीन लेना या फिर नौकरी से संबंधित दस्तावेज अपने कब्जे में ले लेना भी प्रताड़ना है, जिसके खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला बनता है. लिव इन संबंधों में भी यह लागू होता है.

भारत में महिलाओं के कानूनी अधिकार

पुलिस से जुड़े अधिकार

एक महिला की तलाशी केवल महिला पुलिसकर्मी ही ले सकती है. महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले पुलिस हिरासत में नहीं ले सकती. बिना वारंट के गिरफ्तार की जा रही महिला को तुरंत गिरफ्तारी का कारण बताना जरूरी होता है और उसे जमानत संबंधी उसके अधिकारों के बारे में भी जानकारी दी जानी चाहिए. साथ ही गिरफ्तार महिला के निकट संबंधी को तुरंत सूचित करना पुलिस की ही जिम्मेदारी है.

भारत में महिलाओं के कानूनी अधिकार

मुफ्त कानूनी मदद लेने का हक

अगर कोई महिला किसी केस में आरोपी है तो महिलाओं के लिए कानूनी मदद निःशुल्क है. वह अदालत से सरकारी खर्चे पर वकील करने का अनुरोध कर सकती है. यह केवल गरीब ही नहीं बल्कि किसी भी आर्थिक स्थिति की महिला के लिए है. पुलिस महिला की गिरफ्तारी के बाद कानूनी सहायता समिति से संपर्क करती है, जो कि महिला को मुफ्त कानूनी सलाह देने की व्यवस्था करती है.

फैसले की अहमियत

इस फैसले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू इसका यूनीफॉर्म सर्विसेज से जुडा होना है. दरअसल सैन्य एवं अन्य वर्दीधारी सेवाओं में महिलाओं के लिए सीमित विकल्प और कठोर सेवा शर्तें इस तरह के दकियानूसी फरमानों को प्रश्रय देते है. इस मामले में अदालत ने तथ्य एवं परिस्थितियों के आधार पर भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद नौकरी ज्वाइन करने की अवधि में गर्भधारण करने के आधार पर महिला के आवेदन को ही रद्द कर देने को गलत ठहराया है. इसे मनमाना बताते हुए अदालत ने कहा कि आधुनिक होते समाज में ऐसे मनमाने फैसलों को जगह नहीं दी जा सकती है.

इसका फायदा न सिर्फ सैन्य सेवाओं में भेदभावपूर्ण सेवा शर्तों का सामना कर रही महिलाओं को मिलेगा बल्कि विमानन सेवाओं और मनोरंजन जगत में काम करने वाली महिलाओं के लिए भी इस फैसले ने भविष्य में भेदभाव के खिलाफ मुहिम का कानूनी आधार मुहैया करा दिया है. बात सिर्फ बराबरी के हक की नहीं है. बल्कि समाज को संवारने की जिम्मेदारी में पुरुष और महिला की बराबरी की भागीदारी को सुनिश्चित करने की है. समाज को अपना नजरिया बदलने के लिए अदालत के इस फैसले को तासीर भरी नजरों से देखना होगा तभी इसकी सचेत स्वीकारोक्ति संभव हो सकेगी.

ब्लॉग: निर्मल यादव

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सुबह नहाते समय हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें. इसके बाद जैतून के तेल से मालिश मां के लिए फायदेमंद है, यह सलाह है जर्मन दाई हाएके सोयार्त्सा की.

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मां के शरीर में हो रहे हार्मोन परिवर्तन के कारण त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं. हफ्ते में एक दिन चेहरे पर मास्क का इस्तेमाल अच्छा है. एक चम्मच दही में कच्चा एवोकाडो मिलाकर लगाएं और दस मिनट बाद धो दें.

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गर्भावस्था के दौरान कसरत जरूरी है. आसन लगाकर पेट के निचले हिस्से से सांस खींचकर छोड़ना तनाव दूर करता है. इस दौरान दिमाग में एक ही ख्याल हो, "यह सांस मेरे बच्चे को छू कर गुजर रही है."

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सुबह बहुत कुछ खा सकना आसान नहीं, अक्सर सुबह के वक्त मां को उल्टी की शिकायत रहती है. हर्बल चाय या फिर हल्का फुल्का बिस्कुट या टोस्ट खाना बेहतर है. नाश्ते में इस बात पर ध्यान दें कि वह फाइबर वाला खाना हो. फल खाना और भी अच्छा है.

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अक्सर गर्भावस्था के दौरान बाल रूखे और बेजान हो जाते हैं. बालों के लिए इस दौरान हल्के केमिकल वाले शैंपू का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. हफ्ते में एक दिन एक चम्मच जैतून के तेल में दही और अंडे का पीला भाग मिलाकर लगाने से बालों की नमी लौट आती है. गर्भावस्था में हेयर कलर का इस्तेमाल ना करें.

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शरीर और दिमाग के स्वस्थ होने के साथ दोनों के बीच संतुलन बहुत जरूरी है. गर्भावस्था के दौरान पैदल चलना भी फायदेमंद है. स्वीमिंग के दौरान पानी से कमर को काफी राहत मिलती है.

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मां के लिए दांतों को साफ रखना भी जरूरी है, दिन में दो बार ब्रश करें लेकिन नर्म ब्रश से. शुरुआती छह महीनों में दांतों का खास ख्याल रखें और डेंटिस्ट से भी नियमित रूप से मिलते रहें.

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विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चे के लिए हरी सब्जियां और आयोडीन युक्त भोजन फायदेमंद है. बच्चे को खूब आयरन और कैल्शियम की भी जरूरत होती है. ध्यान रहे कि खानपान में इन चीजों की कमी नहीं होनी चाहिए. नियमित रूप से डॉक्टर के पास जाना भी जरूरी है.

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दिन में करीब दो लीटर पानी पीना स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा है. ज्यादा पानी पीने से मां का शरीर चुस्त महसूस करता है.

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