गोपनीयता संबंधी कानून बदले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकतंत्र में स्वस्थ आलोचना के महत्व पर जोर दिया है और कहा है कि इन दिनों स्वस्थ आलोचना की जगह आरोपों ने ले ली है. कुलदीप कुमार का कहना है कि इसके लिए जानकारी के दरवाजे खोलने होंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इन बयानों पर किसी को भी कोई आपत्ति नहीं हो सकती क्योंकि लोकतंत्र में विरोधी विचारधाराओं को मानने वालों के बीच संवाद के माध्यम से ही राजनीतिक व्यवस्था को संतोषजनक ढंग से चलाया जा सकता है और संवाद का माहौल बनाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है. इसी तरह यदि आलोचना, चाहे वह राजनीतिक दल और नेता करें या मीडिया, स्वस्थ नहीं होगी और बेबुनियाद आरोप ही राजनीतिक विमर्श पर हावी रहेंगे, तो लोकतंत्र सुचारु रूप से नहीं चल सकता.

नरेंद्र मोदी ने समस्या की ओर तो ध्यान आकृष्ट किया है, लेकिन उसके लिए कमोबेश मीडिया को ही जिम्मेदार ठहराया है जबकि हकीकत यह है कि लगभग सभी राजनीतिक दल और उनके नेता अपने विरोधियों पर बिना किसी पुख्ता सबूत के मनमाने आरोप लगाते हैं और मीडिया उन आरोपों को खबर बना कर प्रसारित करता है. स्वयं अखबार या टीवी चैनल अपनी ओर से कभी-कभार ही राजनीतिक नेताओं या सरकार के खिलाफ आरोप लगाते है. और जब वे लगाते हैं, तो अक्सर उनके पास उन्हें पुष्ट करने के लिए ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग या दस्तावेजी सुबूत होते हैं. इसलिए स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि यदि प्रधानमंत्री मोदी इस समस्या के प्रति गंभीर हैं, तो सबसे पहले उन्हें अपनी पार्टी के नेताओं पर अंकुश लगाना होगा और उन्हें समझाना होगा कि तात्कालिक चुनावी या राजनीतिक लाभ के लिए वे विरोधियों के खिलाफ बेबुनियाद आरोप न लगाएं.

पिछले दिनों सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह, जिन्हें मोदी का सबसे अधिक नजदीकी सहयोगी माना जाता है, ने पश्चिम बंगाल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए आरोप लगाया था कि सारदा चिटफंड के पैसे का इस्तेमाल 2 दिसंबर, 2014 को बर्दवान में हुए विस्फोट के लिए किया गया था. सारदा चिटफंड घोटाले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेता फंसे हुए हैं. पश्चिम बंगाल में भाजपा अपने पैर जमाने की कोशिश कर रही है जो स्वाभाविक रूप से तृणमूल कांग्रेस के लिए परेशानी का बायस है.

हमाम में राजनीतिक दल

शाह का बयान तृणमूल कांग्रेस पर आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाने वाला था. लेकिन मोदी सरकार के ही कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बयान देते हुए कहा कि बर्दवान विस्फोट के तार बांग्लादेश के संगठन जमात उल-मुजाहिदीन के साथ जुड़े होने के बारे में जांच चल रही है लेकिन अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिसके आधार पर कहा जा सके कि सारदा चिटफंड के पैसा का इस आतंकवादी गतिविधि के लिए इस्तेमाल किया गया.

ममता बनर्जी, मायावती, मुलायम सिंह, लालू यादव, दिग्विजय सिंह और बीमान बसु, लगभग सभी पार्टियों के नेता पिछले कुछ वर्षों के दौरान अपने विरोधियों के खिलाफ मनमाने आरोप लगाते रहे हैं. 1980 के दशक में राजीव गांधी के खिलाफ भी बोफोर्स सौदे में रिश्वत लेने के आरोप लगे थे. लेकिन आज तक भी यह सिद्ध नहीं हो पाया कि उन्होंने या उनके परिवार के किसी सदस्य ने इस सौदे में रिश्वत ली थी. हर चुनाव के बाद हारने वाली पार्टी जीतने वाली पार्टी पर चुनाव में धांधली करने के आरोप लगाती है जबकि सिद्ध कुछ नहीं हो पाता.

दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स

ताकतवर पुतिन

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन लगातार तीसरे साल शीर्ष पर बने हुए हैं. पहले वैश्विक स्तर पर तमाम विरोधों के बावजूद उन्होंने जिस तरह क्रीमिया का अधिग्रहण किया. हाल ही में सीरिया में हवाई हमले कर एक बार फिर वे वर्तमान गंभीर संकट में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं.

दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स

जर्मन चांसलर

जर्मनी यूरोप की राजनीति और आर्थिक पटल पर अहम स्थान रखता है और अर्थव्यवस्था के मामले में यूरोप में सबसे अधिक शक्तिशाली है. जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल इस साल सूची में 5वें स्थान से उठकर तीसरे स्थान पर आ गई हैं. सीरियाई शरणार्थियों की मदद के लिए मैर्केल के उदार और साहसी कदम के कारण उनकी छवि और भी ताकतवर नेता की बनी है.

दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स

तीसरे नंबर पर ओबामा

फोर्ब्स की ताकतवर 72 लोगों की सूची में तीसरे नंबर पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा हैं. फोर्ब्स के मुताबिक दूसरे टर्म के अंतिम चरण में आ चुके ओबामा की लोकप्रियता पहले के मुकाबले कुछ कम हुई है.

दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स

चौथे नंबर पर पोप फ्रांसिस

ऐसा नहीं है कि शक्तिशाली लोगों की सूची में सिर्फ देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हों. इसी सूची में कैथोलिक गिरजे के प्रमुख पोप फ्रांसिस भी हैं. पोप रूढ़िवादी कैथोलिक ईसाइयों की पुरानी छवि को बदलने के काम में जुटे हुए हैं.

दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स

शी जिनपिंग

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग फोर्ब्स की सूची में पांचवे नंबर पर हैं. सत्तारूढ़ जिनपिंग माओ झे डोंग के बाद सबसे ताकतवर चीनी नेता बनकर उभरे हैं. वे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चला रहे हैं.

दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स

छठवें नंबर पर बिल गेट्स

माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स इस सूची में सातवें से छठी पायदान पर आ गए हैं. अमेरिका के सबसे अमीर शख्स गेट्स अपने अरबों डॉलर का इस्तेमाल दुनिया भर के प्रमुख सामाजिक परिवर्तन के लिए कर रहे हैं.

दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स

ऊपर उठे नरेंद्र मोदी

इस साल 9वें स्थान पर विराजमान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 की सूची में 15वें स्थान पर थे. मई 2014 में हुए आम चुनाव में बहुमत से जीतकर सत्ता में आने वाले बीजेपी नेता मोदी के बारे में फोर्ब्स का कहना है कि पीएम मोदी को अपनी पार्टी के सुधार एजेंडा को आगे बढ़ाने और "झगड़ालू विपक्ष" पर नियंत्रण करने पर ध्यान देना चाहिए.

सूचना का अधिकार

ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यदि स्वस्थ आलोचना के पक्ष में आह्वान देते हैं, तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए और उम्मीद की जानी चाहिए कि सत्तारूढ़ दल इस संबंध में आदर्श प्रस्तुत करेगा. यहां यह याद दिलाना अनुचित न होगा कि स्वस्थ और संतुलित आलोचना के लिए प्रामाणिक जानकारी का होना अनिवार्य है. लेकिन यदि सरकार मीडिया के लिए जानकारी के दरवाजे ही बंद कर देगी, तब स्वस्थ आलोचना की परंपरा कैसे विकसित हो सकेगी.

सभी जानते हैं कि भारत में आज भी गोपनीयता संबंधी वही कानून लागू हैं जिन्हें ब्रिटिश शासकों ने जनता को सूचना से वंचित रखने के लिए बनाया था. पिछले दिनों राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल ने उन मीडिया संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जरूरत पर बल दिया था जो सरकारी विभागों की कारगुजारियों के बारे में खबरें प्रकाशित करते हैं और गोपनीय जानकारी को सार्वजनिक करते हैं. यह रवैया स्वस्थ आलोचना को विकसित करने की राह में रोड़ा ही अटकाएगा.

ब्लॉग: कुलदीप कुमार

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