ग्रीस के नेता आईएमएफ चीफ पर बरसे

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्द एक बयान से विवाद में पड़ गई हैं. ग्रीस के नेताओं ने उनके बयान को ग्रीक जनता का उपहास करने वाला बताया है. फ्रांस ने भी लगार्द के बयान की आलोचना की.

ब्रिटेन के अखबार द गार्डियन ने आईएमएफ चीफ का बयान छापा. बयान में लगार्द ने कहा, ग्रीक लोगों को "अपनी मदद खुद करनी होगी." सभी को टैक्स चुकाने होंगे." लगार्द यह भी कह गईं कि उन्हें ग्रीस से ज्यादा सब सहारा क्षेत्र के अफ्रीकी देशों की गरीबी की चिंता है.

इसके बाद भी लगार्द ने सार्वजनिक मंच पर ग्रीस की चर्चा की और कहा, "ग्रीक लोगों और उनके सामने खड़ी चुनौतियां के प्रति मेरी सहानुभूति है. इस वजह से आईएमएफ ग्रीस को इस मौजूदा संकट से बाहर लाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है. इस कोशिश में एक अहम बात यह है कि हर किसी को अपना अपना बोझ उठाना चाहिए. खास तौर पर खास लोगों को अपना टैक्स चुकाकर ऐसा करना चाहिए."

लगार्द के बयानों से ग्रीस के नेता आग बबूला हैं. कट्टर वामपंथी पार्टी सीरिजा के नेता अलेक्सिस तिसिपरास ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बचाव की शर्तों को तोड़ा जा सकता है. तिसिपरास ने कहा, "लगार्द के बयान में आखिर में जो चीज दिखती है वही ग्रीस के लिए संवदेना है. ग्रीक कर्मचारी अपना टैक्स देते हैं, यह बर्दाश्त करने लायक नहीं है."

ग्रीस की सोशलिस्ट पार्टी ने भी लगार्द की आलोचना की है. इंवानगेलोस वनिजेलोस ने कहा, "ऐसे संकट में ग्रीक लोगों को शर्मसार करने का अधिकार किसी को नहीं है. आज मैं यह बात खास तौर पर मिस लगार्द को संबोधित करते हुए कह रहा हूं जिन्होंने अपने रुख से ग्रीक लोगों का अपमान किया है."

इस बीच लगार्द के देश फ्रांस ने भी आईएमएफ चीफ के बयान की आलोचना की है. फ्रांस सरकार की प्रवक्ता नजत वलाउद बेलकाक ने फ्रेंच टेलीविजन से कहा, "मुझे उनका बयान साधारण और चलताऊ लगा."

17 देशों की साझा मुद्रा वाला यूरोजोन इस वक्त भारी दबाव में है. ग्रीस करीबन दीवालिया हो चुका है. स्पेन, इटली, पुर्तगाल और आयरलैंड की भी हालत खस्ता है. यूरोजोन को बचाने के लिए खस्ताहाल देशों की मदद की जा रही है. ग्रीस के साथ 2010 में एक करार किया गया. करार के तहत ग्रीस को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और यूरोपीय सेंट्रल बैक से सैकड़ों अरब डॉलर मुहैया कराए जा रहे हैं ताकि ग्रीस की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट सके. करार के तहत ग्रीस पर आर्थिक सुधार करने का दबाव है. अब ग्रीक नेता इस करार को न मानने की चेतावनी दे रहे हैं.

देश राजनीतिक अस्थिरता से भी गुजर रहा है. छह हफ्तों के अंदर दूसरी बार चुनाव होने जा रहे हैं. पिछले चुनावों में किसी पार्टी को साफ बहुमत नहीं मिला. बजट और कटौती के चलते पैदा हुए मतभेदों की वजह से पार्टियां गठबंधन सरकार भी नहीं बना सकी. अब 17 जून को फिर से चुनाव होने हैं. यह चुनाव काफी हद तक ग्रीस और यूरोजोन के नक्शे का भविष्य तय करेंगे.

ओएसजे/आईबी (एएफपी)

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