घर के भीतर डेड जोन की खोज

हर इमारत या घर में कुछ डेड जोन होते हैं, जहां मोबाइल या वाई फाई सिग्नल कमजोर हो जाते हैं. अब ऐसे कोनों का सटीक ढंग से पता लगाया जा सकता है.

फोन की घंटी बजी नहीं कि दूसरे कमरे या बाहर जाने की तैयारी होने लगी, कई इमारतों में कुछ जगहों पर मोबाइल पर सिग्नल पूरे आ रहे होते हैं लेकिन बात ठीक से नहीं हो पाती. मोबाइल सिग्नल की ताकत का सटीक पता लगाने के लिए भी कई ऐप्स बाजार में हैं. सिग्नल फाइंडर, नेटवर्क सिग्नल इंफो, फोन रिसेप्शन मॉनिटर और स्पॉटी जैसे ऐप तो मुफ्त हैं. इनकी मदद से पता लगाया जा सकता है कि अहम बातचीत के दौरान घर के किन कमरों में नहीं जाना चाहिए. साथ ही अंजान स्थान में भी ऐसी जगह का पता लगाया जा सकता है जहां सबसे अच्छे सिग्नल हैं.

इंटरनेट के मामले में भी कुछ ऐसा ही होता है. वाई फाई जोन में रहने के वावजूद कई बार वाई फाई काम नहीं करता. कंप्यूटर या मोबाइल पर वाई फाई के सिग्नल दिखाई पड़ते हैं लेकिन कनेक्शन नहीं चलता. अब कुछ ऐसे ऐप आ गये हैं जो इस वाई वाई सिग्नलों की ताकत का बेहद सटीक विश्लेषण कर सकते हैं.

विडोंज कंप्यूटर में वाई फाई संबंधी दिक्कत का पता इकाहुआ हीटमैपर ऐप से लगाया जा सकता है. मैक यूजर नेटस्पॉट के जरिये अपनी परेशानी हल कर सकते हैं. इन ऐप्स को कंप्यूटर या मोबाइल पर चलाने के बाद अगर आप धीरे धीरे एक जगह से दूसरी जगह जाएंगे तो साफ साफ पता चलेगा कि वाई फाई की सिग्नल स्ट्रेंथ कैसे बदल रही है. इन ऐप्स में सिग्नल स्ट्रेंथ को एक रंगीन मैप के जरिए दिखाया जाता है. हरे रंग का मतलब है बढ़िया सिग्नल और लाल रंग का मतलब है खराब सिग्नल.

दोनों ऐप्स का बेसिक वर्जन मुफ्त है. इनकी मदद से वाई फाई के रूटर के लिए इमारत में एकदम मुफीद जगह चुनी जा सकती है. ऐप डेवलपरों के मुताबिक कई बार वाई फाई के सिग्नल लीक करते हैं. एक और समस्या चैनल कॉन्फ्लिक्ट की होती है. असल में हर वाई फाई नेटवर्क के कुछ खास ऑपरेटिंग चैनल होते हैं. रूटर इन्हीं चैनलों के जरिए काम करता है. ऐसे में कभी कभार एक ही इमारत के कई घरों में लगे रूटर एक दूसरे की सिग्नल स्ट्रेंथ को प्रभावित करते हैं. इससे वाई फाई सिग्नल की स्ट्रेंथ भी कमजोर होती हैं. हालांकि आधुनिक रूटर ऑटोमैटिक तरीके से खुद को सेट कर लेते हैं लेकिन इसके बावजूद भी कभी कभार यह समस्या बनी रहती है.

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चलता फिरता गल्ला

अगर रास्ते में किसी को पैसे देने पड़ जाएं, तो फिर यह आईसेटेल तो बड़े काम का साबित हो सकता है. इस ऐप की मदद से क्रेडिट कार्ड पेमेंट किया जा सकता है. हालांकि इसके लिए फोन में एक उपकरण और जोड़ना पड़ता है.

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जर्मन सीखिए

भला भाषा सिखाने के लिए ऐप क्यों न हो. जर्मन भाषा यूं तो मुश्किल मानी जाती है लेकिन अगर इस ऐप की मदद ली जाए, तो शायद आसानी हो सकती है.

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अल्ट्रासाउंड में क्रांति

ऐसी तकनीक तैयार कर ली गई है, जिसे आईफोन से जोड़ दिया जाए, तो अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है. आम तौर पर अल्ट्रासाउंड की मशीनें एक लाख डॉलर तक में मिलती हैं और यह छोटा अल्ट्रासाउंड सिर्फ 8000 डॉलर में लिया जा सकता है. अलबत्ता इसमें तस्वीरें बहुत अच्छी नहीं आतीं.

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फोन से सेहत

अमेरिका में ताजा रिसर्च बताती है कि दुनिया भर के लोग अब मोबाइल फोन से अपनी सेहत का ख्याल रखने लगे हैं. हालांकि उनकी संख्या फिलहाल बहुत कम है लेकिन 2015 तक दुनिया भर के 30 फीसदी लोग मोबाइल फोन से सेहत के राज समझने में मदद लेने लगेंगे.

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फोन से फिटनेस

आपका मोबाइल ऐसे ऐप से सज सकता है, जो आपको बताता रहेगा कि हफ्ते में किस दिन आपने कसरत की, कितनी कैलोरी बढ़ाया या घटाया. यानी आपकी सेहत पर रहेगी फोन की नजर.

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निर्भया पर ऐप

दिल्ली बलात्कार कांड के बाद भारत में निर्भया ऐप तैयार किया गया है, जिसमें जरूरतमंद औरतें फोन कर सकती हैं और हेल्पलाइन से मदद ले सकती हैं.

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पेट्रोल की कीमत

सिर्फ जिस्म ही नहीं, जेब की सेहत के लिए भी ऐप तैयार हैं. पेट्रोल की घटती बढ़ती कीमतों को बताने के लिए खास ऐप बाजार में आ चुका है.

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मोबाइल की नजर से

देखने से लाचार लोगों के लिए भी तकनीक की मदद ली जा सकती है. नीयर फील्ड कम्युनिकेशन के बनाए गए ऐप की मदद से ऑडियो और टेक्स्ट को सुना जा सकता है.

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सोशल मीडिया ऐप

और ये कुछ जरूरी ऐप. हर स्मार्टफोन में इस तरह के सोशल मीडिया ऐप तो भरे ही रहते हैं, जिनसे दूर रहना आजकल संभव नहीं.

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वेवमैपर

अगर संगीत में रुचि है, तो यह ऐप बड़ा कारगर है. अपना संगीत खुद तैयार करने के लिए एक शानदार ऐप.

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टैक्सी का ऐप

कहीं जाना हो या पता करना हो कि फलां जगह जाने में कितने पैसे लगेंगे, तो फिर इस्तेमाल कीजिए टैक्सी का ऐप. दुनिया के कई शहरों में इस तरह का ऐप इस्तेमाल में आ रहा है.

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