चीनी इलाके में भारत के ड्रोन पर चीन का कड़ा विरोध

चीन ने कहा है कि भारत का एक ड्रोन चीनी वायुसीमा में आकर गिर गया. भारत चीन सीमा पर सिक्किम के इलाके में किसी जगह यह घटना हुई है जिसे लेकर चीन ने गहरी आपत्ति जताई है.

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने खबर दी है कि चीन की सीमा पर मौजूद सैनिकों ने "हाल ही" में एक भारतीय ड्रोन को चीन की सीमा के भीतर गिरा हुआ देखा. इसके कुछ घंटों बाद ही भारत के रक्षा मंत्रालय ने भी इस बात की पुष्टि की कि उत्तर पूर्व में सिक्किम के इलाके में एक मानवरहित विमान का नियंत्रण केंद्र से संपर्क टूट गया है. भारतीय रक्षा मंत्रालय के मुताबिक संपर्क टूटने के बाद यह विमान चीनी क्षेत्र में जा कर गिर गया. दोनों ही पक्षों ने इस बात की जानकारी नहीं दी है कि यह घटना किस वक्त हुई.

इस घटना के बाद चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा है, "एक भारतीय मानव रहित विमान सिक्किम के क्षेत्र में चीनी वायुसीमा में घुस आया और फिर गिर गया. चीन के सीमा सुरक्षा बलों ने पेशेवर और जिम्मेदार रुख दिखाते हुए इसकी पहचान की और विमान की पुष्टि की. मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि सिक्किम क्षेत्र में भारत चीन की सीमा तय है और चीन के ओर की सीमा चीन का क्षेत्र है. भारत के कदम ने चीन की संप्रभुता का उल्लंघन किया है और सीमांत इलाके में शांति और अस्थिरता के लिए खतरा है. चीन इसका कड़ा विरोध करता है और इस बारे में भारतीय पक्ष को बता दिया गया है. हम भारत से मांग करते हैं कि वह सीमा के आसपास और उसके पार अपने मानवरहित विमानों को भेजना बंद करे."

Grenzübergang Sikkim

भारत के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह ड्रोन नियमित प्रशिक्षण मिशन पर था उसी दौरान किसी तकनीकी खराबी की वजह से इसका संपर्क टूट गया और यह चीनी सीमा में जा कर गिर गया. भारत के सीमा सुरक्षा बल ने चीनी समकक्षों से संपर्क कर इसका पता लगाने का अनुरोध किया. इसके बाद चीन के अधिकारियों ने इसकी जगह बताई. रक्षा मंत्रालय के बयान में ये बातें कही गयी हैं. बयान में यह भी कहा गया है, "इस घटना के सही कारण का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है और इस मामले को इस तरह की घटनाओं के लिए स्थापित प्रोटोकॉल के आधार पर ही निबटाया जा रहा है."

भारत और चीन के बीच डोकलम के पठार पर कुछ ही महीने लंबा तनाव चला. इस इलाके पर चीन और भूटान अपना दावा करते हैं. भारत और चीन के बीच हिमालयी क्षेत्र में मौजूद 3500 किलोमीटर लंबी सीमा काफी विवादित है. इसे लेकर जब तब दोनों देशों में तनातनी लगी रहती है.

एनआर/एके (डीपीए)

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लंबा विवाद

तकरीबन 3500 किलोमीटर की साझी सीमा को लेकर दोनों देशों ने 1962 में जंग भी लड़ी लेकिन विवादों का निपटारा ना हो सका. दुर्गम इलाका, कच्चा पक्का सर्वेक्षण और ब्रिटिश साम्राज्यवादी नक्शे ने इस विवाद को और बढ़ा दिया. दुनिया की दो आर्थिक महाशक्तियों के बीच सीमा पर तनाव उनके पड़ोसियों और दुनिया के लिए भी चिंता का कारण है.

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अक्साई चीन

काराकाश नदी पर समुद्र तल से 14000-22000 फीट ऊंचाई पर मौजूद अक्साई चीन का ज्यादातर हिस्सा वीरान है. 32000 वर्ग मीटर में फैला ये इलाका पहले कारोबार का रास्ता था और इस वजह से इसकी काफी अहमियत है. भारत का कहना है कि चीन ने जम्मू कश्मीर के अक्साई चीन में उसकी 38000 किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर रखा है.

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अरुणाचल प्रदेश

चीन दावा करता है कि मैकमोहन रेखा के जरिए भारत ने अरुणाचल प्रदेश में उसकी 90 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन दबा ली है. भारत इसे अपना हिस्सा बताता है. हिमालयी क्षेत्र में सीमा विवाद को निपटाने के लिए 1914 में भारत तिब्बत शिमला सम्मेलन बुलाया गया.

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किसने खींची लाइन

ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासन ने मैकमोहन रेखा खींची जिसने ब्रिटिश भारत और तिब्बत के बीच सीमा का बंटवारा कर दिया. चीन के प्रतिनिधि शिमला सम्मेलन में मौजूद थे लेकिन उन्होंने इस समझौते पर दस्तखत करने या उसे मान्यता देने से मना कर दिया. उनका कहना था कि तिब्बत चीनी प्रशासन के अंतर्गत है इसलिए उसे दूसरे देश के साथ समझौता करने का हक नहीं है.

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अंतरराष्ट्रीय सीमा

1947 में आजादी के बाद भारत ने मैकमोहन रेखा को आधिकारिक सीमा रेखा का दर्जा दे दिया. हालांकि 1950 में तिब्बत पर चीनी नियंत्रण के बाद भारत और चीन के बीच ऐसी साझी सीमा बन गयी जिस पर कोई समझौता नहीं हुआ था. चीन मैकमोहन रेखा को गैरकानूनी, औपनिवेशिक और पारंपरिक मानता है जबकि भारत इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा का दर्जा देता है.

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समझौता

भारत की आजादी के बाद 1954 में भारत और चीन के बीच तिब्बत के इलाके में व्यापार और आवाजाही के लिए समझौता हुआ. इस समझौते के बाद भारत ने समझा कि अब सीमा विवाद की कोई अहमियत नहीं है और चीन ने ऐतिहासिक स्थिति को स्वीकार कर लिया है.

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चीन का रुख

उधर चीन का कहना है कि सीमा को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ और भारत तिब्बत में चीन की सत्ता को मान्यता दे. इसके अलावा चीन का ये भी कहना था कि मैकमोहन रेखा को लेकर चीन की असहमति अब भी कायम है.

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सिक्किम

1962 में दोनों देशों के बीच लड़ाई हुई. महीने भर चली जंग में चीन की सेना भारत के लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में घुस आयी. बाद में चीनी सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा पर वापस लौटी. यहां भूटान की भी सीमा लगती है. सिक्किम वो आखिरी इलाका है जहां तक भारत की पहुंच है. इसके अलावा यहां के कुछ इलाकों पर भूटान का भी दावा है और भारत इस दावे का समर्थन करता है.

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मानसरोवर

मानसरोवर हिंदुओं का प्रमुख तीर्थ है जिसकी यात्रा पर हर साल कुछ लोग जाते हैं. भारत चीन के रिश्तों का असर इस तीर्थयात्रा पर भी है. मौजूदा विवाद उठने के बाद चीन ने श्रद्धालुओं को वहां पूर्वी रास्ते से होकर जाने से रोक दिया है.

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बातचीत से हल की कोशिश

भारत और चीन की ओर से बीते 40 सालों में इस विवाद को बातचीत के जरिए हल करने की कई कोशिशें हुईं. हालांकि इन कोशिशों से अब तक कुछ ख़ास हासिल नहीं हुआ. चीन कई बार ये कह चुका है कि उसने अपने 12-14 पड़ोसियों के साथ सीमा विवाद बातचीत से हल कर लिए हैं और भारत के साथ भी ये मामला निबट जाएगा लेकिन 19 दौर की बातचीत के बाद भी सिर्फ उम्मीदें ही जताई जा रही हैं.