चुनावी नतीजे: राजनीति में निश्चितता का अंत

जर्मनी में प्रांतीय चुनावों में अति दक्षिणपंथी एएफडी पार्टी की जीत के बाद देश में नया राजनीतिक काल शुरू होने की बात कही जा रही है. डॉयचे वेले के मार्सेल फुर्स्टेनाऊ का कहना है कि इसकी वजह सिर्फ एएफडी की जीत नहीं है.

विरोध में वोट देने वाले मतदाताओं ने जर्मनी में पहले कभी ऐसे निशान नहीं छोड़े थे, जैसा इस बार हुआ है. पहली बार चुनाव लड़ रहे अल्टरनेटिव फॉर डॉयचलैंड एएफडी ने तीन प्रांतों में दोहरी संख्या में वोट पाए. बाडेन वुर्टेमबर्ग में 15 प्रतिशत, राइलैंड पलैटिनेट में 12.6 प्रतिशत और सैक्सनी अनहाल्ट में 24.2 प्रतिशत. इस बीच जर्मनी के 16 में से 8 राज्यों में एएफडी के विधायक हैं. 2013 में गठित पार्टी के लिए यह बहुत बड़ी कामयाबी है. यह कामयाबी शरणार्थी संकट के बिना उन्हें नहीं मिली होती. और चूंकि इस संकट के खत्म होने के अभी कोई आसार नहीं हैं, पार्टी का समर्थन और बढ़ने की उम्मीद है.

अपनी सफलता के लिए एएफडी को सड़कों पर माहौल बनाने के अलावा और कुछ करने की जरूरत नहीं है. पुरानी पार्टियों को लंबे समय तक इस नई राजनीतिक ताकत का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा. और सबसे बढ़कर उन्हें एएफडी के साथ अपना बर्ताव बदलना होगा. उनके साथ बहस से इंकार करने का मतलब मतदाताओं की इच्छा का अनादर है. यह हठधर्मिता है, जिसकी लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है. रविवार को हुए चुनावों में 2011 के मुकाबले ज्यादा लोगों ने मतदान किया है. इस पर सभी लोगों को खुश होना चाहिए जो राजनीति के वुमुखता की शिकायत करते हैं.

मार्सेल फुर्स्टेनाऊ

मैर्केल की हार या जीत

स्वाभाविक रूप से यह विरोध का चुनाव था. चांसलर अंगेला मैर्केल की शरणार्थी नीति पर जनमत संग्रह. लेकिन यह ऐसा चुनाव भी था जिसमें नामी शख्सियतें जीती हैं. यह बाडेन वुर्टेमबर्ग के मुख्यमंत्री ग्रीन पार्टी के विनफ्रीड क्रेचमन के लिए उतना ही लागू होता है जितना राइनलैंड पलैटिनेट की मुख्यमंत्री एसपीडी की मालू द्रायर के लिए. वे अंगेला मैर्केल की शरणार्थी नीति का समर्थन करने के बावजूद जीते. एएफडी की जीत के साए में इस तथ्य को नजरअंदाज किया जा रहा है. वे अपने प्रांतों के मुख्यमंत्री इसलिए रहेंगे कि उन्होंने अपने प्रांत के हितों का विश्वसनीयता से प्रतिनिधित्व किया है. यही बात सैक्सनी अनहाल्ट के मुख्यमंत्री सीडीयू के राइनर हाजेलहोफ पर भी लागू होती है जिन्हें देश का सबसे रंगहीन मुख्यमंत्री कहा जाता है.

तीन प्रांत, तीन पार्टियों के तीन सफल मुख्यमंत्री. कोई यह नहीं कह सकता कि जर्मनी में चुनाव नीरस होते हैं. अब हर कहीं गठबंधन सरकार बनाने की जटिल बातचीत शुरू हो रही है. हालांकि कहीं भी मुख्यमंत्रियों को गठबंधन बनाने के लिए अपनी पसंद की पार्टियां नहीं मिली हैं लेकिन सीडीयू, एसपीडी, ग्रीन और एफडीपी को आपस में बात करने में कोई कठिनाई नहीं होगी. संसदीय चुनावों में हारने के दो साल बाद मतदाताओं ने उसकी नई गंभीरता को फिर से चुना है. इस समय शरणार्थी संकट के बीच गरमाए माहौल में उदारवाद का फिर से भविष्य दिखना उम्मीद देता है.

वामपंथियों को चिंता करने की जरूरत है. वह अकेली पार्टी है जो हर कहीं हारी है. उसकी शरणार्थी समर्थक नीति ने उसे नुकसान ही पहुंचाया. विरोध की पार्टी के रूप में उसके दिन बीत गए हैं. अब मतदाताओं ने उसकी जिम्मेदारी एएफडी को दे दी है. निश्चितता के दिन लद गए. सत्ता चाहने वाली हर पार्टी को अब समझौते के लिए पहले से ज्यादा तैयार रहना होगा. काला-हरा, लाल-हरा-पीला सब कुछ संभव है. रंगों में व्यक्त होने वाली जर्मनी की राजनीति और रंगीली हो गई है. क्योंकि मतदाता यही चाहता है. उम्मीद है कि पार्टियां भी ये इशारे समझ रही हैं.

जर्मनी के चुनावों पर अपनी राय देना चाहते हैं, तो नीचे के खाने में अपनी टिप्पणी लिखें और बहस में हिस्सा लें.

शिखर की ओर अंगेला मैर्केल

नन्हीं अंगेला

किसी ने नहीं सोचा था कि ब्रांडेनबुर्ग के एक छोटे से कस्बे में पैदा हुई अंगेला डोरोथेया कासनर जर्मनी की पहली महिला चांसलर बनेगी. पिता पादरी थे और मां घर पर अंगेला और उनके दो छोटे भाई बहनों की देखभाल करती थीं.

शिखर की ओर अंगेला मैर्केल

उस जमाने में..

मैर्केल साम्यवादी जीडीआर में पली बढ़ीं. स्कूल में अव्वल रहने वाली अंगेला के पसंदीदा विषय गणित और रूसी भाषा रहे. स्कूल पास करने के बाद उन्होंने भौतिक विज्ञान में शिक्षा हासिल की.

शिखर की ओर अंगेला मैर्केल

कोल से सीख

जर्मनी के पूर्व चांसलर हेल्मुट कोल को मैर्केल का गॉडफादर माना जाता है. वही मैर्केल को जर्मनी की केंद्रीय राजनीति में ले कर आए और एकीकरण के बाद अपनी सरकार में मंत्री बनाया.

शिखर की ओर अंगेला मैर्केल

सफलता की सीढ़ी

1990 में मैर्केल पहली बार सांसद बनीं. हेल्मुट कोल ने उन्हें महिला और बाल कल्याण मंत्री बनाया. हालांकि तब तक उनके पास बहुत ज्यादा राजनीतिक अनुभव नहीं था. बाद में वे पर्यावरण मंत्री भी बनीं.

शिखर की ओर अंगेला मैर्केल

सीडीयू की टर्मिनेटर

1998 में सीडीयू पार्टी के सरकार में नहीं रहने के बाद वे पार्टी महासचिव बनीं. चार साल बाद पार्टी अध्यक्ष का पद संभाला. 2005 में उनके नेतृत्व में सीडीयू फिर से सत्ता में आईं और वे पहली महिला चांसलर बनीं.

शिखर की ओर अंगेला मैर्केल

आंधियों से टक्कर

मैर्केल को लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. पूर्वी जर्मनी की एक महिला चांसलर पद को बखूबी संभाल सकती है, इस बात पर शुरुआत में कम ही लोग भरोसा कर पाए.

शिखर की ओर अंगेला मैर्केल

यह मुस्कराहट..

जहां दुनिया के अधिकतर सरकार प्रमुख पुरुष हैं, वहां मैर्केल ऐसी महिला हैं जो इन सब को पछाड़ती हुई नजर आती हैं. अपने आत्मविश्वास के चलते वे दुनिया की सबसे ताकतवर महिला कहलाती हैं.

शिखर की ओर अंगेला मैर्केल

छुट्टियां और आराम

मैर्केल हर साल गर्मियों में छुट्टियों पर जाना पसंद करती हैं. अपने पति के साथ वे आम तौर पर इटली के इशिया द्वीप जाती हैं जहां वे स्विमिंग करना पसंद करती हैं. उन्हें स्कीइंग करना भी पसंद है.

शिखर की ओर अंगेला मैर्केल

सुर्खियों में

सिर्फ राजनीति के ही कारण मैर्केल सुर्खियां नहीं बटोरती हैं. एक ऑपेरा सुनने मैर्केल जब ओस्लो पहुंचीं तो उनकी इस ड्रेस ने खूब विवाद खड़ा किया.

शिखर की ओर अंगेला मैर्केल

फुटबॉल की शौकीन

ड्रेसिंग रूम में जा कर फुटबॉल सितारों से मिलना, उनके गले मिलना, उनके साथ तस्वीर खिंचवाना हर लड़की का सपना होता है. अंगेला मैर्केल शायद जर्मनी की वह सबसे भाग्यशाली 'लड़की' हैं.

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