जहरीली शराब से हाहाकार, यूपी और उत्तराखंड में दर्जनों मौतें

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जहरीली शराब से मरने वालों की संख्या सत्तर के करीब पहुंच चुकी है. कई लोग अभी भी अस्पतालों में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं. बताया जा रहा है कि ये आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है.

सबसे ज्यादा मौतें उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुई हैं जहां अब तक 46 लोगों की जान जा चुकी है जबकि सहारनपुर से लगे उत्तराखंड के रुड़की शहर में भी एक दर्जन लोग जहरीली शराब से अपनी जान गंवा चुके हैं. सौ से ज्यादा लोगों का सहारनपुर और मेरठ के विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है.

सहारनपुर जिले के नागल, गागलहेड़ी और देवबंद थाना क्षेत्र के कई गांवों में दर्जनों लोगों की मौत हो गई है और पचास से ज्यादा लोग शहर के विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं. उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह का कहना है कि सहारनपुर में जहरीली शराब पड़ोस के उत्तराखंड राज्य से लाई गई थी.

एक दिन पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में भी जहरीली शराब ने दस से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी. दोनों घटनाओं से हैरत में आई सरकार ने कार्रवाई करते हुए पहले कुछ कर्मचारियों का निलंबन किया और अधिकारियों को राज्य भर में अवैध शराब के खिलाफ सघन अभियान छेड़ने का निर्देश दिया. सरकार के निर्देश के बाद बड़ी मात्रा में अवैध शराब पकड़ी गई है और नष्ट की गई है.

बताया जा रहा है कि सहारनपुर में जहरीली शराब पीने के बाद मौत का सिलसिला शुक्रवार सुबह से शुरू हुआ. सहारनपुर के जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय ने बताया, "ये सभी लोग उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में एक तेरहवीं में गए थे और वहां से आने के बाद इनकी तबीयत खराब हुई. समय से इलाज न मिल पाने के कारण कुछ लोगों की मौत हुई. जिन्हें समय से अस्पताल पहुंचाया गया, उनमें से कई लोग बच गए हैं.”

सहारनपुर के देवबंद क्षेत्र में 2009 में भी ठीक ऐसी ही एक घटना हुई थी जब जहरीली शराब ने करीब पचास लोगों की जान ले ली थी. उत्तर प्रदेश में पिछले दो साल में शराब से होने वाली मौत की ये पांचवीं बड़ी घटना है.

पिछले साल मई में कानपुर के सचेंडी और कानपुर देहात में जहरीली शराब पीने से एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी जबकि जनवरी में बाराबंकी में करीब एक दर्जन लोग जहरीली शराब पीने से मर गए थे. वहीं जुलाई 2017 में आजमगढ़ में अवैध शराब पीने से 25 लोगों की मौत हो गई थी.

शराब से होते हैं ये 7 तरह के कैंसर

शराब से होते हैं ये 7 तरह के कैंसर

लिवर कैंसर

यह कोई नई बात नहीं है कि शराब पीने से लिवर खराब होता है. लेकिन कम ही लोगों को अहसास होता है कि यह कैंसर की भी शक्ल ले सकता है.

शराब से होते हैं ये 7 तरह के कैंसर

मुंह का कैंसर

सिगरेट और तंबाकू के पैकेट पर मुंह के कैंसर की तस्वीरें बनी होती हैं ताकि खरीदने वाले को चेतावनी मिले. हालांकि शराब के साथ अब तक ऐसा नहीं किया गया है.

शराब से होते हैं ये 7 तरह के कैंसर

गले का कैंसर

शोध दिखाता है कि जो लोग हर रोज शराब का सेवन करते हैं उनके मुंह के साथ साथ गले में भी कैंसर होने की संभावना अन्य लोगों से ज्यादा होती है.

शराब से होते हैं ये 7 तरह के कैंसर

खाने की नली का कैंसर

कहना गलत नहीं होगा कि शराब शरीर में जहां जहां जाती है नुकसान पहुंचाती है, खास कर अगर उसमें अल्कोहल की मात्रा बहुत ज्यादा हो. डॉक्टर हर रोज सिर्फ एक वाइन का ग्लास पीने की ही सलाह देते हैं.

शराब से होते हैं ये 7 तरह के कैंसर

बड़ी आंत का कैंसर

यदि आप शराब के साथ साथ सिगरेट भी खूब पीते हैं, मांस भी खाते हैं और साथ ही आपका वजन भी जरूरत से ज्यादा है, तो आपको इस तरह के कैंसर का खतरा ज्यादा है.

शराब से होते हैं ये 7 तरह के कैंसर

छोटी आंत का कैंसर

पुरुषों को इस तरह के कैंसर का खतरा महिलाओं की तुलना में अधिक होता है. यदि मूत्र में खून दिखे, तो डॉक्टरी जांच जरूर कराएं.

शराब से होते हैं ये 7 तरह के कैंसर

स्तन कैंसर

कसरत की कमी, मोटापा और शराब का अत्यधिक सेवन स्तन कैंसर का कारण बन सकते हैं. महिलाओं को इसका खतरा ज्यादा होता है लेकिन ऐसा नहीं है कि पुरुषों को यह नहीं होता.

शराब से होते हैं ये 7 तरह के कैंसर

सबसे खतरनाक

सिर्फ शराब ही कैंसर का कारण नहीं बनती, इसमें आपकी जीवनशैली की और भी बहुत सी चीजें शामिल होती हैं. आठ सबसे खतरनाक कैंसर के बारे में जानने के लिए ऊपर दिए गए "+और" पर क्लिक करें.

बड़ी घटना होने के बाद सरकार कार्रवाई जरूर करती है लेकिन दोषी लोग अकसर या तो हल्की-फुल्की सजा पाकर बच जाते हैं या फिर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है. जानकारों के मुताबिक, अब तक ऐसे मामले में किसी भी दोषी को कोई बड़ी सजा नहीं दी गई है और यही वजह है कि ऐसी घटनाएं आए दिन होती रहती हैं. खुले में शीरे और पुराने गुड़ आदि में केमिकल मिलाकर बनाई जाने वाली शराब में कई बार जहरीले तत्व पैदा हो जाते हैं जिसे पीने से इस तरह के हादसे होते हैं.

दरअसल, उत्तराखंड और यूपी के जिन गांवों में शराब पीने से लोगों की मौत हुई है, वे सीमा से सटे हैं और एक-दूसरे के करीब हैं. इन गांवों में सामान लाने और ले जाने के लिए खेतों के रास्ते का सहारा लिया जाता है. आमतौर पर सर्दी के वक्त अवैध शराब की खपत बढ़ जाती है और सस्‍ती शराब को गरीब और मजदूर लोग पीते हैं. इसका व्यापार करने वालों के निशाने पर गांव के साथ शहरी क्षेत्र के गरीब लोग भी रहते हैं.

जहरीली शराब का पूरे उत्तर प्रदेश में एक बड़ा नेटवर्क काम करता है जो पुलिस और प्रशासन की मदद से अपना कारोबार संचालित करता है. सहारनपुर के स्थानीय पत्रकार महेश कुमार बताते हैं, "जहरीली शराब का कारोबार काफी लंबा है और इसके तार हर एक राज्य के साथ जुड़े हैं. निश्चित तौर पर इसमें आबकारी विभाग और पुलिस की मिली भगत होती है और यही वजह है कि जब इस तरह के हादसे होते हैं तो अकसर इन दोनों विभागों के लोग दोषी पाए जाते हैं.”

फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देश के बाद शराब माफिया के खिलाफ राज्य सरकार सघन अभियान छेड़े हुए है लेकिन सहारनपुर में जहरीली शराब से मरने वालों का आंकड़ा भी बढ़ता ही जा रहा है.

ये हैं कुछ नशाप्रेमी पशु

ये हैं कुछ नशाप्रेमी पशु

बिल्लियां

ड्रग्स का इस्तेमाल करने वाले पशुओं में सबसे ज्यादा नाम बिल्लियों का लिया जाता है. ये बिल्लियां कैटनिप नामक जड़ीबूटी को लेने के बाद अपने व्यवहार में जबरदस्त बदलाव लाती हैं. बिल्लियां कैटनिप का फूल खाती है और इसकी पत्तियों और छाल को शरीर पर रगड़ लेती हैं और कुछ ही मिनटों में बिल्ली का नया रूप सामने आता है.

ये हैं कुछ नशाप्रेमी पशु

हाथी

भारत में हाथियों की पूजा की जाती है और इनकी सूझ-बूझ की तारीफ भी की जाती है. विज्ञान बताता है कि हाथियों के कुछ भाव इंसानों जैसे ही हैं. इंसानों की ही तर्ज पर ये शराब पीने के शौकीन होते हैं. हाथियों में शराब पीने की प्रवृत्ति भारत और अफ्रीका के कई इलाकों में बड़ी समस्या बन गई है.

ये हैं कुछ नशाप्रेमी पशु

घोड़े

जिस तरह इंसान निकोटीन पसंद करते हैं उसी तरह घोड़ों को लोकोवीड भाता है. लोकोवीड का पौधा ठंडक वाली जगहों में आसानी से मिल जाता है और इसे देखकर घोड़ों समेत गाय और भेड़ों का भी मन डोल जाता है. दो हफ्ते तक लगातार लोकोवीड का सेवन जानवरों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. इसके अधिक सेवन से मौत भी हो जाती है. जानवरों को इनसे बचाने के लिये लगातार कोशिशें की जा रहीं है.

ये हैं कुछ नशाप्रेमी पशु

डॉल्फिन

पफर मछली एक खास तरह की मछली होती है जिनमें न्यूरोटॉक्सिन नाम का ड्रग पाया जाता है. यूं तो ये मछली जहरीली मानी जाती है लेकिन डॉल्फिन पर इसका जहर नुकसान की बजाय नशा चढ़ा देता है. प्राणी विज्ञानी रॉबर्ट पिल्लै की स्टडी बनी एक डॉक्युमेंटरी फिल्म बताती है कि युवा डॉल्फिन पफर फिश को इसके नशीले व्यवहार के चलते ही पसंद करती हैं.

ये हैं कुछ नशाप्रेमी पशु

वालाबी

ऑस्ट्रेलिया और तस्मानिया के क्षेत्र में पायी जाने वाली कंगारू परिवार की एक प्रजाति वालाबी अफीम खाने का शौक रखती है. तस्मानिया के एक अखबार "द मरकरी" ने साल 2014 में वालाबी में अफीम की बढ़ती प्रवृत्ति के चलते देश के दवा कारोबार को हो रहे नुकसान पर एक रिपोर्ट छापी थी.

ये हैं कुछ नशाप्रेमी पशु

मधुमक्खियां

शराब सिर्फ इंसानों और उनके पूर्वजों को ही पसंद नहीं थी बल्कि यह पशु-पक्षियों की कई प्रजातियों को भी लुभाती है. रिसर्च के मुताबिक अगर मधुमक्खियों को मौका मिलता है तो वे 100 फीसदी शुद्ध ईथानॉल का सेवन करती हैं. 100 फीसदी ईथानॉल को पीना एक आम इंसान के लिये भी आसान नहीं है.

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