जानलेवा कपास

जानलेवा कपास

जहर में डूबे

कपास की खेती में नुकसान के कारण जान देने वालों में से एक किसान. गैर सरकारी संगठनों के मुताबिक नब्बे के दशक से अब तक दो लाख से ज्यादा किसान अपनी जान ले चुके हैं.

जानलेवा कपास

औरतें अकेली

पीछे रह जाती हैं औरतें, जिन्हें अपने परिवार को पालना है. विकल्प के अभाव में ये औरतें खेत में काम करने को मजबूर होती हैं. कई किसान खेत में कपास के साथ सोया भी उगाते हैं. भारत में कपास बहुत छोटे खेतों में बोया जाता है, मशीनों की मदद के बिना.

जानलेवा कपास

जीन संवर्धित

भारत में 90 फीसदी खेतों में अब जीन संवर्धित बीटी कपास उगाया जाता है. अमेरिकी कंपनी मोनसैंटो ने कपास के बीज में बासिलस थुरिंजिएंसिस (बीटी) बैक्टीरिया का जीन डाला ताकि पौधा कीड़ों से बचा रहे. कपास का ये बीज महंगा है, एक से ज्यादा बार बोया भी नहीं जा सकता.

जानलेवा कपास

मोनसैंटो का बाजार

भारत मोनसैंटो के लिए बड़ा बाजार है. यहां एक करोड़ बीस लाख हेक्टेयर में कपास की खेती की जाती है. वर्धा में बीटी कपास बीज के साथ ही खरपतवार हटाने वाला राउंडप भी बेचा जा रहा है. ये भी मोनसैंटो का ही है. बीटी बीज राउंडप के प्रति प्रतिरोधी है.

जानलेवा कपास

बिना सुरक्षा के

बीटी कपास के कारण विदर्भ में होने वाला कपास बिलकुल गायब हो गया है. खरपतवार हटाने वाली दवाई राउंडप हर कहीं बिकती है. ये दवाइयां अक्सर बहुत जहरीली होती हैं लेकिन फिर भी बिना मास्क और दस्ताने पहने डाली जाती हैं.

जानलेवा कपास

जब बारिश न हो

कपास के लिए जमीन का बहुत उपजाऊ होना जरूरी नहीं है लेकिन इसे बढ़ने के लिए लगातार पानी चाहिए. कुछ बीटी कपास सूखा बिलकुल नहीं झेल सकते और विदर्भ में पानी की बड़ी समस्या है. यहां के किसान मानसून पर निर्भर हैं.

जानलेवा कपास

कुल मिला के नुकसान

हर साल कपास के महंगे जीन संवर्धित बीज खरीदना, फसल का कम होना और बारिश नहीं होना.. इन सबके कारण किसान बुरी तरह कर्ज में डूब जाते हैं. वैकल्पिक नोबेल पुरस्कार जीतने वाली वंदना शिवा इसी को किसानों की आत्महत्या का मुख्य कारण मानती हैं.

जानलेवा कपास

कम फसल

बीटी कपास के इस्तेमाल के बाद से विदर्भ के कई किसान ज्यादा लागत और कम फसल की शिकायत करते हैं. परेशानी इसलिए और बढ़ जाती है कि पानी नहीं है. भारत के दूसरे हिस्सों में इसी कपास के कारण अच्छी फसल होने की भी रिपोर्टें हैं.

जानलेवा कपास

घर और स्टोरेज

महिला के घर में रखी हुई कपास. पति की मौत के बाद उसने सारी फसल घर मंगवा ली. वह उन एक करोड़ भारतीयों में शामिल है, जो खेती करते हैं. दुनिया भर का एक चौथाई कपास भारत से आता है. चीन और अमेरिका के बाद ये कपास का सबसे बड़ा उत्पादक है.

जानलेवा कपास

नाउम्मीदी

विदर्भ में किसान बीटी कपास से दुखी हैं. हालांकि क्या इन आत्महत्याओं का कारण बीटी कपास का आना था, इस पर विवाद है. ये सभी तस्वीरें इजाबेल सिप्फेल ने ली हैं.

जीन संवर्धित कपास से वैसे तो किसानों को धनी होना था लेकिन इसने उनकी जान ले ली. महाराष्ट्र के विदर्भ से किसानों की कहानी, तस्वीरों के साथ.

मीडिया सेंटर से और सामग्री

हमें फॉलो करें