टाइम बम बनता शरणार्थी संकट

शरणार्थी संकट अब जर्मनी के भीतर असर दिखाने लगा है. जर्मनी में कुछ जगहों पर शरणार्थी आपस में झगड़ रहे रहे हैं तो दूसरी तरफ इस्लाम विरोधी प्रदर्शन भी एक बार फिर होने लगे हैं.

चार हफ्ते पहले जर्मनी के ज्यादातर लोगों ने मुस्कुराहट के साथ शरणार्थियों से भरी पहली ट्रेन का स्वागत किया. चांसलर अंगेला मैर्केल को उदारता के लिए "मां मैर्केल” की संज्ञा दी गई. खुद चांसलर ने देशवासियों को संदेश दिया कि जर्मनी इस संकट से निपट सकता है. लेकिन अब धीरे धीरे माहौल बदलने लगा है. आर्थिक रूप से समृद्ध जर्मन राज्य नॉर्थ राइन वेस्टफालिया के गृह मंत्री राल्फ येगर के मुताबिक, "ज्यादातर मददगार मानसिक रूप से थक चुके हैं. इस बात के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं शरणार्थियों का आना थम रहा है. इसके उलट लगातार बड़ी संख्या में लोग यूरोप की तरफ बढ़े आ रहे हैं."


जर्मनी के सबसे ज्यादा बिकने वाले अखबार बिल्ड साइटुंग के मुताबिक जर्मनी में इस साल 15 लाख विस्थापित आएंगे वहीं सरकार का अनुमान है कि आठ लाख विस्थापितों की स्वीकार किया जाएगा. वहीं दूसरे विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल के अंत तक 10 लाख से ज्यादा विस्थापित जर्मनी पहुंचेगे. बिल्ड साइटुंग का कहना है कि देश में आ चुके विस्थापित बाद में अपने रिश्तेदारों को लाने की कोशिश भी करेंगे.

अखबार की इस रिपोर्ट के बाद जर्मनी के ड्रेस्डेन शहर में फिर इस्लाम विरोधी प्रदर्शन पेगीडा शुरू हो गया है. पेगीडा संगठन का आरोप है कि यूरोप का इस्लामीकरण हो रहा है. अब तक इसे दक्षिणपंथियों से जोड़कर देखा जाता रहा है.


लेकिन अब दूसरे आम लोग भी फिक्रमंद दिखने लगे हैं. ये लोग उग्र दक्षिणपंथी विचारधारा से सहमत नहीं हैं, लेकिन वे अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हो रहे हैं. कुछ जर्मनों को लगता है कि अगर विस्थापितों की वजह से सरकारी तिजोरी हल्की हुई तो इसका असर उनकी पेंशन और सरंचनात्मक ढांचे पर पड़ेगा.

पेगीडा व्यापक जनसमर्थन जुटाने के लिए इसी भय को भुना रहा है. दूसरी तरफ कुछ विस्थापितों के आपसी झगड़े और कट्टरपंथी रवैये की रिपोर्टें भी सामने आ रही हैं. कुछ शरणार्थी शिविरों में हाथापाई और खाने को लेकर झल्लाहट भरी नाराजगी के मामले सामने आए हैं. इसके अलावा शरणार्थी शिविरों में बलात्कार और यौन उत्पीड़न के कुछ मामलों की भी जांच चल रही है.

चांसलर मैर्केल की सीडीयू पार्टी की सहयोगी पार्टी सीएसयू के बवेरिया प्रांत के मुख्यमंत्री हॉर्स्ट जेहोफर भी सरकार की आलोचना कर रहे हैं. इनके चलते मैर्केल की लोकप्रियता में कमी आई है. पेगीडा आंदोलन वाले चांसलर और कुछ नेताओं को पोस्टरों के जरिए निशाना बना रहे हैं. जर्मनी की फोकस पत्रिका के मुताबिक विस्थापन संकट मैर्केल के राजनैतिक भविष्य को डुबो सकता है.


असली मुश्किल सर्दियों में शुरू होगी, जब कड़ाके की ठंड में इतनी बड़ी संख्या में लोगों के रहने का सही बंदोबस्त करना होगा. लेकिन इसके बावजूद जर्मनी का बड़ा तबका अब भी विस्थापितों की मदद कर रहा है. देश के करीब करीब हर छोटे बड़े शहर में शरणार्थिुयों की मदद के केंद्र चल रहे हैं. मददगारों में युवाओं की अच्छी खासी संख्या है. कई लोग अपने बच्चों को इन केंद्रों तक ले जा रहे हैं ताकि उन्हें बचपन में ही सहिष्णुता और आपसी सद्भाव का पाठ सिखाया जा सके.

पेगीडा: जर्मन समाज की उथल पुथल

5 जनवरी 2015 यानि नए साल के पहले ही सोमवार की शुरुआत जर्मनी के कई शहरों में विरोध प्रदर्शनों के साथ हुई. जर्मनी के कई राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे इस्लाम विरोधी प्रदर्शन दिखाते है कि बड़ी संख्या में आप्रवासियों के मुद्दे पर देश बंटा हुआ है. आप्रवासन का समर्थन करने वाले लोग अनेकता में एकता की भावना को बढ़ाने के लिए एक राष्ट्रीय आयोग के गठन की मांग कर रहे हैं.

पेगीडा: जर्मन समाज की उथल पुथल

जर्मनी के पूर्व में स्थित ड्रेसडेन शहर में हर हफ्ते रैलियां निकाली जा रही हैं. 22 दिसंबर 2014 की रैली में तो 17 हजार से भी ज्यादा लोग शामिल हुए. पेगीडा रैलियों का विरोध करने वाले कई गुट हैं. दिसंबर में पेगीडा ने अपना घोषणापत्र जारी कर "आपराधिक किस्म के शरणार्थियों और आप्रवासियों को बिल्कुल बर्दाश्त ना किए जाने" की मांग की.

पेगीडा: जर्मन समाज की उथल पुथल

जर्मनी के पूर्व में स्थित ड्रेसडेन शहर में हर हफ्ते रैलियां निकाली जा रही हैं. 22 दिसंबर 2014 की रैली में तो 17 हजार से भी ज्यादा लोग शामिल हुए. पेगीडा रैलियों का विरोध करने वाले कई गुट हैं. दिसंबर में पेगीडा ने अपना घोषणापत्र जारी कर "आपराधिक किस्म के शरणार्थियों और आप्रवासियों को बिल्कुल बर्दाश्त ना किए जाने" की मांग की.

पेगीडा: जर्मन समाज की उथल पुथल

'पश्चिम के इस्लामीकरण के खिलाफ यूरोप के राष्ट्रवादी' यानि पेगीडा के समर्थकों का मानना है कि इस्लामीकरण से ईसाई धर्म की संस्कृति और परंपराओं को खतरा है. वहीं हाल ही में उभरा यूरोप विरोधी दल 'अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' (एएफडी) खुद को जर्मन समाज के सच्चे प्रतिनिधियों के तौर पर पेश कर रहा है.

पेगीडा: जर्मन समाज की उथल पुथल

जर्मनी में आम लोगों के बीच इस मत को बढ़ावा देने की कोशिश हो रही है कि रिफ्यूजी आबादी की मदद करने में खर्च होने वाले धन के कारण जर्मन नागरिकों की पेंशन कम हो जाएगी और गरीबी फैलेगी.

पेगीडा: जर्मन समाज की उथल पुथल

हुम्बोल्ट यूनिवर्सिटी की सोशल साइंटिस्ट नाइका फोरुटान ने हाल ही के एक सर्वे का हवाला देते हुए बताया कि आधे से ज्यादा जर्मन अपने पड़ोस में मस्जिद बनाए जाने के खिलाफ हैं. वहीं 40 फीसदी का मानना है कि केवल जर्मन माता-पिता के बच्चों को ही जर्मन माना जाना चाहिए. वे बताती हैं कि जो लोग विदेशियों और प्रवासियों के बिल्कुल संपर्क में नहीं हैं वे उनका ज्यादा विरोध करते हैं.

पेगीडा: जर्मन समाज की उथल पुथल

जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने नए साल के अपने संदेश में देश के नागरिकों से शरणार्थियों की मदद का आह्वान किया. उन्होंने जनता से शरणार्थियों और इस्लामीकरण का विरोध करने वाली पेगीडा रैलियों का विरोध करने की अपील की. केवल 2014 में ही जर्मनी में दो लाख से ज्यादा शरणार्थी अर्जियां आईं.


ओएसजे/एमजे

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