ट्रंप की अफगानिस्तान नीति पर बंटी दुनिया

अफगानिस्तान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के भाषण से ठीक पहले अफगान राजधानी काबुल पर रॉकेट हमला हुआ और भाषण के बाद तालिबान ने जिहाद जारी रखने की धमकी दी. अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी ने ट्रंप के फैसले का स्वागत किया.

राष्ट्रपति ट्रंप ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की तादाद बढ़ाने की घोषणा की है और कहा है कि वे इस अभियान में साथियों की भी मदद लेंगे. ट्रंप ने खुलकर स्वीकार किया कि उनकी शुरुआती भावना थी कि सेना को वापस बुलाया जाए लेकिन उनके सुरक्षा सलाहकारों ने उन्हें अभियान में तेजी लाने के लिए राजी कर लिया.

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने देश में अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति बढ़ाने के अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा है कि ट्रंप का फैसला इस विवाद में महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में अमेरिका की जारी प्रतिबद्धता की मिसाल है.

इसके विपरीत इस्लामी कट्टरपंथी तालिबान ने अमेरिका को युद्ध की धमकी दी है. तालिबान के प्रवक्ता सबीहुल्ला मुजाहिद ने अमेरिकी सैनिकों की पूरी वापसी की मांग करते हुए कहा कि जब तक एक भी अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान में रहेगा जिहाद जारी रहेगा. इस समय अफगानिस्तान में अमेरिका के 8,400 सैनिक तैनात हैं. योजना 4,000 और सैनिकों को भेजने की है.

नाटो के महासचिव येंस स्टॉल्टनबर्ग ने अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ युद्ध में अमेरिकी राष्ट्रपति की प्रतिबद्धता का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि सैन्य सहबंध नाटो बिनाशर्त अफगानिस्तान के साथ खड़ा है. उन्होंने कहा कि यह नाटो का लक्ष्य है कि अफगानिस्तान फिर कभी उन आतंकवादियों की सुरक्षित पनाह न बने, जो सहबंध के देशों और उनके साथियों पर हमला कर सकें.

नाटो के अनुसार इस समय अफगान सुरक्षा बलों को प्रशिक्षित करने के लिए 12,400 सैनिक तैनात हैं. स्टॉल्टनबर्ग ने कहा कि पिछले ही हफ्ते नाटो के 15 देशों ने अफगानिस्तान में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाने की रजामंदी जताई है. सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति के कारण वहां तैनात सैनिकों की संख्या अगले साल बढ़कर 15,800 कर दी जायेगी.

पाकिस्तान में विपक्षी नेता इमरान खान ने भी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान की कुर्बानियों पर जोर दिया है और कहा है कि पाकिस्तान को इससे सबक लेना चाहिए कि वह दूसरों की लड़ाई न लड़े.

उधर चीन ने अपने साथी पाकिस्तान का डॉनल्ड ट्रंप के आरोपों से बचाव किया है. अपने भाषण में ट्रंप ने कहा था कि पाकिस्तान तालिबान और दूसरे आतंकवादी संगठनों को पनाह दे रहा है और प्रतिद्वंद्वी भारत के प्रभाव को कम करने के इरादे से उसे बर्दाश्त कर रहा है. चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ अग्रिम मोर्चे पर लड़ रहा है और उसने बड़ी कुर्बानियां और योगदान दिया है. हुआ चुनयिंग ने कहा कि चीन इस बात का स्वागत करेगा कि पाकिस्तान और अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ अपना संघर्ष आपसी सम्मान के आधार पर चलायेंगे और इलाके और पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए सहयोग करेंगे.

एमजे/एनआर (डीपीए, रॉयटर्स)

आतंकियों ने मिटा दीं जो विश्व धरोहरें

मोसुल में अल-नूरी मस्जिद

इराक के मोसुल में स्थित ऐतिहासिक अल-नूरी मस्जिद और उसकी मीनार अल-हदबा को आईएस ने तबाह कर दिया है. इसी मस्जिद से 2014 में अबू बकर अल बगदादी ने इस्लामी खिलाफत की घोषणा की थी. यह मीनार पीसा की प्रसिद्ध मीनार की ही तरह झुकी हुई थी और 840 सालों से वहां खड़ी थी. हालांकि आईएस इसे गिराने का इल्जाम अमेरिका के सिर रख रहा है.

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माली में टिम्बकटू

माली के उत्तर में स्थित इस सदियों पुराने मकबरों को इस्लामी कट्टरपंथी गुट 'अंसार दिने' के विद्रोहियों ने 2012 में नष्ट कर दिया. 15वीं और 16वीं सदी में इस्लामिक शिक्षा के केंद्र के रूप में विख्यात टिम्बकटू यूनेस्को के विश्व धरोहरों में शामिल है.

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आस्था का प्रतीक

2014 की इस तस्वीर में एक व्यक्ति टिम्बकटू की ही नष्ट की गई एक कब्र के सामने सिर झुकाए हुए. अपने असली स्वरूप के मुकाबले यह कितना अलग हो गया है.

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दोबारा निर्माण की चुनौती

कई मकबरों को संयुक्त राष्ट्र संगठन दुबारा बनाने की कोशिश कर रहा है. पवित्र माने जाने वाला अल्फा मोया के मकबरे का ख्याल रखने की जिम्मेदारी यहीं रहने वाले कुछ लोगों को सौंपी गई है, जैसे साने शिरफी (तस्वीर में) का परिवार.

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सीरिया का पाल्मिरा

इस्लामिक स्टेट के आतंकियों ने 2015 में सीरिया के पाल्मिरा में 2,000 साल पुराने टेंपल ऑफ बेल, आर्क डि ट्रायंफ जैसे कई गुंबद नष्ट कर डाले. फोटोग्राफर ने हाथ में इस जगह की पहले की तस्वीर पकड़े हुए वर्तमान स्थिति की तुलना करते हुए. बाल मंदिर की यह फोटो 2014 में ली गई थी.

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मार एलेना, सीरिया

सीरियाई ईसाइयों के लिए मार एलेना सबसे महत्वपूर्ण मठों में से एक था. केंद्रीय सीरिया के सर्जातेन में स्थित पांचवी सदी की ये ईसाई मॉनेस्ट्री भी आतंकियों के हमले की शिकार बनी गई.

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धरती में मिलाया

मार एलेना को 2015 में आईएस ने धरती में मिला दिया. इंटरनेट पर डाले गए वीडियो में इसे बुलडोजरों के नीचे कुचलते हुए दिखाया गया था. इस शहर को आईएस के कब्जे से छु़ड़ा लिया गया है. अंदर से पूरी तरह जल चुके मठ के पुनर्निर्माण का काम चल रहा है.

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इराक का अल-हद्रा

इस जगह को प्रथम अरब साम्राज्य की राजधानी माना जाता है. अपनी मोटी दीवारों के कारण 116 और 198 ईसवी में रोमन आक्रमणकारियों से यह बच गया था. लेकिन 2015 में नहीं बच सका.

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आईएस और अल-हद्रा

साल 2015 की शुरुआत में आईएस ने अल-हद्रा के कई हिस्सों को नष्ट कर डाला. यह फोटो आईएस मिलिशिया द्वारा जारी वीडियो से ही निकाली गई है. इस वीडियो के सही होने की पुष्टि होने के बाद उत्तरी इराकी शहर मोसुल में हजारों साल पुरानी मूर्तियों को नष्ट करने की खबर आई.

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अफगानिस्तान की बामियान घाटी

बामियान प्रांत में महात्मा बुद्ध की दो विशाल मूर्तिया होती थीं. इन्हें बौद्ध भिक्षुओं ने करीब 1,500 साल पहले पहाड़ को काट कर बनाया था. यह मूर्तियां अफगानिस्तान में इस्लामपूर्व युग की गवाह थीं. देखिए 1973 की ये तस्वीर जिसमें 53 मीटर ऊंची प्रतिमा दिख रहे हैं.

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नहीं रही सबसे ऊंची मूर्ति

दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति होने का गौरव प्राप्त बमियान के बुद्ध की मूर्ति को कट्टर इस्लामी तालिबानों ने सन 2001 में नष्ट कर दिया. टैंकों, मिसाइलों और डायनामाइट लगा कर कई हफ्तों तक तालिबान ने इस मूर्ति को तबाह करने की कोशिश की. 2003 से बामियान घाटी के सांस्कृतिक लैंडस्केप और पुरातात्विक स्थल यूनेस्को के विश्व धरोहरों में शामिल हैं.

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