डीएनए रिपेयर को नोबेल पुरस्कार

क्षतिग्रस्त डीएनए को कोशिकाएं कैसे सुधारती हैं, ऐसी अहम खोज करने वाले तीन वैज्ञानिकों को इस साल रसायन शास्त्र के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.

तीनों वैज्ञानिकों ने कोशिकाओं के डीएनए रिपेयर तंत्र के बारे में अहम खोज की है. स्वीडन के थोमास लिंडाल, अमेरिका के पॉल मॉडरिश और अमेरिकी तुर्क वैज्ञानिक अजीज सैंकर के नाम का एलान करते हुए रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेस ने कहा, "डीएनए रिपेयर पर किये गए उनके काम से "यह आधारभूत जानकारी मिली है कि जीवित कोशिकाएं कैसे काम करती हैं." इस जानकारी की मदद से कैंसर का नया इलाज खोजा जा सकता है.

डीएनए एक ऐसा मॉलिक्यूल है जिसमें जीन छुपे होते हैं. 1970 तक यह समझा जाता था कि डीएनए हमेशा स्थिर रहता है. लेकिन स्वीडिश वैज्ञानिक लिंडाल ने साबित किया है कि डीएनए तेजी से विघटित होता है. सूर्य की पराबैंगनी किरणों और कैंसर संबंधी तत्वों का उस पर बुरा असर पड़ता है. इसी दौरान लिंडाल को महसूस हुआ कि डीएनए के तेजी से विघटित होने के बाद भी इंसान कई साल तक जिंदा रहता है, यानि कोई तंत्र विघटित होते डीएनए को फिर से दुरुस्त करता है.

इसी से जुड़ी एक बड़ी कामयाबी सैंकर को मिली. अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी से जुड़े सैंकर ने कोशिकाओं के डीएनए रिपेयर को सिद्धांत को बूझा. उन्होंने ऐसा तंत्र बनाया जिससे पता चला कि कोशिकाएं कैसे पराबैंगनी प्रकाश से क्षतिग्रस्त हुए डीएनए को दुरुस्त करती हैं.

तीसरे वैज्ञानिक मॉडरिश ने यह साबित किया कि कोशिकाएं कैसे विभाजन के दौरान होने वाली गलतियों को सुधारती हैं. विभाजन के दौरान बनने वाली नई कोशिकाओं में भी डीएनए होता है, लेकिन बंटवारे के दौरान अगर कोई गलती हो तो कोशिकाएं इसे खुद ही सुधार लेती हैं.

इंसान का प्रतिरोधी तंत्र भी इसी आधार पर चलता है, लेकिन कैंसर हो जाए तो वह भी इसी कारण फैलता है. असल में रिपेयर तंत्र के चलते कैंसर कोशिकाएं लगातार जीवित रहती हैं. लेकिन अगर कैंसर कोशिकाओं के भीतर इस रिपेयर तंत्र को ही खत्म कर दिया जाए तो जानलेवा बीमारी नहीं फैलेगी.

तीनों वैज्ञानिकों को 10 दिसंबर को स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा.

किचन में कैंसर पैदा करने वाली चीजें

रेड मीट

हल्की फुल्की मात्रा में रेड मीट का सेवन नुकसानदेह नहीं है, लेकिन उसकी अति नुकसान पहुंचाती है. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की एक स्टडी के मुताबिक रेड मीट में एक प्रकार का सिलिसिक एसिड होता है जिससे कैंसर हो सकता है.

किचन में कैंसर पैदा करने वाली चीजें

कार्बोनेटेड ड्रिंक्स

कोका कोला, पेप्सी और अन्य कार्बोनेटेड ड्रिंक्स में ना सिर्फ अत्यधिक चीनी होती है बल्कि बहुत सारा सोडियम भी होता है. इसके अलावा डायट सॉफ्टड्रिंक्स और भी हानिकारक होती हैं क्योंकि उनमें कृत्रिम स्वीटनर के इस्तेमाल के कारण सोडियम की मात्रा और भी ज्यादा होती है. अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक मानव मस्तिष्क इन पेय पदार्थों के ऊपर अपनी निर्भरता विकसित कर लेता है.

किचन में कैंसर पैदा करने वाली चीजें

मैदा

मैदे में सफेदी ब्लीच की प्रक्रिया के कारण आती है. यह ब्लीच क्लोरीन गैस से की जाती है. इसी ब्लीच का इस्तेमाल तरल रूप में कपड़ों के लिए भी किया जाता है. इससे ना सिर्फ इस सफेद आटे में से सारा पोषण धुल जाता है बल्कि कैंसर का खतरा भी बढ़ता है.

किचन में कैंसर पैदा करने वाली चीजें

नमकीन स्नैक

बहुत ज्यादा नमक वाले स्नैक से बचना चाहिए क्योंकि इनमें कैंसर पैदा करने वाले तत्व मौजूद होते हैं. चिप्स को कुरकुरा बनाए रखने के लिए निर्माता इसमें एक्रिलामाइड मिलाते हैं जो कि सिगरेट में भी पाया जाता है. इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर के मुताबिक एक्रिलामाइड कैंसर पैदा करने वाली चीज मानी जाती है.

किचन में कैंसर पैदा करने वाली चीजें

वेजिटेबल ऑयल

सूर्यमुखी से प्राप्त वेजिटेबल ऑयल को देखने में अच्छा बनाने के लिए कई बार रंगाई की प्रक्रिया से गुजारा जाता है. इस तेल में ओमेगा 6 फैटी एसिड होता है जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा है. लेकिन अगर अत्यधिक मात्रा में इस्तेमाल किया जाए तो ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर का खतरा रहता है. ये नतीजे द जर्नल ऑफ क्लीनिकल इंवेस्टिगेशन में प्रकाशित किए गए.

किचन में कैंसर पैदा करने वाली चीजें

प्रोसेस्ड मीट

सॉसेज और कॉर्न्ड बीफ जैसी चीजें खाने में बेशक लजीज होती हैं लेकिन इनमें नमक और प्रिजर्वेटिव की बड़ी मात्रा होती है. प्रोसेस्ड या संसाधित मीट को तैयार करने में इस्तेमाल किया जाने वाला सोडियम नाइट्राइट कैंसर पैदा कर सकता है.

किचन में कैंसर पैदा करने वाली चीजें

नॉन ऑर्गेनिक फल

इस तरह के फलों को पैदा करने के लिए इस्तेमाल में होने वाले पेस्टिसाइड और नाइट्रोजन फर्टिलाइजर शरीर के लिए हानिकारक हैं. न्यूकासल यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों के मुताबिक इस तरह के फलों के नियमित इस्तेमाल से कैंसर का खतरा रहता है.

ओएसजे/एमजे (एपी)

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