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डोलते डालते कांग्रेस का साल पार

२५ दिसम्बर २०१२

एफडीआई, महंगाई और घोटालों के चक्रव्यूह में फंसी भारत की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस किसी तरह साल 2012 पार करने में कामयाब हो गई. ममता बनर्जी के जोर के झटके को कांग्रेस ने मुलायम और माया के सहारे झेल लिया.

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तस्वीर: Reuters

भारत में आम चुनाव में अब साल भर बाकी हैं. जहां एक तरफ बीजेपी नरेंद्र मोदी की हैट ट्रिक के भरोसे आसमान में उड़ान भर रही है, वहीं कांग्रेस लगातार गिर रही छवि से निपट पाने में नाकाम दिख रही है. हालांकि संसद के अंदर उसने किसी न किसी तरह अपना बहुमत दिखा ही दिया है. उत्तर प्रदेश की दो पार्टियां समाजवादी पार्टी और बीएसपी सरकार के लिए तारणहार बन कर आईं.

बीजेपी के सबसे बड़े नेताओं में शामिल नरेंद्र मोदी की जीत के बाद प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर उनका नाम तेजी से आगे बढ़ चला है. अब कांग्रेस के पास बचे हुए समय में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट करने का कम समय बचा है क्योंकि 80 साल के हो चुके मनमोहन सिंह एक और कार्यकाल के लिए तैयार नहीं दिखते हैं.

मोदी का असर

कांग्रेस के अंदर एक धड़ा समझता है कि मोदी की वजह से धर्म के आधार पर वोटिंग हो सकती है और ऐसे में मुस्लिम वोटर कांग्रेस का साथ दे सकते हैं, लेकिन दूसरे तबके का मानना है कि नेतृत्व का संकट झेल रही बीजेपी के पास मोदी के तौर पर एक मजबूत नेता आ चुका है और वह उसके पीछे लामबंद हो सकती है.

Indien Delhi Nationalist Congress Party Singh Rahul Gandhi
तस्वीर: picture-alliance/dpa

हालांकि आने वाले साल में क्षेत्रीय पार्टियां भी कांग्रेस और बीजेपी से इतर तीसरे मोर्चे की कवायद करती दिख सकती हैं. तृणमूल कांग्रेस के अलावा बाबूलाल मरांडी की झारखंड विकास मोर्चा और असाउद्दीन उवैशी की एआईएमआईएम ने भी यूपीए छोड़ दिया है और इन सबकी तीसरे मोर्चे में जगह बन सकती है.

चुनावों पर नजर

अगले साल मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली, कर्नाटक, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम और नगालैंड में विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां के नतीजे कांग्रेस के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं.

कांग्रेस के नेता और रणनीतिकार मणिशंकर अय्यर का मानना है कि यूपीए 3 की भी पूरी संभावना है, बशर्ते धर्मनिरपेक्ष ताकतों और जेडीयू जैसी दूसरी शक्तियों को साथ लाया जा सके. उनका कहना है कि मोदी की जीत से कांग्रेस और यूपीए को ही फायदा हो सकता है क्योंकि इससे बीजेपी के अंदर विकास के लिए मंथन तेज हो सकता है और नेतृत्व का संकट भी गहरा सकता है.

अय्यर का कहना है कि इस साल कांग्रेस के लिए एकजुटता के लिहाज से अच्छा रहा.

अच्छा खत्म हुआ साल

पार्टी का कहना है कि विपक्ष ने एफडीआई के मुद्दे पर सरकार को घेरने की जो कोशिश की, उसमें वह नाकाम रही और इस तरह से कांग्रेस साल को अच्छे नोट पर खत्म कर रही है. इसी तरह बैंकिंग बिल में भी कांग्रेस को सफलता हासिल हुई.

इस साल के विधानसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को चौथे नंबर पर जाना पड़ा, जबकि राहुल गांधी निजी तौर पर चुनाव प्रचार में लगे थे.

Indien Wahlkampf mit Rahul Gandhi in Uttar Pradesh
तस्वीर: Reuters

पंजाब के चुनाव में कांग्रेस अति उत्साह और अति आत्मविश्वास के साथ उतरी और सीधे हार का मुंह देखना पड़ा. गोवा में भी पार्टी हार गई और गुजरात में वह पिछले दो बार की तरह इस बार भी कुछ नहीं कर पाई और मोदी को आराम से जीतते हुए देखती रही.

जीत के नाम पर मणिपुर के अलावा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के छोटे और कम महत्वपूर्ण राज्य ही कांग्रेस के हाथ लगे.

घोटाले में नाम

साल के जाते समय में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वडेरा भी सुर्खियों में रहे. भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम चला रहे अरविंद केजरीवाल ने उन पर करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाया लेकिन समय के साथ साथ मामला मंदा पड़ गया.

कांग्रेस से जुड़े कुछ बड़े नेता भी घोटाले की चपेट में आए. वीरभद्र सिंह ने इसी आधार पर केंद्र सरकार से इस्तीफा दे दिया लेकिन साल जाते जाते हिमाचल में कांग्रेस को जीत मिली और उन्होंने मुख्यमंत्री का ताज पहन लिया.

कांग्रेस के लिए वरिष्ठ नेता प्रणब मुखर्जी के लिहाज से बेहद अहम रहा. साल के शुरू में मुखर्जी ने 2012 का बजट पेश किया लेकिन कुछ महीनों बाद वह राष्ट्रपति बना दिए गए. ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे को गृह मंत्री बना दिया गया, जबकि पी चिदंबरम को एक बार फिर वित्त विभाग सौंप दिया गया.

नया साल आते आते कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने एक बार फिर मंत्रिमंडल में फेरबदल किया. अब आने वाले साल में कांग्रेस को महंगाई और घोटालों से निजात पाते हुए अगले आम चुनाव की तैयारी करने की चुनौती होगी.

एजेए/एमजे (पीटीआई)

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