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तालिबान कैदियों को रिहा करेगा पाकिस्तान

१४ नवम्बर २०१२

पाकिस्तान तालिबान कैदियों को रिहा करने पर रजामंद हो गया है. अफगान शांति वार्ताकारों के साथ बातचीत में पाकिस्तानी पक्ष ने यह बात कही. इस कदम के जरिए पाकिस्तान अफगानिस्तान में शांति की कोशिशों को परवान चढ़ाना चाहता है.

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तस्वीर: picture-alliance / dpa

अफगान अधिकारियों को उम्मीद है कि तालिबान के शीर्ष कमांडरों से सीधे संपर्क से शांति की कोशिशों में उन्हें फायदा मिलेगा. अफगान अधिकारी लंबे समय से तालिबान कैदियों से मिलने की मांग कर रहे हैं. शांतिवार्ता में शामिल एक अफगान अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "हम इस बारे में पक्के तौर पर नहीं कह सकते कि वे लोग शांतिवार्ता में मददगार होंगे या नहीं लेकिन शांति की कोशिश में पाकिस्तान की तरफ से यह एक सकारात्मक कदम है." इस अधिकारी ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी कि कैदियों की रिहाई कब होगी.

पाकिस्तानी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी यह तय नहीं हुआ है कि अफगान तालिबान के दूसरे सबसे बड़े नेता रहे मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को रिहा किया जाएगा या नहीं. अफगान अधिकारी मानते हैं कि बरादर का अब भी इतना सम्मान है कि वह तालिबान शांति के लिए रजामंद करा सकते हैं. तालिबान को अमेरिकी नेतृत्व वाली नाटो सेनाओं और अफगान से लड़ते हुए दशक भर से ज्यादा हो चुका है. पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों ने अभी यह भी नहीं बताया है कि रिहा होने वालों में कौन से नाम शामिल हैं. अधिकारियो का कहना है कि अभी इसका ब्यौरा तैयार नहीं हुआ है.

अफगान सरकार और चरमपंथियों के बीच राजनीतिक समझौते को अफगानिस्तान में नाटो की युद्धक सेना के लौटने के बाद शांति और स्थिरता का सबसे अच्छा फॉर्मूला माना जाता है. अफगानिस्तान के शांति वार्ताकारों के लिए यह एक बड़ी कामयाबी है. वार्ताकारों का दल पाकिस्तान को कैदियो की रिहाई के लिए मनाने इस्लामाबाद आया था. यह दल तालिबान और अफगान सरकार के बीच भरोसा कायम करने की कोशिश में जुटा है.

Taliban-Kämpfer
तस्वीर: AP

अफगानिस्तान की सरकार तालिबान से सीधे बातचीत कर पाने में अब तक नाकाम रही है और 2014 में नाटो की युद्धक सेनाओं के लौटने से पहले इसकी उम्मीद भी नहीं दिख रही. तालिबान ने मार्च में ही अमेरिका के साथ बातचीत स्थगित करने का एलान कर दिया. अगर अफगान तालिबान कैदियों की रिहाई हो भी जाती है तो तुरंत कोई बड़ा बदलाव आ जाएगा इसकी उम्मीद नहीं है. हां इससे इतना जरूर होगा कि पाकिस्तान की छवि इससे सुधरेगी और वह अपनी इस दलील को मजबूत कर सकेगा कि वह अफगानिस्तान में स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है.

अफगान अधिकारी पाकिस्तान को तालिबान के साथ बातचीत में बाधा डालने वाला ही मानते रहे हैं. अफगान और अमेरिकी अधिकारी पाकिस्तान पर हक्कानी जैसे कुख्यात चरमपंथी गुटों का इस्तेमाल अफगानिस्तान में अशांति फैलाने के लिए करने का आरोप लगाते रहे हैं. इन अधिकारियों के मुताबिक अफगानिस्तान में भारत के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देने के लिए पाकिस्तान ऐसा करता है. हालांकि पाकिस्तान ने इन आरोपों से इनकार किया है.

एनआर/एमजी (रॉयटर्स)

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