तुर्की-सीरिया सीमा पर अटका शरणार्थियों का भविष्य

जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल शरणार्थी समस्या को सुलझाने के लिए तुर्की की मदद चाहती हैं. तुर्की को एवज में अरबों यूरो मिल रहा है, लेकिन अलेप्पो पर सेना के हमले के बाद लाखों नए शरणार्थी तुर्की-सीरिया सीमा पर जमा हैं.

जर्मन चांसलर मैर्केल अंकारा में प्रधानमंत्री अहमत दावुतोग्लू और राष्ट्रपति रेचेप तय्यप एरदोवान से बात कर रही हैं. सवाल यह है कि शरणार्थियों को यूरोप आने से रोकने में तुर्की क्या भूमिका निभा सकता है और इसके लिए उसे किस तरह की मदद की जरूरत है. यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब सीरिया छोड़ कर निकलना चाह रहे लाखों लोग तुर्की से लगी सीमा पर फंसे हैं.

फिलहाल मैर्केल और दावुतोग्लू की बातचीत के बाद जर्मनी और तुर्की ने तुर्क सीरियाई सीमा पर जमा शरणार्थियों के लिए फौरन मदद शुरू करने का फैसला किया है. तुर्क प्रधानमंत्री ने कहा है कि राहत संगठनों की मदद से यह अभियान तुरंत शुरू किया जाएगा. जर्मनी की ओर से मदद अभियान में तकनीकी राहत संगठन टीएचडब्ल्यू और तुर्की की ओर से सरकारी आपदा राहत संस्था भाग लेगी.

यूरोप में प्रवेश कर रहे शरणार्थियों की तादाद को किसी भी तरह कम करने की कोशिश में ईयू और तुर्की के बीच पिछले साल हुए समझौते से मैर्केल ने काफी उम्मीदें लगाई थीं. इसमें तुर्की ने अपनी सीमा की बेहतर सुरक्षा का वचन दिया था. इस समझौते के अंतर्गत यूरोपीय सीमाओं को सुरक्षित रखने के एवज में तुर्की को तीन अरब यूरो की मदद मिलना तय हुआ था.

25 नवंबर 2015 को इस समझौते पर हस्ताक्षर के साथ ही तुर्की में पहुंच चुके करीब 27 लाख सीरियाई शरणार्थियों को भी मदद दी जानी थी. लेकिन बीते कुछ हफ्तों में सीरिया से घरबार छोड़ कर भाग रहे लाखों नए लोग तुर्की की सीमा पर जा पहुंचे. इसमें से ज्यादातर सीरियाई शहर अलेप्पो से जान बचा कर भागे थे, जहां विपक्ष के नियंत्रण वाले इलाके में रूसी बमबारी के बीच सरकारी सेनाओं का शिकंजा कसता जा रहा है.

इतनी बड़ी संख्या में शरणार्थियों को प्रवेश ना देकर तुर्की ने अपनी सीमा बंद कर ली. उसका कहना है कि वे शरणार्थियों का और भार नहीं उठा सकते. केवल कड़े अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते ही ऐसा हो सकता है कि बेमन से ही सही लेकिन तुर्की अपनी सीमाएं खोल कर इन नए सीरियाई लोगों को आने दे.

जाहिर है नए शरणार्थियों के बोझ को अपनी क्षमता से बाहर बता चुका तुर्की इस अतिरिक्त मदद के लिए और धन की मांग कर सकता है. पिछले साल तुर्की के रास्ते अनगिनत लोगों ने यूरोप में प्रवेश किया. साल 2015 में केवल जर्मनी में ही 10 लाख से अधिक शरणार्थी पहुंचे.

जर्मन चांसलर की तुर्की यात्रा

मैर्केल की शरणार्थियों के लिए जर्मनी के द्वार खोल देने और तुर्की को ईयू सदस्यता दिलाने में मदद की बात पर उनकी पार्टी सीएसयू के कुछ वरिष्ठ नेता उनसे नाराज हैं. उनका कहना है कि तुर्की को ईयू सदस्यता उनके अजेंडा में नहीं है.

जर्मन चांसलर की तुर्की यात्रा

यूरोपीय आयोग तुर्की को एक अरब यूरो की सहायता राशि देने वाला है जिससे तुर्की शरणार्थियों को नौकरी दिलवाने और उनके बच्चों को शिक्षा देने पर खर्च करेगा. इस मदद का मुख्य कारण शरणार्थियों को तुर्की के ही कैंपों में रहने के लिए प्रोत्साहित करना और यूरोप में आने से रोकना है.

जर्मन चांसलर की तुर्की यात्रा

मैर्केल ने तुर्की राष्ट्रपति रेचेप तय्यप एरदोवान और अहमेत दावुतोग्लू से मुलाकात की. इसके एक दिन बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका देश कोई "यातना शिविर नहीं" है और वे ईयू को खुश रखने के लिए प्रवासियों को स्थायी रूप से नहीं रखेंगे. प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बात उन्होंने मैर्केल से भी कही थी कि वे पैसे लेकर शरणार्थियों को तुर्की में ही नहीं रोकने वाले.

जर्मन चांसलर की तुर्की यात्रा

इस समय यूरोप के सामने शरणार्थी संकट काफी बड़े स्तर की समस्या बन चुका है जिसे सुलझाने के लिए मैर्केल हर संभव रास्ता तलाश रही हैं. वहीं जर्मनी के ही कुछ कंजर्वेटिव नेता यूरोपीय सीमाओं को और सुरक्षित बनाने और वहां बाड़ खड़ी करने के प्रस्ताव पर समर्थन जुटाने में लगे हैं.

जर्मन चांसलर की तुर्की यात्रा

तुर्की में 20 लाख से भी अधिक सीरियाई शरणार्थियों ने शरण ली हुई है. तुर्की प्रधानमंत्री अहमेत दावुतोग्लू और चांसलर मैर्केल की मुलाकात के बाद दोनों पक्षों ने किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं की लेकिन मैर्केल ने तुर्की के लिए आर्थिक और मौद्रिक मामलों पर वार्ता शुरु करने की बात कही है.

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