तैयार हो रही हैं सोलर सड़कें

फ्रांस में सौर सड़कें बनने जा रही हैं. 1,000 किलोमीटर लंबी सड़कों से सौर ऊर्जा पैदा होगी. क्या यह भविष्य है या फिर अति खर्चीला प्रयोग?

फ्रांस में 1,000 किलोमीटर सौर सड़कें बनाने की योजना है. फ्रांस की पर्यावरण मंत्री सेगोलेन रोयाल के मुताबिक यह योजना अगले पांच साल में पूरी कर ली जाएगी. देश की 1,000 किलोमीटर लंबी सड़कों को फोटोवोल्टिक प्लेटों से ढका जाएगा. अनुमान है कि इससे 50 लाख लोगों को बिजली मुहैया कराई जा सकती है.

यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह का प्रयोग किया जा रहा है. हॉलैंड में साइकिलों के लिए 70 मीटर लंबा सोलर रास्ता बनाया जा रहा है. इस प्रयोग के नतीजे उम्मीद से कहीं ज्यादा अच्छे आ रहे हैं. 70 मीटर का रास्ता 3,000 किलोवॉट बिजली पैदा कर रहा है. इससे एक छोटे घर की साल भर की जरूरत पूरी की जा सकती है.

इस तरह बनती है सोलर सड़क

तो क्या दुनिया के बाकी देशों को भी ऐसी सड़कें बनानी चाहिए. फिलहाल इमारतों, पार्किंग और पार्कों में सोलर पैनल लगाए जाते हैं. सोलर सड़कों पर काम कर रही कंपनी सोलमूव के प्रमुख डोनल्ड मुलर-यूडेक्स के मुताबिक, "अगर हम सड़कों का इस्तेमाल करते हैं तो हमें प्राकृतिक इलाकों या मैदानों की जरूरत नहीं रहेगी."

यूरोपीय संघ में सड़कों की कुल लंबाई 1.05 करोड़ किलोमीटर है. हो सकता है कि भविष्य में ये सड़कें ऊर्जा उत्पादन में बड़ी भूमिका निभाएं. हालांकि बहुत ज्यादा इस्तेमाल होने वाले हाईवे पर सोलर पैनल लगाना बेकार होगा क्योंकि ट्रैफिक के चलते दिन भर छाया हावी रहेगी. लेकिन धूप भरे गांव के रास्तों या कम इस्तेमाल होने वाली सड़कों को सोलर रोड में बदला जा सकता है.

मुलर-यूडेक्स के मुताबिक सोलर सड़कें सोलर पार्क जितनी प्रभावी नहीं हो सकतीं. लेकिन हर वर्ग मीटर सोलर सड़क से प्रतिवर्ष 100 किलोवॉट बिजली हासिल की जा सकती है. अपनी गणना के आधार पर मुलर-यूडेक्स कहते हैं, "30 वर्ग मीटर सोलर रोड एक घर के लिए पर्याप्त है, इतनी बिजली से एक इलेक्ट्रिक कार को साल भर चार्ज किया जा सकता है. वो 11,000 किलोमीटर चलेगी."

ज्यादा ट्रैफिक में वाली जगहों पर कोई फायदा नहीं

लेकिन कुछ विशेषज्ञ इस विचार से बहुत ज्यादा सहमत नहीं हैं. उनके मुताबिक सड़कों की खास बनावट होती है और सुरक्षा के लिहाज से इससे समझौता नहीं किया जाना चाहिए. हालांकि सोलर सड़कें बनाने वाली कंपनियां इस तरह के जोखिमों से इनकार कर रही हैं. कंपनियों का कहना है कि सोलर सेल सुपरइम्पोज्ड तरीके से डाले जाते हैं ताकि सड़क पर टायर की पकड़ बनी रहे.

फिलहाल जर्मनी में एक वर्ग मीटर सोलर सड़क का खर्च करीब 200 यूरो बैठ रहा है. यह घर में सोलर पैनल लगाने से थोड़ा महंगा है पर मांग बढ़ी तो दाम कम होंगे. लेकिन दाम गिरने के बावजूद सोलर सड़क तारकोल की रोड के मुकाबले ज्यादा खर्चीली होगी.

रात में चमकने वाली सड़क

रात होते ही यह सड़क नीले और हरे रंगों में जगमगाने लगती है. इसका नाम है फान गॉग रूजगार्ड साइकल लेन. यह रोशनी बल्बों की नहीं, पत्थरों की है.

रात में चमकने वाली सड़क

पत्थरों का पैटर्न मशहूर पेंटर फान गॉग की पेंटिंग 'स्टारी नाइट' से प्रेरित है. फान गॉग को गुजरे 125 साल हो चुके हैं पर आज भी लोग उनकी बनाई पेंटिंग देखने एम्स्टर्डम पहुंचते हैं.

रात में चमकने वाली सड़क

ये पत्थर दिन में सूरज की रोशनी से चार्ज हो जाते हैं और रात भर जगमगाते रहते हैं. हालांकि इनकी रोशनी को पूरी रात बरकरार रखने के लिए थोड़ी बिजली की भी जरूरत पड़ती है.

रात में चमकने वाली सड़क

इस सड़क को डिजाइन किया है डान रूजगार्ड ने जो अंधेरे में अपनी रोशनी की कला के लिए मशहूर हैं. इस प्रोजेक्ट के जरिए वे भविष्य कि लिए ऐसी सड़कों का उदाहरण पेश कर रहे हैं जिनके लिए अलग से बिजली का इंतजाम नहीं करना पड़ेगा.

रात में चमकने वाली सड़क

नीदरलैंड्स सरकार ने 2050 तक कार्बन डायोक्साइड उत्सर्जन को 95 फीसदी कम करने का लक्ष्य रखा है. सरकार को उम्मीद है कि साइकिलों और इस तरह की सड़कों के निर्माण से वह अपने लक्ष्य तक पहुंच सकेगी.

रात में चमकने वाली सड़क

नीदरलैंड्स के वित्त मंत्री हेंक कांप ने कहा है कि सरकार हर साल दो अरब यूरो का निवेश कर रही है, "हमने साइकिल की सड़क से शुरुआत की है, धीरे धीरे हम बसों और कारों तक पहुंचेंगे. हम इसमें भारी निवेश कर रहे हैं."

रात में चमकने वाली सड़क

नीदरलैंड्स में इस तरह की ऊंची साइकलों का चलन है. इन्हें हॉलांडराड यानि हॉलैंड की साइकिल कहते हैं. माना जाता है कि देश में आबादी से ज्यादा साइकिलें मौजूद हैं.

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