दिल्ली की हवा खराब

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 6 अप्रैल को वायु की गुणवत्ता मापने वाला नया इंडेक्स लॉन्च किया. वायु प्रदूषण के मामले में दुनिया में अव्वल भारतीय राजधानी दिल्ली के हालात सुधारने के कदमों के बजाए क्या मानक बदल देना काफी है.

चीन भी भारत की ही तरह बिगड़ती हवा से परेशान है. प्रदूषित वायु के कारण शहरों को लीलते स्मॉग यानि प्रदूषित धुएं और धुंध से निपटने के लिए चीन ने ड्रोनों का सहारा लिया है. यह ड्रोन आकाश में घूमते हुए पर्यावरण को गंदा करने वाले अवैध कारकों पर गुप्त रूप से नजर रखने का काम करते हैं. इस मामले में ऐसा कोई कदम उठाने के बजाए भारतीय प्रशासन ने मार्च में बताया कि वह वायु प्रदूषण के कच्चे आंकड़े जारी करना ही बंद कर देंगे. इस कदम का पर्यावरण कार्यकर्ताओं के काफी विरोध किया. अब तक तीन अलग अलग सरकारी एजेंसियां राजधानी में कई जगहों पर लगे वायु निगरानी केन्द्रों से मिले डाटा को एकत्र कर सीधे उन्हें प्रकाशित किया करती थीं. अब सरकार ने कह दिया कि इन आंकड़ों का प्रकाशन ना करके भविष्य में इन्हें केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजा जाए. बोर्ड पहले इसका विश्लेषण करेगा और उसके बाद ही "विश्वसनीय वायु गुणवत्ता जानकारी को दिल्ली की जनता तक पहुंचाया जाएगा."

कई चीनी शहरों में भी वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर

पर्यावरण कार्यकर्ताओं को 6 अप्रैल से लागू होने जा रहे इस नए सिस्टम पर संदेह है. उनका मानना है कि सरकार बुरी खबर को छुपाने के लिए ऐसा कदम उठा रही है. अंतरराष्ट्रीय एनजीओ ग्रीनपीस इंडिया की ओर से वायु प्रदूषण पर अभियान चलाने वाली ऐश्वर्या मादिनेनी ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, "यह कदम मुझे बहुत चिंताजनक लगता है. मुझे समझ नहीं आ रहा कि प्रकाशन के पहले प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड द्वारा इन आंकड़ों को संपादित करने का क्या अर्थ होगा." मादिनेनी कहती हैं कि लोगों को यह जानने का हक है क्योंकि "इसका उनकी सेहत पर सीधा असर पड़ता है." काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर ने साथ जुड़े रिसर्च एसोसिएट हेम ढोलकिया का मानना है कि यह कदम पारदर्शिता बरतने के खिलाफ जाता दिखता है. वे कहते हैं, "कहीं भी रियल-टाइम मॉनिटर्स हैं, तो वहां के डाटा को किसी तरह की पुष्टि की जरूरत नहीं होती."

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी एक विस्तृत स्टडी के सामने आने के बाद से ही भारत सरकार पर वायु प्रदूषण पर नियंत्रण करने का दबाव बढ़ता ही जा रहा है. पिछले साल जारी हुई इस स्टडी में दुनिया के 1,600 शहरों में दिल्ली को दुनिया भर में प्रदूषित पीएम2.5 कणों की सांद्रता के मामले में सबसे अधिक वार्षिक औसत वाला शहर बताया गया था. 2.5 माइक्रोमीटर से भी कम व्यास वाले ये बेहद छोटे कण आसानी से शरीर में घुस कर खून में मिल जाते हैं. यही कारण है कि हवा में इनकी अधिक मात्रा से फेफड़ों की गंभीर बीमारी ब्रॉन्काइटिस, कैंसर और हृदय रोगों को बढ़ावा मिलता है.

यह कण ना केवल दिल्ली में बल्कि दुनिया के कई विकासशील शहरों में चल रहे निर्माण कार्यों की साइट से उठ रही धूल में मिले होते हैं, या फिर डीजल इंजिनों और औद्योगिक उत्सर्जनों से आते हैं. भारत ने डब्ल्यूएचओ के निष्कर्षों पर आपत्ति जताई थी लेकिन इतना माना था कि राजधानी दिल्ली के प्रदूषण की तुलना चीनी राजधानी बीजिंग से की जा सकती है. अभी भी भारत सरकार की ओर से किसी ठोस नीतिगत कदम की घोषणा नहीं हुई है. हालांकि केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राज्य सरकारों से वायु की गुणवत्ता सुधारने के बारे में जल्द ही जरूरी उपाय करने को कहा है.

आरआर/एमजे (एएफपी, पीटीआई)

9 शहर जहां सांस लेना खतरनाक है

नई दिल्ली, भारत

नई दिल्ली में पिछले 30 सालों में वाहनों की संख्या 1.8 लाख से बढ़ कर 35 लाख हो गई है. गाड़ियों के अलावा शहर में कोयले से चलने वाले पावर प्लांट प्रदूषण का अहम कारण हैं. कुल वायु प्रदूषण में 80 फीसदी हाथ इन्हीं का है.

9 शहर जहां सांस लेना खतरनाक है

उलान बतोर, मंगोलिया

उलान बतोर ना सिर्फ सबसे ठंडी राजधानी है बल्कि यहां वायु प्रदूषण भी भयंकर है. शहर में धुंध का 70 फीसदी हिस्सा सर्दी के महीनों में कोयला और लकड़ी जलाने से होता है. यहां वायु प्रदूषण विश्व स्वास्थ्य संगठनों के सांस लेने के लिए सुरक्षित पैमानों से सात गुना ज्यादा है.

9 शहर जहां सांस लेना खतरनाक है

बीजिंग, चीन

चीन की राजधानी बीजिंग में धुंध का यह हाल है कि वैज्ञानिक इसे रिहाइश के लिए लगभग असुरक्षित घोषित कर चुके हैं. हालांकि यहां 2 करोड़ लोग रहते हैं. अनुमान है कि तगभग 35 लाख लोग हर साल दुनिया भर में वायु प्रदूषण के कारण जान गंवा रहे हैं. इनमें से आधे मामले चीन के हैं.

9 शहर जहां सांस लेना खतरनाक है

लाहौर, पाकिस्तान

वायु प्रदूषण पाकिस्तान के लिए भी बड़ी जलवायु समस्या है. लाहौर में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं. आसपास के मरुस्थल से आने वाली रेत के अलावा धूल और वाहनों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण के प्रमुख कारक हैं.

9 शहर जहां सांस लेना खतरनाक है

रियाध, सऊदी अरब

रियाध में रेत के तूफानों से सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण होता है. सऊदी अरब में पराबैंगनी किरणें यातायात और औद्योगिक धुएं से मिलकर ओजोन बनाती हैं.

9 शहर जहां सांस लेना खतरनाक है

काहिरा, मिस्र

काहिरा में वायु प्रदूषण के कारण शहरियों में कई तरह की श्वास संबंधी बीमारियां पाई जा रही हैं. वायु प्रदूषण में बढ़ोत्तरी की बड़ी वजह शहर में बढ़ रहा यातायात और औद्योगिक विस्तार है.

9 शहर जहां सांस लेना खतरनाक है

ढाका, बांग्लादेश

जर्मन शहर माइंस के माक्स प्लांक इंस्टीट्यूट के मुताबिक ढाका में हर साल करीब 15 हजार लोग वायु प्रदूषण के कारण मरते हैं. रिसर्चरों के मुताबिक यहां वायु में सल्फर डाई ऑक्साइड का स्तर दुनिया में सबसे ज्यादा है.

9 शहर जहां सांस लेना खतरनाक है

मॉस्को, रूस

मॉस्को में धुंध की वजह वायु में हाइड्रोकार्बन का उच्च स्तर है. मॉस्को से गुजरने वाली पश्चिमी हवाओं के कारण शहर के पश्चिमी भाग में वायु पूर्वी भाग से बेहतर है.

9 शहर जहां सांस लेना खतरनाक है

मेक्सिको शहर, मेक्सिको

मेक्सिको शहर तीन ओर से पहाड़ियों से घिरा है. हवा में हाइड्रोकार्बन और सल्फर डाई ऑक्साइड की उच्च मात्रा के कारण काफी लंबे समय तक मेक्सको को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर माना जाता रहा. कुछ फैक्ट्रियों को बंद किए जाने और यातायात नियमों में परिवर्तन से हालात कुछ बेहतर हुए हैं.

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