दुनिया में नहीं बढ़ रहीं नौकरियां

दुनिया भर में मंदी की रफ्तार अब सुस्त पड़ रही है और अर्थव्यवस्था की गाड़ी पटरी पर लौटती दिख रही है लेकिन नौकरियों के मामले में अभी भी सुधार कोसों दूर है. बीते साल में भी 20 करोड़ से ज्यादा लोग बेरोजगार ही रह गए.

अंतरराष्ट्रीय मजदूर संगठन आईएलओ ने चेतावनी दी है कि अर्थव्यवस्था में सुधार लोगों को रोजगार दिलाने में कामयाब नहीं हो रहा है. आईएलओ ने कहा है, "कई देशों में अर्थव्यवस्था की हालत तेजी से सुधरी है, लेकिन 2010 में आधिकारक रूप से दो करोड़ से ज्यादा लोग बेरोजगार रहे हैं. यह स्थिति 2009 के मुकाबले जरा भी नहीं बदली और 2007 में जब मंदी का दौर चालू हुआ, उसके मुकाबले करीब 10 फीसदी ज्यादा है."

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आईएलओ के मुताबिक फिलहाल दुनिया में बेरोजगारी की दर 6.1 फीसदी है और इसका मतलब है कि इस साल भी करीब 20 करोड़ से ज्यादा लोगों को बिना नौकरी के ही साल बिताना होगा. इनमें से करीब आधे लोग तो वे हैं जिनकी नौकरियां 2007 से शुरू हुई दुनिया भर की मंदी ने छीन लीं. यूरोपीय संघ के कई औद्योगिक देशों में इसका असर हुआ और इस वक्त हालात ये हैं कि नौकरी करने की उम्र में पहुंच चुके नौजवानों को नौकरी नहीं मिल पा रही है.

ब्राजील, कजाखस्तान और थाईलैंड जैसे विकासशील देशों में तो बेरोजागारी की दर मंदी से शुरू होने के पहले की दर से भी नीचे चली गई है. आईएलओ के महानिदेशक जुआन सोमाविया ने कहा, "दुनिया के अलग अलग देशों में नौकरियों की स्थितियां अलग अलग हैं. सुधार होने का बावजूद मंदी का शिकार हुए ज्यादातर लोग अब भी बेरोजगार हैं." सीधे सीधे बेरोजगार तो हैं ही, इसके अलावा करीब डेढ़ अरब लोगों के ऊपर लगातार तलवार लटक रही है क्योंकि वे अस्थायी नौकरियों के सहारे अपना पेट पाल रहे हैं.

युवाओं की स्थिति भी बेहद खराब है. 2010 में करीब आठ करोड़ युवा बेरोजगार रह गए. 2007 में मंदी का दौर शुरू होने से पहले युवा बेरोजगारों की संख्या सात करोड़ से थोड़ी ज्यादा थी. सोमाविया ने कहा कि युवाओं की बेरोजगारी पूरी दुनिया के लिए चिंता की बात है और सबसे पहले इसी पर ध्यान दिया जाना चाहिए."

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः वी कुमार

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