दूसरों की मदद से अपनी राहत

कहावत है, चले थे हरिभजन को ओटन लगे कपास. ग्रैमी विजेता क्रिस्टीना अगीलेरा के साथ भी ऐसा ही हुआ. वे रवांडा गईं थीं, वहां के लोगों की मदद करने, लेकिन यह उनके खुद के लिए बड़ी मदद साबित हुआ.

32 वर्षीय अमेरिकी गायिका जून में भूख से लड़ते अफ्रीकी देश में मदद के लिए गईं. उनका कहना है कि रवांडा में हुए अनुभव ने उन्हें जमीन पर अपने पैर टिकाने में मदद की है. "यह मेरी जिंदगी में एक ऐसे समय में हुआ जब मुझे सचमुच काम से या कैमरे के सामने होने से बहुत दूर रहने की जरूरत थी. यह ऐसे समय में हुआ जब मुझे इस अनुभव की जरूरत थी कि एंटरटेनमेंट से बाहर दुनिया में क्या हो रहा है."

अगीलेरा 2009 से यम ब्रांड के वर्ल्ड हंगर रिलीफ अभियान की प्रवक्ता हैं और इस भूमिका में वे पहले हैती और ग्वाटेमाला भी जा चुकी हैं. उनका कहना है कि मां होने के नाते उनकी दुनिया भर में भूखमरी का सामना कर रहे लोगों के प्रति और भी सहानुभूति हो गई है. उनका बेटा मैक्स पांच साल का है.

रवांडा के अनुभवों के बारे में उन्होंने कहा, "यह सोचना कितना दुखदायी है कि कुछ भी नहीं है जो हमें अलग करे. यदि आप मौके पर जाएं तो आप इसे देखते हैं और महसूस करते हैं कि हम सब एक हैं, फर्क सिर्फ यह है कि हम अलग परिस्थितियों में पैदा हुए हैं, यह दुखदायी है और मैं नहीं समझती कि ऐसा क्यों है, लेकिन मैं जो महसूस करती हूं, वह करती हूं और मुझसे जो कुछ हुआ, वह मैंने किया."

मदद ने की सहायता

रवांडा की यात्रा पर क्रिस्टीना अलगीरा ने बच्चों को खाना खिलाया और शरणार्थी शिविरों का दौरा किया. उन्होंने इसे "सबसे कठिन घड़ियों में एक" बताया. "उन्हें सब कुछ और सब किसी को छोड़ कर भागना पड़ा, जिन्हें वे जानते थे और प्यार करते थे." अपने आंसुओं को रोकते हुए उन्होंने कहा, "आप बस मदद करना चाहते हैं, जितनी भी आप कर सकते हैं. स्वाभाविक रूप से मैं इसके बारे में बात करते हुए संवेदनशील हो जाती हूं, लेकिन मुझे लगता है कि इसके बारे में सोचना जरूरी है."

यम ब्रांड केएफसी, पिज्जा हट और टाको बेल कंपनियां चलाती है. उसका कहना है कि 2007 में वर्ल्ड हंगर रिलीफ की स्थापना के बाद से संयुक्त राष्ट्र खाद्य कार्यक्रम और दूसरी संस्थाओं के लिए के लिए 15 करोड़ डॉलर इकट्ठा किया गया है.

एमजे/एजेए (एपी)

हमें फॉलो करें