पर्दाफाश करने वालों की सुरक्षा का कानून

भारत में धांधलियों और गड़बड़ियों का पर्दाफाश करने वालों की सुरक्षा का कानून बनेगा. इसके प्रस्ताव को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है. इसके मुताबिक जो लोग इनके नाम सामने लाएंगे, उन्हें कड़ी सजा मिल सकती है.

करीब आठ साल पहले सत्येंद्र दुबे ने प्रधानमंत्री सड़क परियोजना में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया. लेकिन बाद में उनकी हत्या हो गई. इसी तरह इंडियन ऑयल में भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले मंजूनाथ और पिछले साल सूचना अधिकार कार्यकर्ता सतीश शेट्टी की हत्या कर दी गई.

रिपोर्टः पीटीआई/ए जमाल

संपादनः आभा एम

सरकारी सूत्रों ने बताया कि इस कानून के तहत केंद्रीय सतर्कता आयोग को इस बात का अधिकार होगा कि वह किसी अदालत की तरह उन लोगों पर कड़ा जुर्माना लगाए, जो धांधलियों का पर्दाफाश कर रहे लोगों की पहचान सामने ला रहे हों. इसके लिए जनहित पर्दाफाश और पर्दाफाश करने वालों की सुरक्षा कानून, 2010 पर केंद्रीय कैबिनेट ने मुहर लगा दी.

इस विधेयक के तहत केंद्र, राज्य सरकार और निजी कंपनियों में घोटालों और गड़बड़ियों का पर्दाफाश करने वालों (व्हिसिलब्लोअर) की सुरक्षा होगी और उनके खिलाफ कदम उठाने वालों पर कार्रवाई की जा सकेगी. इस विधेयक के जरिए उन लोगों को बढ़ावा देने की कोशिश होगी, जो धांधलियों को उजागर करना चाहते हैं.

इस मामले में किसी भी संस्था के खिलाफ शिकायत देखने वाली सर्वोच्च संस्था सीवीसी यानी केंद्रीय सतर्कता आयोग ही होगी. रिपोर्टों के मुताबिक जो लोग इस बिल का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

करीब आठ साल पहले सत्येंद्र दुबे ने प्रधानमंत्री सड़क परियोजना में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया. लेकिन बाद में उनकी हत्या हो गई. इसी तरह इंडियन ऑयल में भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले मंजूनाथ और पिछले साल सूचना अधिकार कार्यकर्ता सतीश शेट्टी की हत्या कर दी गई.

रिपोर्टः पीटीआई/ए जमाल

संपादनः आभा एम

सरकारी सूत्रों ने बताया कि इस कानून के तहत केंद्रीय सतर्कता आयोग को इस बात का अधिकार होगा कि वह किसी अदालत की तरह उन लोगों पर कड़ा जुर्माना लगाए, जो धांधलियों का पर्दाफाश कर रहे लोगों की पहचान सामने ला रहे हों. इसके लिए जनहित पर्दाफाश और पर्दाफाश करने वालों की सुरक्षा कानून, 2010 पर केंद्रीय कैबिनेट ने मुहर लगा दी.

इस विधेयक के तहत केंद्र, राज्य सरकार और निजी कंपनियों में घोटालों और गड़बड़ियों का पर्दाफाश करने वालों (व्हिसिलब्लोअर) की सुरक्षा होगी और उनके खिलाफ कदम उठाने वालों पर कार्रवाई की जा सकेगी. इस विधेयक के जरिए उन लोगों को बढ़ावा देने की कोशिश होगी, जो धांधलियों को उजागर करना चाहते हैं.

इस मामले में किसी भी संस्था के खिलाफ शिकायत देखने वाली सर्वोच्च संस्था सीवीसी यानी केंद्रीय सतर्कता आयोग ही होगी. रिपोर्टों के मुताबिक जो लोग इस बिल का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

करीब आठ साल पहले सत्येंद्र दुबे ने प्रधानमंत्री सड़क परियोजना में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया. लेकिन बाद में उनकी हत्या हो गई. इसी तरह इंडियन ऑयल में भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले मंजूनाथ और पिछले साल सूचना अधिकार कार्यकर्ता सतीश शेट्टी की हत्या कर दी गई.

रिपोर्टः पीटीआई/ए जमाल

संपादनः आभा एम

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