पोप का दो टूक संदेश

लैटिन अमेरिका के दौरे पर पोप फ्रांसिस ने चुप्पी नहीं साधी है और वहां की सरकारों की अंतरात्मा को झकझोड़ा है. डॉयचे वेले की आस्ट्रिड प्रांगे का कहना है कि पोप का का बर्ताव एक सही है.

पोप के इस पूरे दौरे को पादरी वाला दौरा होना था. लेकिन पोप फ्रांसिस खुद पर काब नहीं कर सकते. वे चर्च और राजनीति को न अलग करना चाहते हैं और न कर सकते हैं. वह दक्षिण अमेरिकी परंपराओं के प्रति निष्ठावान हैं. चर्च का अनुभव है कि इस क्षेत्र में राजनीतिक संबंध के बिना ईसाई श्रद्धा और रोजमर्रा के जीवन के चुनौतियों को जोड़ना लगभग असंभव है.

अंतत: पोप शक्तिशाली ओहदों पर बैठे लोगों की अंतरात्मा को झकझोड़ने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे हैं. जिन तीन देशों इक्वाडोर, बोलिविया और पैराग्वे का वे दौरा कर रहे हैं, वहां इस की जरूरत है. .

अलग तरह की कूटनीति

पोप फ्रांसिस अपना संदेश देने के लिए अतीत के घावों पर अंगुली रख रहे हैं. वे 1970 और 80 के दशक में दक्षिण और लैटिन अमेरिका को वृहत जेलों में परिवर्तित करने वाले सैनिक तानाशाही के अंधेरे काल के बारे में खुल कर बोल रहे हैं. इक्वाडोर की राजधानी क्विटो में राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के महत्वपूर्ण लोगों को संबोधित करते हुए पोप ने कहा, "हमें संवाद और विभिन्न रुखों को शामिल करने की भावना पर आधारित कानूनों की जरूरत है." इलाके में चल रहे राजनीतिकविवादों की ओर इशारा करते हुए पोप ने आगे कहा, "दमन, अत्यधिक नियंत्रण और मानव अधिकारों का हनन, ये सब कभी हमारे पूरे इलाके को तबाह कर चुके हैं, उन्हें दर्दनाक स्मृतियों के रूप में ही सीमित रहना चाहिए."

पोप फ्रांसिस की घरवापसी

नव उपनिवेशवाद

पोप फ्रांसिस ने बोलिविया के सांता क्रूस में लोकप्रिय आंदोलनों की अंतरराष्ट्रीय बैठक को संबोधित किया. उन्होंने बचत कार्यक्रमों पर जोर देने की नव उपनिवेशवादी नीति की आलोचना की और समाज के निचले तबके से दुनिया की आर्थिक व्यवस्था को बदलने की मांग की.

पोप फ्रांसिस की घरवापसी

बदलाव की मांग

पोप फ्रांसिस ने अपने लैटिन अमेरिका दौरे पर बदलाव की मांग की. उन्होंने कहा, "हमें स्वीकार करना चाहिए कि जहां इतने किसान बिना जमीन के हैं, इतने परिवार बिना छत के हैं, इतने कामगार बिना अधिकार के हैं, इतने इंसान जिनके सम्मान का हनन हो रहा है, चीजें ठीक नहीं चल रही हैं.“

पोप फ्रांसिस की घरवापसी

भगवान के नाम पर

अपने बोलिविया दौरे पर पोप फ्रांसिस ने अमेरिका के आदिवासियों से उनके साथ हुए अन्यायों के लिए माफी मांगी. पोप ने कहा कि भगवान के नाम पर गंभीर पाप किए गए हैं. पोप के इस बयान का बोलिविया में खासा स्वागत हुआ है जहां के ज्यादातर नागरिक इलाके के मूल निवासियों की संतान हैं.

पोप फ्रांसिस की घरवापसी

मार्क्सवादी ईसा?

बोलिविया के वामपंथी राष्ट्रपति इवो मोरालेस ने पोप को जो उपहार दिया उस पर विवाद रहा. हंसिया और हथौड़े वाले उपहार पर ईसा मसीह को हथौड़े पर बने सलीब पर लटकाया हुआ दिखाया गया था. अनुदारवादी ईसाईयों ने मोरालेस पर पोप के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया.

पोप फ्रांसिस की घरवापसी

उत्साहित पोप

कैथोलिक गिरजे का प्रमुख बनने के बाद अर्जेंटीना के पोप फ्रांसिस की यह पहली लैटिन अमेरिका यात्रा है. कैथोलिक धर्मावलंबियों और अपने अनुयायियों की भीड़ में पोप अपने चरम पर दिखे. मुस्कुराते, लोगों का अभिवादन स्वीकार करते, उनकी और हाथ हिलाते.

पोप फ्रांसिस की घरवापसी

दर्शन की ललक

पोप के दर्शन करने इलाके के लोगों के अलावा दूरदराज से भी लोग आए. पापा फ्रांसिस्कुस के इंतजार में उन्होंने रात सड़कों पर अपने स्लीपिंग बैग में गुजारी. उन्होंने बोलिविया में सामाजिक सुधारों की तारीफ की और कहा कि लोग खुशहाली का मतलब सिर्फ भौतिक समृद्धि न समझें, जो भ्रष्टाचार और विवाद बढ़ाता है.

पोप फ्रांसिस की घरवापसी

सेल्फी का जोश

सेल्फी के जोश से लैटिन अमेरिका भी अछूता नहीं. अगर पोप घर आए हों तो फिर एक सेल्फी की कोशिश क्यों न हो. और प्रार्थना सभा के लिए मंच की और जाते हुए पोप के करीब पहुंचे बहुत से युवा उनके साथ सेल्फी लेने के मौके का इस्तेमाल कर रहे हैं.

पोप फ्रांसिस की घरवापसी

हर कहीं उत्साह

पोप को चाहने वालों में कैथोलिक गिरजे के पादरी और नन हैं तो आम लोग भी हैं. इक्वाडोर में पोप की पहली घरवापसी पर गुआयाक्विल में हुई पहली प्रार्थना सभा में उन्हें देखने दसियों हजार लोग पहुंचे. उनके चेहरों पर अपने पोप के स्वागत का उत्साह देखा जा सकता था.

पोप फ्रांसिस की घरवापसी

अपनी जमीन पर

पोप बनने के दो साल बाद अपने पहले लैटिन अमेरिका दौरे पर इक्वाडोर पहुंचे पोप फ्रांसिस का स्वागत राष्ट्रपति रफाएल कोरेया और बच्चों ने किया. इस दौरे पर उन्होंने लैटिन अमेरिका में गरीबी और बेकसी का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया.

पोप ऐसे बयानों से चौंकाने में माहिर हैं. वह असल में गौस्पेल और जोखिम वाले परिवारों से बात करना चाहते थे, कि तभी अचानक वे दूसरे ही आयाम पर जाकर "आजादी की पुकार" करने लगते हैं. गंभीर राजनीतिक माहौल वाले देशों में उनका ऐसा संदेश साफ तौर पर वहां की सरकारों को फटकार लगाने वाला लगता है. पोप के ये शब्द इक्वाडोर के विपक्ष के लिए जख्मों पर मरहम जैसे हैं. कई हफ्तों तक हजारों लोगों ने क्विटो की सड़कों पर उतर कर राष्ट्रपति रफाएल कोरेया की राजनीति का विरोध किया. लोग 2013 में लागू देश के प्रतिबंधक मीडिया कानूनों के खिलाफ भी लड़ रहे हैं.

भय और सेंसरशिप

बोलिविया में भी सरकार-विरोधी प्रदर्शन और मीडिया पर नियंत्रण के प्रति गुस्सा है. पोप की यात्रा से पहले वहां के एक स्थानीय प्रेस संगठन एएनपी ने सांता क्रूज इलाके के अपने पादरी को पत्र लिखकर पोप फ्रांसिस से प्रार्थना की थी कि वह मीडिया पर बढ़ते नियंत्रण के खिलाफ बोलें जो डर और सेल्फसेंसरशिप फैला रहा है. पोप फ्रांसिस खुद कैथोलिक चर्च की दुनिया में डर और सेल्फसेंसरशिप से परिचित हैं. दक्षिण अमेरिका के धर्माबलंबियों से कहे गए उनके स्पष्ट शब्द वेटिकन की पुराने आदर्शों की ओर वापसी दिखाते हैं. पोप एल सल्वाडोर के पूर्व आर्कबिशप ऑस्कर रोमेरो के प्रशंसकों में शामिल हैं जिन्होंने सैनिक तानाशाही के खिलाफ संघर्ष किया और जो गरीबों को भीख देने में विश्वास नहीं करते थे.

इक्वाडोर के राष्ट्रपति भी पूर्व आर्कबिशप रोमेरो के प्रशंसकों में शामिल हैं जिन्हें उनकी हत्या के 35 साल बाद इस साल संत घोषित किया गया है. कैथोलिक कोरेया को शायद इस बात का और भी ज्यादा मलाल होगा कि "उनके" पोप ने देश की यात्रा पर आकर उन्हें संवाद और सहिष्णुता के राजनेता वाले कर्तव्य की याद दिलाई है.

बलॉग: आस्ट्रिड प्रांगे/आरआर

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