बच्चों को डिजिटल खिलौने दिलाएं या नहीं?

डिजिटल जमाना है तो बच्चों के लिए भी इंटरएक्टिव डिजिटल खिलौने और खास ऐप बनाए जा रहे हैं, लेकिन क्या इनसे बच्चों का कुछ भला हो रहा है? अमेरिका में हुई एक रिसर्च इस सवाल का जवाब देती है.

अमेरिकन अकादमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बच्चों को सिर्फ टीवी के सामने बिठा देने से या फिर खेलने के लिए स्मार्टफोन, टेबलेट और दूसरे डिजिटल खिलौने पकड़ा देने से उनका कोई भला नहीं होता. इससे उन्हें अपने आसपास मौजूद लोगों या बच्चों से बात करने का वक्त नहीं मिलता और ना ही वे उनके साथ मिल खेल पाते हैं जबकि यह उनके विकास के लिए बहुत जरूरी है.

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन और बेलेव्यू अस्पताल सेंटर के डॉ. एलन मेंडेलजोन का कहना है कि असली खिलौने या किताबें बच्चों को अपने माता पिता या केयर टेकर के ज्यादा करीब ले जाती हैं. ये चीजें बच्चों को उनसे बात करने के भरपूर मौके देती हैं. इस तरह बच्चों का बेहतर मानसिक विकास हो पाता है, जबकि मेंडलजोन के मुताबिक डिजिटल खिलौनों के साथ ऐसा संभव नहीं है.

अगला स्टेशन: ऐप स्टोर

याद है आपको खिलौने वाली ट्रेन लेने के लिए बच्चों की जिद? आज के युग में वैसी ट्रेनें भी आईपैड से जुड़ गई हैं. छोटे छोटे बच्चे स्मार्टफोन और टैबलेट से खेलने लगे हैं, तो खिलौना कंपनियां भी वैसे ही खिलौने बना रही हैं.

ये प्लेन है, चिड़िया है या...?

रिमोट कंट्रोल से उड़ने वाले प्लेनों की भी खिलौनों की दुनिया में खास जगह है. हर बच्चा उसका पायलट बन ऊंचाईयां नापना चाहता है. लेकिन अगर उसी प्लेन पर कैमरा फिट हो और वह उड़ते हुए पड़ोसियों के वीडियो रिकार्ड करे, तो ऐसी रिकॉर्डिंग को यूट्यूब पर पा कर पड़ोसी बहुत खुश नहीं होंगे.

डरने नहीं गले लगाने की चीज

ये चटकीले लाल रंग का, चेन जैसे मुंह वाला जीव खुद नकली महारानी ने अपने हाथों में लिया हुआ है. कुछ बच्चों को इससे डर लग सकता है लेकिन कुछ का डर दूर भी हो सकता है. इसके पीछे विचार यह है कि सोने जाते वक्त बच्चे को जो भी डर सता रहे हों, उसे एक कागज पर लिखें और सिकोड़ के इस पुतले के मुंह में ठूस दे. चिंताओं को खा जाने वाला यह दैत्य बच्चों के दुख को उनके माता पिता तक पहुंचा देता है.

लड़कियों को गुलाबी, लड़कों को नीला

भले ही आप खुद ही देखते आए हों कि लड़कियों को गुड़िया से खेलना तो लड़कों को एक्शन हीरो वाले पुतले पसंद आते हों. लेकिन जेंडर से जुड़े विषयों पर रिसर्च करने वाले कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह सब विचार समाज ने ही बच्चों में डाले हैं. फिर भी खिलौना बनाने वाली कई कंपनियां इन प्रचलित मानदंडों पर ही चलना चाहती हैं.

खेलने की नई तरह की चीजें

बोलने वाले या फिर लाइट जलाने वाले ही नहीं आजकल के नए खिलौने तकनीकी रूप से काफी एडवांस हैं. हाइब्रिड प्रोडक्ट्स कहे जाने वाले ये इलेक्ट्रानिक खिलौने 2014 में ही पूरे खिलौना बाजार का करीब 30 फीसदी हिस्सा बन चुके हैं.

डिजिटल बिल्डिंग ब्लॉक

डेनमार्क की विश्वप्रसिद्ध खिलौना कंपनी लेगो ने एक ऐसा डिजिटल लेगो पीस बनाया है जो टैबलेट के साथ जुड़ा है. टैबलेट में 'लेगो' ऐप इंस्टॉल होगा और जब बिल्डिंग ब्लॉक के खेल में टैबलेट की स्क्रीन पर किसी लेगो ब्लॉक को रखा जाए, तो ऐप आपको ब्लॉक को पूरा करने के लिए तरह तरह के निर्देश देगा.

सुपर सैंड

इसे सुपर सैंड ऐसे ही नहीं कहा जाता. डच खिलौना कंपनी गोलिएथ ने खिलौनें की दुनिया में चमत्कार कर दिखाया है. गोलिएथ ने ऐसा जादुई बालू बनाया है जो हाथों या घर की फर्श पर नहीं चिपकता और आप इससे अपने सपनों के महल खड़े कर सकते हैं.

मेंडलजोन ने ईमेल से भेजे अपने जवाब में कहा, "ऐसे कोई खास प्रमाण नही हैं जो बताते हों कि टैबलेट और स्मार्टफोन पर बिताया हुआ समय दो साल या उससे कम उम्र के बच्चों के लिए किसी भी तरह फायदेमंद होता है."

अमेरिकन अकादमी ऑफ पीडियाट्रिक्स का कहना है कि दो साल या उससे कम उम्र के बच्चों के लिए किसी भी तरह स्क्रीन देखना अच्छा नहीं है, चाहे बात टीवी की हो या फिर डिटिजल गेम और इस तरह के खिलौनों की. रिपोर्ट कहती है कि दो साल या उससे बड़े बच्चों को एक दिन में एक घंटे से भी कम स्क्रीन दिखाई जानी चाहिए.

मेंडलजोन और उनके साथियों ने रिपोर्ट में लिखा है कि आम तौर पर लोग यह समझकर छोटे छोटे बच्चों को डिजिटल खिलाने और ऐप पकड़ा देते हैं कि इससे वे कुछ सीखेंगे, जबकि यह गलत है.

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मंथन | 21.03.2018

हैरान कर देंगे लकड़ी के ये खिलौने

डाक्टरों का कहना है की दो साल से छोटे बच्चों को सामाजिक, भावनात्मक और व्यवहारिक कौशल सिखाने की जरूरत है जो वे आपने परिवार या केयर टेकर से बातचीत करके सीखते है, ना कि किसी डिजिटल खिलौनों या टीवी से.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर बच्चों को डिजिटल खिलौने दिए जाएं तो उनके साथ कोई बड़ा भी होना चाहिए जो उन्हें चीजों के बारे में समझा सके. माता पिता को ऐसे खिलौने चुनने चाहिए जिसे बच्चे अपनी कल्पनाओं को इस्तेमाल करना सीखें.

बाल रोग विशेषज्ञ कहते हैं कि पांच साल से छोटे बच्चों को वही कंप्यूटर या वीडियो गेम खेलने देने चाहिए जो उनके मानसिक विकास में मदद करें और जब बच्चे कंप्यूटर या वीडियो गेम खेल रहे हों तो उनके साथ माता पिता या केयर टेकर होना चाहिए.

जानकारों का कहना है कि जिन बच्चों की विशेष जरूरतें होती हैं, उनके लिए बेशक टेक्नोलॉजी मददगार होती है लेकिन ऐसे बच्चे भी जब डिजिटल खिलौनों और एप्स की मदद ले रहे हों तो उनके साथ कोई ना कोई होना जरूरी है.

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मल्टीमीडिया | 16.11.2017

कागज के मजेदार खिलौने

कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी डोमिंग्वेज़ हिल्स के लैरी रोसेन का कहना है, "मनोविज्ञानी हमेशा से ये कहते आए हैं कि बच्चों को टीवी के सामने या किसी डिजिटल खिलौने के साथ छोड देने से कोई फायदा नही होता, माता पिता या केयर टेकर को ध्यान देना चाहिए कि वे बच्चे से लगातार बात करें और देखें कि बच्चे को उस खेल या शो का मतलब समझ में आ रहा है या नहीं. "

रोसेन का कहना है, "मैं यह नहीं कहता कि डिजिटल खिलौने बिल्कुल बेकार है, क्योंकि उनकी मदद से माता पिता बच्चों को बहुत काम की बातें सिखा सकते हैं और जरूरी जानकारियां दे सकते हैं."

दूसरी तरफ, न्यू हैम्पशायर के डार्टमाउथ कॉलेज की जेनिफर एमॉन्ड का कहना है कि "कई बार माता पिता बहुत चिंता करते हैं कि उनको अपने बच्चों को सबसे नए डिजिटल खिलौने दिलाने चाहिए, जो बिल्कुल जरूरी नहीं हैं. "

जेनिफर एमॉन्ड का मानना है कि बच्चों के लिए खिलौने घर पर भी बनाए जा सकते है और उसके लिए बहुत ज्यादा पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है.

एन राय/एके (रॉयटर्स)

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बॉल फिलिप्पर

68वें न्यूरेमबर्ग टॉय फेयर में पेश बॉल फिलिप्पर गेम में सेलिब्रिटी भी भाग ले रहे हैं.

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वीआर रेसर

बच्चों को लुभाने वाले इस खिलौने को स्कूली बच्चों की एक श्रेणी में अवॉर्ड के लिए नामांकित किया गया है.

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एनालॉग ऐंड आइस-कूल

आंकड़ों के मुताबिक जर्मन परिवार हर साल खिलौनों पर करीब 180 यूरो खर्च करता है, इसका मतलब है कि आइसकूल जैसे ये खिलौने भी बजट में शामिल हैं.

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प्रकृति के करीब

टेगू बींस और टमटम वुडन टॉय को देखकर आपको अपने पुराने दिनों की याद आना लाजिमी है.

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प्लेफुल प्रोग्रामिंग

यह टॉय फेयर डिजिटल खिलौनो के बिना अधूरा है, लीगो बूस्ट के जरिये बच्चे प्रोग्रामिंग सीख सकते हैं.

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कलरफुल फॉर्म

छोटी उम्र में ही बच्चों को रंगों का ज्ञान हो जाना क्या बुरा है. ऐसे खेलों का मकसद बच्चों का रंगों से परिचय कराना है.

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पेंटिंग की तरह

एक्सट्रीम टॉय एंड स्पोर्ट्स की पेशकश क्राइट बॉम्ब किसी रंगों की किताब से अधिक कल्पनाशील है.

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फ्रेंच प्रेम

यह टैबलेट और टचस्क्रीन नहीं बल्कि यह फ्रांस के लोगों को ध्यान में रखकर बनाया गया खिलौना है. सिएल दा बियुल्स को इंटरनेशनल स्टेशनरी ने तैयार किया है.

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एनालॉग हैंडीवर्क

हेप इंटरनेशनल की ओर से पेश किया गया माइटी माउंटेन माइन 100 फीसदी एनालॉग है. रिपोर्ट रोल्फ वेंकल/एए