बर्बादी की राह पर एथेंस

एथेंस बर्बादी की राह पर निकल पड़ा है, ब्रसेल्स ने जितना सोचा था उससे ज्यादा तेजी से. बारबरा वेजेल का कहना है कि इससे पहले कि ग्रीस की अव्यवस्था पूरे यूरोप को ले डूबे, जल्द ही इसके विरुद्ध कोई रणनीति बनानी होगी.

एथेंस बर्बादी की राह पर निकल पड़ा है, ब्रसेल्स ने जितना सोचा था उससे ज्यादा तेजी से. बारबरा वेजेल का कहना है कि अब एक ही विकल्प है, जल्द ही इसके विरुद्ध कोई रणनीति बनानी होगी, इससे पहले कि ग्रीस की अव्यवस्था पूरे यूरोप को ले डूबे.

कुछ दिनों तक ब्रसेल्स इस गुत्थी को सुलझाता रहा कि ग्रीस की नई सरकार के साथ किस तरह से बातचीत शुरू की जाए, की जाए भी या नहीं. अब खुद एथेंस से ही जवाब आ गया है, नहीं, बिलकुल भी नहीं. वित्त मंत्री यानिस वारोफाकिस ने साफ कर दिया है कि वे कोई बात नहीं करना चाहते. यूरोपीय संघ, यूरोपीय सेंट्रल बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की तिकड़ी से तो कतई नहीं. ये वैसा ही है, जैसे कोई लेनदार उस बैंक से ही बात करने से इंकार कर दे जिसने उसे कर्ज दिया है. और वह भी इसलिए कि उस लेनदार को लगता है कि बैंक और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था प्रणाली बकवास कर रहे हैं. अगर कोई ऐसा सोचता है, तो उसे रोका नहीं जा सकता. लेकिन इसके बदले उसे नतीजे भुगतने होंगे, अब से उसके खाते में कोई पैसा नहीं आएगा.

दिवालिया होने की कगार पर

यह तिकड़ी ही तय करती है कि कब कहां कितना पैसा जाना है. और अब इसके पास और कोई चारा नहीं बचा है, सिवाए इसके कि पिछले साल की सहायता राशि में से इस साल फरवरी के अंत में जो सात अरब यूरो देने थे, उसे रोक दे. एथेंस ने भी काफी ढिठाई के साथ कह दिया है कि उसे इसकी कोई जरूरत नहीं है. लेकिन फरवरी और मार्च में ग्रीस को अपने कर्ज चुकाने और ब्याज देने के लिए करीब ग्यारह अरब यूरो की जरूरत होगी. क्या यह देश अपनी आर्थिक जिम्मेदारी पूरी नहीं करना चाहता? साथ ही, अगर एथेंस तिकड़ी के साथ नाता तोड़ लेना चाहता है, तो यूरोपीय सेंट्रल बैंक ग्रीस के बैंकों को पैसा कैसे मुहैया कराएगा? इसका मतलब यह होगा कि एटीएम से पैसा निकालना बंद हो जाएगा. प्रधानमंत्री अलेक्सिस सिप्रास का कहना है कि वे किसी भी हालत में अपने देश को ऐसी बुरी स्थिति में नहीं डालना चाहते हैं. लेकिन उनके देशवासियों के लिए जल्द ही एक बुरी सुबह होने वाली है.

सिप्रास और उनकी टुकड़ी

एथेंस की नई सरकार पर हंसी आ सकती थी, अगर सिप्रास और उनकी टीम का मकसद पूरे ईयू को इस भंवर में घसीटना नहीं होता. लंदन, रोम और पेरिस में घूम कर वे मदद की उम्मीद कर रहे हैं. वे बर्लिन के आसपास एक पूरा चक्कर काट रहे हैं. हमला करते हुए स्वर में उन्होंने कहा है कि जर्मनी बहुत से देशों में से सिर्फ एक ही देश है. इसके बदले में जर्मनी के वित्त मंत्री वोल्फगांग शॉएब्ले ने भी कहा कि जर्मनी ग्रीस को जबरन पैसा नहीं देना चाहता है. अगर वे हमसे बात नहीं करना चाहते, तो उनकी मर्जी.

ईयू को तोड़ना चाहते हैं सिप्रास

अब सिप्रास की कोशिश है कि इटली और फ्रांस को बर्लिन के खिलाफ खड़ा करें. इसके अलावा वे लंदन से भी मदद की आस लगा रहे हैं. क्योंकि वहां भी यह विचारधारा है कि जर्मनी को यूरोजोन में पैसे की बाढ़ ले आनी चाहिए ताकि विकास में तेजी लाई जा सके. लेकिन ब्रिटेन को इस मामले में नहीं पड़ना चाहिए और अपना मुंह बंद रखना चाहिए. और रोम और पेरिस में लोग यह विचार रख सकते हैं कि अगर ईयू ज्यादा पैसे दे, तो सब ठीक हो जाएगा लेकिन कर्ज माफ कर देने की बात पर तो इटली और फ्रांस भी सहमत नहीं होंगे. सिर्फ जर्मनी को ही 50 और 60 अरब यूरो के लिए खड़ा नहीं होना है, फ्रांस और इटली को भी इसका बोझ उठाना होगा.

दरअसल एथेंस में नई सरकार चाह रही है कि ग्रीस के कर्ज के एक बड़े हिस्से को माफ कर दिया जाए, जैसा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद जर्मनी के साथ किया गया था. लेकिन इन दोनों स्थितियों की तुलना नहीं की जा सकती. ग्रीस में हमारे मित्र किसी भूकंप, तूफान या गृह युद्ध का शिकार नहीं हुए हैं, बल्कि अपने ही भ्रष्ट उच्च वर्ग के कारण. उनके अलावा और कोई भी इसके लिए जिम्मेदार नहीं है. बैंकों ने आपको आराम से पैसा दे दिया था और यही सच्चाई है. किसी ने भी आपके साथ जोर जबरदस्ती नहीं की थी कि आप पैसा लें और फिर अपने हिसाब से उसे खर्चें. खुद को पीड़ित के रूप में देखना बंद करें. ग्रीस सरकार आगे भी यूरोपीय संघ के साथ खेल खेलने की अपनी कोशिश जारी रख सकती है. हम देखेंगे कि इससे वह कितना आगे बढ़ पाती है.

और आखिर में, यह सोचा जा सकता है कि चालाकी की जीत होती है. हाथ में नई नई ताकत आने से नशा हो सकता है लेकिन जिन लोगों मेज पर बैठ कर आपको काम करना है, उन्हें आप लगातार बेइज्जत नहीं कर सकते. अंगेला मैर्केल की तुलना हिटलर के साथ नहीं की जानी चाहिए और वोल्फगांग शोएबले का चौथे राइष से कोई लेना देना नहीं है. सिप्रास और उनके लोग विवेक और चेतना की जगह बदतमीजी और बुरा बर्ताव दिखा रहे हैं. ईयू को जल्द ही ऐसी नीतियों के बारे में सोचना होगा जिससे ग्रीस का यूरोपीय संघ से निकलना आसान किया जा सके, इससे पहले की वह पूरे यूरोप को ही ले डूबे. यायावर को रोकना नहीं चाहिए, खास कर इस टाइप के लोगों को.

ग्रीस का प्राचीन अजूबा: ऐंफीपोलिस

महिलाओं की नजर

2014 में उत्तरी ग्रीस के ऐंफीपोलिस की खुदाई में दो महिलाओं की मूर्तियां मिलीं. इन्हें कैरियाटिड्स के नाम से जाना जाता है. लम्बे लबादे पहने और घुंघराले बालों वाली ये दो मूर्तियां मकबरे के दूसरे द्वार की निगरानी करती हैं.

ग्रीस का प्राचीन अजूबा: ऐंफीपोलिस

हाथों का इशारा

दो में से एक महिला आकृति का चेहरा साफ नहीं लेकिन धड़ा ठीक है. ग्रीस के संस्कृति मंत्रालय के एक बयान में बताया गया, "एक का बायां और दूसरी का दायां हाथ इस तरह के उठे हैं जैसे किसी को भी मकबरे के अंदर ना जाने का इशारा कर रहे हों."

ग्रीस का प्राचीन अजूबा: ऐंफीपोलिस

बिना सिर वाला जोड़ा

ये दो स्फिंक्स मकबरे के मुख्य द्वार की निगरानी करते हैं. पुरातत्वविदों का अनुमान है कि सिर और पंख के साथ ये 6 फीट से भी ऊंचे रहे होंगे. यहीं से एक चौड़ा रास्ता मकबरे के प्रवेश द्वार तक ले जाता है. यह ग्रीस में मिली अब तक की सबसे बड़ी कब्रगाह है.

ग्रीस का प्राचीन अजूबा: ऐंफीपोलिस

शाही दहाड़

संगमरमर का बना यह शेर 17 फीट से भी ऊंचा है. अनुमान है कि यह मकबरे के ऊपर रहा होगा. इसे 1912 में ग्रीक सेना ने खोज निकाला था. इसके बड़े आकार और मूर्तियों को देख कर अंदाज है कि यहां सिकंदर के जमाने की कोई बड़ी हस्ती ही दफ्न होगी. शायद उनके परिवार का कोई सदस्य या फिर कोई बड़ा ओहदेदार.

ग्रीस का प्राचीन अजूबा: ऐंफीपोलिस

मुश्किल प्रक्रिया

ऐंफीपोलिस में खुदाई का काम 2012 में शुरु हुआ. इस ऑपरेशन की मुख्य पुरातत्वविद् कातरीना पेरिस्तरी बताती हैं, "हम सर्जनों की तरह धीरे धीरे आगे बढ़ते हैं." यह मकबरा ग्रीस के मकदूनिया इलाके में स्थित है और आकार के मामले में सिकंदर के पिता की कब्र से भी बड़ा है. माना जाता है कि सिकंदर को मिस्र में कहीं दफ्न किया गया था.

ग्रीस का प्राचीन अजूबा: ऐंफीपोलिस

बारीकियों पर ध्यान

यह मार्बल पैनल उस जगह पर मिला जो मजार की बाहरी दालान जैसा लगता है. इस किस्म की नक्काशी देखकर अंदाजा लगता है कि इसे बनवाने वालों का धन और वैभव कैसा रहा होगा. माना जाता है कि ऐंफीपोलिस में ही सिकंदर की पत्नी और बेटे की हत्या हुई थी जब चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में मेसेडोनियन जनरल कास्सेंडर ने इस इलाके पर विजय हासिल की थी. संभव है कि यहां उन्हीं की कब्रें हों.

ग्रीस का प्राचीन अजूबा: ऐंफीपोलिस

संगमरमर की श्रृंखलाएं

यहां की दीवारों पर काफी दूरी तक मार्बल लगी मिली है. विशेषज्ञों ने बताया है कि इस तरह की संरचना में सिकंदर महान के मुख्य आर्किटेक्ट दाइनोक्रेट्स ऑफ रोंस की छाप मिलती है. इसी आर्किटेक्ट ने आलेक्जांड्रिया शहर का निर्माण किया था.

ग्रीस का प्राचीन अजूबा: ऐंफीपोलिस

जुड़ी हैं बड़ी उम्मीदें

यह ऐंफीपोलिस का हवाई नजारा है जो ग्रीस के सेरिस शहर के दक्षिण में स्थित है. ग्रीस सरकार इसे पुरातत्व और इतिहास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण खोज मान रही है. यहां किनकी कब्रें हैं यह पता करने की कोशिशें जारी हैं. मगर खुद सिकंदर की कब्र कहां है यह आज भी रहस्य है.

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