बाबरी मस्जिद कहीं और बनवायी जाएः शिया वक्फ बोर्ड

अयोध्या में बाबरी मस्जिद विवाद के मामले में शिया वक्फ बोर्ड ने कोर्ट में कहा है कि मस्जिद किसी मुस्लिम इलाके में बनवायी जा सकती है.

शिया वक्फ बोर्ड का कहना है कि अगर राम मंदिर और बाबरी मस्जिद एक साथ रहे तो विवाद होगा. सुप्रीम कोर्ट इसी महीने की 11 तारीख को इस बारे में अगली सुनवाई करेगी. सुन्नी वक्फ बोर्ड ने यह भी सुझाव रखा है कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और सभी पक्षकार मिल कर इस मामले का एक सर्वमान्य हल निकालें. इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के कार्यालय से नामांकित लोग भी शामिल हो सकते हैं.

बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा है, "इस मामले में शिया वक्फ बोर्ड को दखल देने के लिए भगवान ने भेजा है."

हिंदू और मुसलमानों के बीच राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद को लेकर लंबा विवाद रहा है. 1990 के दशक में दक्षिणपंथी संगठनों ने इसको खूब हवा दी और बड़े आदोलन हुए. 1992 में उग्र हिंदुओं की भीड़ ने विवादित मस्जिद को गिरा दिया था. इस मामले में विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं पर लोगों को भड़काने का आरोप लगा.

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2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लंबी सुनवाई के बाद विवादित जगह को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया. इसमें एक हिस्सा रामजन्मभूमि न्यास, दूसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने की बात थी. बाद में शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि जो हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को मिला है उस पर उनका हक है. उत्तर प्रदेश के शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड का कहना है कि विवादित जमीन पर मालिकाना हक उसका है इसलिए सिर्फ उसे ही इस बारे में फैसला करने का अधिकार है.

अयोध्या: कब क्या हुआ

1528

कुछ हिंदू नेताओं का दावा है कि इसी साल मुगल शासक बाबर ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई थी.

अयोध्या: कब क्या हुआ

1853

इस जगह पर पहली बार सांप्रदायिक हिंसा हुई.

अयोध्या: कब क्या हुआ

1859

ब्रिटिश सरकार ने एक दीवार बनाकर हिंदू और मुसलमानों के पूजा स्थलों को अलग कर दिया.

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1949

मस्जिद में राम की मूर्ति रख दी गई. आरोप है कि ऐसा हिंदुओं ने किया. मुसलमानों ने विरोध किया और मुकदमे दाखिल हो गए. सरकार ने ताले लगा दिए.

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1984

विश्व हिंदू परिषद ने एक कमेटी का गठन किया जिसे रामलला का मंदिर बनाने का जिम्मा सौंपा गया.

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1986

जिला उपायुक्त ने ताला खोलकर वहां हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत दे दी. विरोध में मुसलमानों ने बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया.

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1989

विश्व हिंदू परिषद ने मस्जिद से साथ लगती जमीन पर मंदिर की नींव रख दी.

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1992

वीएचपी, शिव सेना और बीजेपी नेताओं की अगुआई में सैकड़ों लोगों ने बाबरी मस्जिद पर चढ़ाई की और उसे गिरा दिया.

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जनवरी 2002

तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने दफ्तर में एक विशेष सेल बनाया. शत्रुघ्न सिंह को हिंदू और मुस्लिम नेताओं से बातचीत की जिम्मेदारी दी गई.

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मार्च 2002

गोधरा में अयोध्या से लौट रहे कार सेवकों को जलाकर मारे जाने के बाद भड़के दंगों में हजारों लोग मारे गए.

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अगस्त 2003

पुरातात्विक विभाग के सर्वे में कहा गया कि जहां मस्जिद बनी है, कभी वहां मंदिर होने के संकेत मिले हैं.

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जुलाई 2005

विवादित स्थल के पास आतंकवादी हमला हुआ. जीप से एक बम धमाका किया गया. सुरक्षाबलों ने पांच लोगों को गोलीबारी में मार डाला.

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2009

जस्टिस लिब्रहान कमिश्न ने 17 साल की जांच के बाद बाबरी मस्जिद गिराये जाने की घटना की रिपोर्ट सौंपी. रिपोर्ट में बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया गया.

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सितंबर 2010

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि विवादित स्थल को हिंदू और मुसलमानों में बांट दिया जाए. मुसलमानों को एक तिहाई हिस्सा दिया जाए. एक तिहाई हिस्सा हिंदुओं को मिले. और तीसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़े को दिया जाए. मुख्य विवादित हिस्सा हिंदुओं को दे दिया जाए.

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मई 2011

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को निलंबित किया.

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मार्च 2017

रामजन्म भूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों को यह विवाद आपस में सुलझाना चाहिए.

तीनों पक्षों ने इसके बाद पूरी जमीन पर हक के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

बाबरी मस्जिद विवाद को आजाद भारत में सबसे बड़ा धार्मिक विवाद माना जाता है. बीते तीन दशकों में इस मुद्दे ने देश की राजनीति पर खासा असर डाला और कई सरकारों के बनने और टूटने की वजह रहा. भारतीय जनता पार्टी को उत्तर भारत में इसी मुद्दे को हवा दे कर अपने पैर फैलाने मौका मिला. दूसरी तरफ कारसेवकों के खिलाफ बल प्रयोग कर उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव और बिहार में लालू प्रसाद ने मंदिर निर्माण के लिए रथयात्रा लेकर चले बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार कर खुद को मुसलमानों के हमदर्द के रूप में पेश किया. 

निखिल रंजन 

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