ब्लैकबेरी को देर से नहीं तुरंत जानकारी देनी होगी

भारत सरकार की चेतावनी के बाद संदेशों और आंकड़ों की जानकारी देने के लिए तैयार हुआ ब्लैकबेरी एक बार फिर मुश्किल में है. सरकार ने साफ कहा है कि उसे जानकारी तुरंत चाहिए न कि 10 दिन बाद.

रिपोर्टः एजेंसियां/ एन रंजन

संपादनः ए जमाल

कड़े दबाव के बाद जानकारी देने के लिए तैयार हुई मोबाइल कंपनी ब्लैकबेरी ने टेलीकॉम विभाग को दिए प्रस्ताव में कहा था कि उसे एक मोबाइल नंबर चाहिए जिस पर वो सारी जानकारी भेज सके. ब्लैकबेरी ने नई व्यवस्था में 10 दिन के भीतर लोगों के संदेशों की जानकारी देने की बात कही थी. सरकार ने उसके प्रस्ताव को ये कहकर ठुकरा दिया कि उसे जानकारी संदेश भेजे जाने के बाद तुरंत देनी होगी न कि 10 दिन बाद. सरकार ने ब्लैकेबेरी के संदेशों की जानकारी देने की व्यवस्था के लिए पहले ही 31 अगस्त की समयसीमा तय कर रखी है. अगर इसके पहले व्यवस्था नहीं होती तो सरकार ब्लैकबेरी के संदेशों की आवाजाही पर रोक लगा देगी. इस तरह ब्लैकबेरी को भारत के बड़े बाजार में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है.

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अगर वास्तविक समय में जानकारी नहीं मिली तो फिर वो किसी काम के नहीं. दरअसल सुरक्षा एजेंसियों को इस बात की आशंका है कि ब्लैकबेरी का इस्तेमाल आतंकवादी साजिश और गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है. जटिल कोड होने के कारण सुरक्षा एजेंसियों के लिए इसे डिकोड करना संभव नहीं है. भारतीय गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है, "अगर दो आतंकवादी कहीं हमला करने के बारे में बातचीत कर रहे हैं तो हमें उनके संदेशों की जानकारी पाने के लिए 10 दिन तक इंतजार नहीं कर सकते."

ब्लैकबेरी के अधिकारी 31 अगस्त की समयसीमा के भीतर इंतजाम करने के लिए पूरी कोशिश करने में जुटे हैं. अगर ऐसा नहीं हुआ तो भारत में इस्तेमाल हो रहे उनके 10 लाख फोन काम करना बंद कर देंगे. सरकार ने इस बारे में मोबाइल सेवा दे रही कंपनियों को पहले ही आदेश दे दिया है. अधिकारियों ने कहा है कि अगले हफ्ते तक वो इस बारे में नया प्रस्ताव तैयार कर लेंगे. गृह मंत्रालय के अधिकारी ने ये भी बताया कि सुरक्षा एजेंसियां जब तक नए इंतजाम से संतुष्ट नहीं हो जातीं तब तक ब्लैकबेरी के सिग्नल को 1 सितंबर से जारी रखने के आदेश नहीं दिए जाएंगे.

रिपोर्टः एजेंसियां/ एन रंजन

संपादनः ए जमाल

कड़े दबाव के बाद जानकारी देने के लिए तैयार हुई मोबाइल कंपनी ब्लैकबेरी ने टेलीकॉम विभाग को दिए प्रस्ताव में कहा था कि उसे एक मोबाइल नंबर चाहिए जिस पर वो सारी जानकारी भेज सके. ब्लैकबेरी ने नई व्यवस्था में 10 दिन के भीतर लोगों के संदेशों की जानकारी देने की बात कही थी. सरकार ने उसके प्रस्ताव को ये कहकर ठुकरा दिया कि उसे जानकारी संदेश भेजे जाने के बाद तुरंत देनी होगी न कि 10 दिन बाद. सरकार ने ब्लैकेबेरी के संदेशों की जानकारी देने की व्यवस्था के लिए पहले ही 31 अगस्त की समयसीमा तय कर रखी है. अगर इसके पहले व्यवस्था नहीं होती तो सरकार ब्लैकबेरी के संदेशों की आवाजाही पर रोक लगा देगी. इस तरह ब्लैकबेरी को भारत के बड़े बाजार में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है.

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अगर वास्तविक समय में जानकारी नहीं मिली तो फिर वो किसी काम के नहीं. दरअसल सुरक्षा एजेंसियों को इस बात की आशंका है कि ब्लैकबेरी का इस्तेमाल आतंकवादी साजिश और गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है. जटिल कोड होने के कारण सुरक्षा एजेंसियों के लिए इसे डिकोड करना संभव नहीं है. भारतीय गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है, "अगर दो आतंकवादी कहीं हमला करने के बारे में बातचीत कर रहे हैं तो हमें उनके संदेशों की जानकारी पाने के लिए 10 दिन तक इंतजार नहीं कर सकते."

ब्लैकबेरी के अधिकारी 31 अगस्त की समयसीमा के भीतर इंतजाम करने के लिए पूरी कोशिश करने में जुटे हैं. अगर ऐसा नहीं हुआ तो भारत में इस्तेमाल हो रहे उनके 10 लाख फोन काम करना बंद कर देंगे. सरकार ने इस बारे में मोबाइल सेवा दे रही कंपनियों को पहले ही आदेश दे दिया है. अधिकारियों ने कहा है कि अगले हफ्ते तक वो इस बारे में नया प्रस्ताव तैयार कर लेंगे. गृह मंत्रालय के अधिकारी ने ये भी बताया कि सुरक्षा एजेंसियां जब तक नए इंतजाम से संतुष्ट नहीं हो जातीं तब तक ब्लैकबेरी के सिग्नल को 1 सितंबर से जारी रखने के आदेश नहीं दिए जाएंगे.

रिपोर्टः एजेंसियां/ एन रंजन

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